नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इस हफ्ते तेजपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति (वाइस चांसलर) शंभु नाथ सिंह को छुट्टी पर भेज दिया और स्टूडेंट्स और टीचर्स के तीन महीने से चल रहे विरोध के बाद तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई. स्टूडेंट्स और टीचर्स कथित गड़बड़ियों को लेकर उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे थे.
असम के दो केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से एक, तेजपुर यूनिवर्सिटी में 27 सितंबर से हालात खराब हैं. इसी दिन कुलपति को हटाने की मांग को लेकर विरोध शुरू हुआ था. उन पर वित्तीय गड़बड़ियों, प्रशासनिक व्यवस्था के चरमराने, शैक्षणिक स्तर गिरने और नियमों के बार-बार उल्लंघन के आरोप हैं.
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि तीन सदस्यीय समिति स्थिति की समीक्षा करेगी, जिसमें सिंह के खिलाफ लगे आरोप भी शामिल होंगे. इस समिति की अध्यक्षता मणिपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर एन. लोकेंद्र सिंह करेंगे. इसके अन्य सदस्य हैं—नागालैंड यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर जगदीश कुमार पटनायक और यूनिवर्सिटी अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव प्रोफेसर मनीष आर. जोशी.
शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को दिप्रिंट से कहा, “कुलपति (सिंह) को सभी जिम्मेदारियों से खुद को अलग रखने और तुरंत छुट्टी पर जाने को कहा गया है. जांच पूरी होने तक वे छुट्टी पर ही रहेंगे.”
मंत्रालय ने आगे के आदेश तक आईआईटी-गुवाहाटी के प्रोफेसर अमरेंद्र कुमार दास को तेजपुर यूनिवर्सिटी का प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त किया है.
वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों के अलावा, प्रदर्शनकारियों ने सिंह पर लंबे वक्त तक कैंपस से अनुपस्थित रहने का आरोप लगाया है. यह भी आरोप है कि गायक ज़ुबिन गर्ग की मौत के बाद कैंपस चुनाव टालने की छात्रों की मांग पर उन्होंने असंवेदनशील टिप्पणी की थी.
स्टूडेंट्स और टीचर्स का कहना है कि अशांति के कारण नवंबर में शैक्षणिक गतिविधियां रुक गई थीं. 100 दिन का विरोध पूरा होने के बाद कुछ स्टूडेंट्स ने 24 घंटे की भूख हड़ताल भी की.
यूनिवर्सिटी में चले इस आंदोलन के कारण कई अहम अधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया, जिनमें रजिस्ट्रार और जनसंपर्क अधिकारी भी शामिल हैं.
असम के राज्यपाल, जो यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति (चांसलर) भी हैं, उन्होंने अक्टूबर में आईआईटी गुवाहाटी के निदेशक देवेंद्र जलीहल की अगुआई में एक फैक्ट-चैक समिति बनाई थी, ताकि यूनिवर्सिटी की स्थिति पर रिपोर्ट दी जा सके. यह साफ नहीं है कि यह रिपोर्ट कब सौंपी गई.
शिक्षा मंत्रालय ने 31 दिसंबर के अपने मेमोरेंडम में कहा कि नई समिति फैक्ट-चैक समिति के निष्कर्षों को भी स्टडी करेगी. मंत्रालय ने कहा कि समिति को तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी.
पिछले महीने उच्च शिक्षा सचिव विनीट जोशी की अगुआई में एक टीम तेजपुर कैंपस गई थी, ताकि छात्रों से बातचीत की जा सके, लेकिन वहां भी विरोध का सामना करना पड़ा. बाद में टीम ने प्रदर्शनकारियों को लिखित आश्वासन दिया, जिसमें सिंह के खिलाफ “सख्त” और “समयबद्ध” जांच का वादा किया गया.
छात्रों ने गुरुवार देर रात जारी बयान में कहा कि 103 दिनों के शांतिपूर्ण विरोध के बाद, मंत्रालय का उच्च स्तरीय जांच समिति बनाने का फैसला तेजपुर विश्वविद्यालय में संकट सुलझाने की दिशा में एक अहम कदम है.
उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सिंह के खिलाफ आरोपों की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और किसी बाहरी दबाव से मुक्त होगी.
समिति को पूरा सहयोग देने का भरोसा जताते हुए छात्रों ने कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलता और उनकी बाकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक विरोध जारी रहेगा. बयान में कहा गया, “यह फैसला एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन जब तक जांच पूरी तरह से न्याय को साबित नहीं कर देती, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा.”
पिछले महीने इस मुद्दे ने नेताओं का भी ध्यान खींचा. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से प्रो-वाइस चांसलर नियुक्त करने का आग्रह किया था. वहीं, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने 4 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर चल रही अशांति में हस्तक्षेप की मांग की थी.
दिप्रिंट ने आरोपों पर प्रतिक्रिया के लिए सिंह से संपर्क किया है. अगर उनकी ओर से कोई भी जवाब आता है, तो इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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