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Sunday, 15 February, 2026
होमडिफेंसUS के सैन्य कमांडर ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए ‘भारत की रणनीतिक कार्रवाई’ को सराहा, कहा—इसमें सबक भी है

US के सैन्य कमांडर ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए ‘भारत की रणनीतिक कार्रवाई’ को सराहा, कहा—इसमें सबक भी है

आपसी रिश्तों पर एडमिरल पापारो ने कहा कि भारत-US रिश्तों का रोकथाम पर बहुत ज़्यादा असर पड़ता है, क्योंकि यह शांति बनाए रखने के लिए हमारे बीच एकता दिखाता है.

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नई दिल्ली: अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो जूनियर ने रविवार को यहां कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने जिस तरह रणनीतिक स्तर पर कार्रवाई की और संयम दिखाया, वह सराहनीय है. उन्होंने यह भी कहा कि नई दिल्ली और वॉशिंगटन डीसी दोनों को चीनी हथियारों और रणनीति के इस्तेमाल से सबक सीखने की जरूरत है.

चुने हुए पत्रकारों के एक समूह से बातचीत में वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने कई मुद्दों पर बात की और रक्षा क्षेत्र में अमेरिका और भारत के बीच गहरे सहयोग पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि शांति ताकत के जरिए ही संभव है.

पहलगाम आतंकी हमले को भयानक बताते हुए पापारो ने कहा, “मैं ऑपरेशन सिंदूर में की गई रणनीतिक कार्रवाई और उससे सीखे गए सबकों पर आत्ममंथन की सराहना करता हूं.”

उन्होंने आगे कहा, “हम दिखाए गए संयम की सराहना करते हैं और हम साथ मिलकर काम करना चाहते हैं ताकि इससे पहले हुई ऐसी भयानक घटना यानी पहलगाम हमला दोबारा न हो. और आप जानते हैं, जब इस तरह की कार्रवाइयां होती हैं तो सभी शांति पसंद देश चिंतित होते हैं.”

दिप्रिंट ने उनसे पूछा कि 2017 में डोकलाम और 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ टकराव से, और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीनी सैटेलाइट और हथियारों के इस्तेमाल से क्या सबक सीखे जा सकते हैं. इस पर पापारो ने जवाब दिया, “लगातार सतर्कता और लगातार तैयारी.”

उन्होंने आगे कहा, “पहला सबक यही है कि हमेशा सतर्क और तैयार रहना चाहिए. कोई नहीं जानता कि कठिन समय कब आ जाए. और दूसरा, मजबूत प्रतिरोधक रुख बनाए रखना बहुत जरूरी है.”

उन्होंने कहा, “हम मानते हैं कि हमारी साझेदारियां प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ाती हैं, क्योंकि इससे शांति बनाए रखने और ताकत के जरिए शांति कायम रखने का हमारा साझा उद्देश्य दिखता है. और जब हमारे नीति निर्माता रिश्तों को संभाल रहे हैं, तब हमारे सैन्य नेताओं की जिम्मेदारी है कि वे क्षमताओं पर करीबी नजर रखें और किसी भी समय उनका मुकाबला करने के लिए तैयार रहें.”

ऑपरेशन सिंदूर पर और सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि हर ऑपरेशन से सबक मिलते हैं. “हर ऑपरेशन से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. जिन हथियारों का इस्तेमाल हुआ और उन्हें मार्गदर्शन देने में संभावित भागीदारी, यह गहरी चिंता का विषय था. हम सभी को इससे सीखने का मौका मिलना चाहिए.”

एडमिरल ने कहा कि उन्होंने भारतीय सेना में इन सबकों को सीखने के प्रति गहरी प्रतिबद्धता देखी है. उन्होंने कहा, “इन रणनीतिक सबकों को समझना और लागू करना हमारे लिए और भारतीय सेनाओं के लिए बेहतर बनने में मदद करेगा, ताकि अगर फिर कभी कठिन समय आए तो हम तैयार रहें. हालांकि हम सब ऐसी स्थिति से बचने के लिए काम कर रहे हैं.”

जब उनसे पूछा गया कि ऑपरेशन सिंदूर से अमेरिका ने क्या सबक लिया, तो उन्होंने जवाब दिया, “जटिल लंबी दूरी के हथियारों की मारक श्रृंखला भी जटिल और लंबी होती है.”

उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में सेंसर, संचार, प्रोपल्शन, वारहेड और सीकर जैसी तकनीकों के मेल के कारण भूगोल अब पहले जैसा निर्णायक नहीं रहा है, क्योंकि अंतरिक्ष, सूचना, प्रोपल्शन और सीकर तकनीक आम हो चुकी हैं.

उन्होंने कहा, “21वीं सदी में वही आगे रहेगा जो सूचना के माहौल पर पकड़ बनाएगा. इसमें अंतरिक्ष, काउंटर-स्पेस, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, कम दिखाई देने वाली तकनीक और अन्य तकनीकें शामिल हैं, जो सेना को मारक क्षमता और सुरक्षा दोनों देती हैं.”

उन्होंने जोड़ा, “मेरा मानना है कि सबक यह है कि कई तकनीकें अब आम हो चुकी हैं और देश लगातार एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में लगे रहते हैं. इसलिए हमें इन सबकों पर बहुत ध्यान देना चाहिए.”

एडमिरल ने समुद्री क्षेत्र, खासकर पानी के नीचे के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच और ज्यादा करीबी सहयोग की जरूरत पर जोर दिया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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