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Friday, 27 March, 2026
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भारत का चौथा S-400 सिस्टम रूस में तैयार, डिलीवरी से पहले आखिरी टेस्ट जारी

यह सिस्टम मार्च में आना था, लेकिन अब मई या जून तक भारत पहुंचेगा. पांचवां S-400 इस साल के आखिरी तिमाही में मिलेगा.

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नई दिल्ली: भारत का चौथा S-400 ट्रायम्फ एयर डिफेंस सिस्टम, जो लगभग तीन साल की देरी से आ रहा है, अब तैयार है और इस साल की दूसरी तिमाही में डिलीवरी से पहले उसका आखिरी टेस्ट चल रहा है. दिप्रिंट को इस बारे में जानकारी मिली है.

रक्षा और सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि यह सिस्टम मार्च में डिलीवर होना था, लेकिन अब यह मई या जून तक भारत पहुंचेगा. सूत्रों ने कहा कि पांचवां S-400 सिस्टम इस साल की आखिरी तिमाही में डिलीवर किया जाएगा, जिससे भारत के प्लान किए गए एयर डिफेंस नेटवर्क को मजबूती मिलेगी.

जानकारी के मुताबिक, कुल पांच सिस्टम में से तीन को पाकिस्तान की सीमा के पास पश्चिमी बॉर्डर पर तैनात किया जाएगा. सूत्रों ने कहा कि तीन सिस्टम तैनात होने के बाद पाकिस्तान से आने वाले खतरों के खिलाफ एयर डिफेंस पूरी तरह मजबूत हो जाएगा.

2018 में 5 अरब डॉलर की डील के तहत ऑर्डर किए गए पांच सिस्टम में से तीसरा सिस्टम 2023 की शुरुआत में डिलीवर किया गया था. इसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बाकी सिस्टम की डिलीवरी में देरी हुई.

पिछले साल दिसंबर में दिल्ली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक में भी इस देरी का मुद्दा उठाया गया था.

यह डिलीवरी ऐसे समय हो रही है जब भारत पांच और नए S-400 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने की तैयारी कर रहा है. ये सिस्टम प्रोजेक्ट सुदर्शन चक्र का अहम हिस्सा होंगे, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर की थी.

नवंबर में दिप्रिंट ने रिपोर्ट की थी कि भारत पांच और S-400 सिस्टम का ऑर्डर देने पर विचार कर रहा है.

सूत्रों ने बताया कि जब कुल 10 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात हो जाएंगे और भारत का अपना प्रोजेक्ट खुशा भी लागू हो जाएगा, तब देश का एयरस्पेस ड्रोन, 4.5 जनरेशन से ऊपर के फाइटर विमान और मिसाइलों से लगभग पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा.

सूत्रों ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 सिस्टम ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और पाकिस्तान के विमान, जिसमें J-10 भी शामिल हैं, को दूर रखने में सफल रहा.

सूत्रों के अनुसार भारत-पाकिस्तान के बीच 88 घंटे के संघर्ष के दौरान S-400 ने अपनी सबसे लंबी दूरी की सफल मार दर्ज की. साथ ही कम समय में फायर करके तुरंत जगह बदलने की इसकी क्षमता भी साबित हुई, जिससे यह दुश्मन के हमले से बच सकता है.

7 मई को भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के एयरस्पेस के अंदर ही पाकिस्तान एयर फोर्स के JF-17 विमान को मार गिराया और उनके फाइटर विमानों को पीछे हटने पर मजबूर किया.

हालांकि, सीमित समय के लिए पाकिस्तानी विमान एक ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करने में सफल रहे जहां कवरेज कम था और उन्होंने वहां से हथियार लॉन्च किए.

सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी क्षेत्र में दो S-400 सिस्टम तैनात थे और बीच में थोड़ा गैप था.

एक सूत्र ने कहा, “जैसे ही तीसरा सिस्टम तैनात होगा, पूरा पश्चिमी बॉर्डर पूरी तरह सुरक्षित हो जाएगा और पाकिस्तान के अंदर तक उड़ने वाले हर फाइटर विमान को निशाना बनाया जा सकेगा.”

S-400 सिस्टम 400 किमी तक की दूरी पर आने वाले दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को नष्ट कर सकता है. इसकी ट्रैकिंग क्षमता करीब 600 किमी तक है.

यह सिस्टम स्टेल्थ टेक्नोलॉजी वाले उड़ने वाले टारगेट को भी करीब 400 किमी की दूरी से मार गिराने के लिए बनाया गया है. यह बैलिस्टिक मिसाइल और हाइपरसोनिक टारगेट को भी नष्ट कर सकता है.

अपने पुराने S-300 सिस्टम की तुलना में S-400 की फायरिंग स्पीड 2.5 गुना ज्यादा तेज है. S-400 में चार तरह की मिसाइल लगाई जा सकती हैं, जिनकी रेंज 400 किमी, 250 किमी, 120 किमी और 40 किमी है. इसका लॉन्ग रेंज रडार एक साथ 100 से ज्यादा उड़ने वाली चीजों को ट्रैक कर सकता है और करीब 12 टारगेट पर एक साथ हमला कर सकता है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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