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Friday, 3 April, 2026
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भारत ने अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी—INS अरिधमन को शामिल किया

INS अरिहंत SSBN प्रोजेक्ट की पहली पनडुब्बी थी और 2016 में चुपचाप शामिल की गई थी. दूसरी स्वदेशी SSBN, INS अरिघात, अगस्त 2024 में शामिल की गई थी.

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नई दिल्ली: भारत ने शुक्रवार को अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) अरिधमन (एस4) को शामिल किया.

विशाखापत्तनम में यह कार्यक्रम गुप्त रखा गया, लेकिन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर एक सामान्य सा संदेश पोस्ट किया: “यह शब्द नहीं, ताकत है, ‘अरिधमन’!”

रक्षा और सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने पुष्टि की कि भारत की तीसरी एसएसबीएन को शामिल कर लिया गया है. एसएसबीएन का मतलब होता है ship submersible ballistic nuclear यानी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी.

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने पिछले दिसंबर कहा था कि आईएनएस अरिधमन परीक्षण के अंतिम चरण में है और जल्द शामिल की जाएगी.

भारत का एसएसबीएन कार्यक्रम बहुत गोपनीय प्रोजेक्ट है.

आईएनएस अरिहंत एसएसबीएन प्रोजेक्ट की पहली पनडुब्बी थी, जिसके बाद आईएनएस अरिघात आई. आईएनएस अरिहंत को जुलाई 2009 में लॉन्च किया गया था और 2016 में चुपचाप शामिल किया गया. दूसरी स्वदेशी एसएसबीएन, आईएनएस अरिघात, अगस्त 2024 में शामिल की गई थी.

चौथी और पांचवीं एसएसबीएन पर काम पहले से चल रहा है, जो अरिहंत सीरीज से बड़ी और ज्यादा ताकतवर होंगी.

भारत ने न्यूक्लियर ट्रायड पूरा कर लिया है, यानी वह हवा, जमीन और समुद्र के नीचे से परमाणु हथियार लॉन्च कर सकता है.

भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास परमाणु-संचालित पनडुब्बियां हैं. ऐसे देश हैं अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन.

भारतीय नौसेना 2036-2037 तक अपनी पहली पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन की गई परमाणु अटैक पनडुब्बी (एसएसएन) शामिल करने की योजना बना रही है और दूसरी लगभग दो साल बाद शामिल होगी.

कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) ने पहली दो SSN को मंजूरी दे दी है.

1999 में तय 30 साल पुराने पनडुब्बी निर्माण कार्यक्रम के अनुसार, भारत को 2030 तक 24 पारंपरिक पनडुब्बियां शामिल करनी थीं. हालांकि, अभी तक सिर्फ छह शामिल की गई हैं.

एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) सिस्टम के साथ अगली छह पारंपरिक पनडुब्बियां बनाने की योजना, प्रोजेक्ट 75 (इंडिया) के तहत, अभी कॉन्ट्रैक्ट नहीं हुई है और अगले छह महीनों में की जाएगी.

P75(I) कार्यक्रम के अनुभव का उपयोग प्रोजेक्ट 76 में किया जाएगा, जिसके तहत 12 पूरी तरह स्वदेशी पनडुब्बियां बनाई जाएंगी.

मोदी सरकार के दौरान, दिवंगत रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने 12 पनडुब्बियों में से छह को परमाणु अटैक पनडुब्बी में बदलने का फैसला किया था, जो भारतीय नौसेना के पास रहेंगी और नौसेना के बजट का हिस्सा होंगी.

एसएसबीएन कार्यक्रम अलग है, इसकी फंडिंग अलग सिस्टम से होती है और यह स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड के तहत काम करता है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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