Monday, 6 December, 2021
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त्रिपुरा, नवाब मलिक, नोटबंदी-इस हफ़्ते देश के उर्दू प्रेस में कौन से मुद्दे सुर्ख़ियों में रहे

दिप्रिंट अपने इस राउंड अप में बता रहा है कि पूरे हफ्ते के दौरान उर्दू मीडिया ने विभिन्न खबरों को कैसे कवर किया और उनमें से किस घटना को संपादकीय में जगह दी.

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नई दिल्ली: उर्दू के इस्तेमाल को लेकर हाल में भले ही हंगामा मचा हो लेकिन यह एक समृद्ध साहित्यिक विरासत की भाषा है, जो पांच करोड़ से अधिक भारतीयों के लिए आम बोलचाल का हिस्सा है. यही नहीं, 2011 की जनगणना के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि कैसे यह उत्तर भारत के अपने पारंपरिक गढ़ (ख़ासकर उत्तर प्रदेश) से आगे बढ़कर दक्षिणी राज्यों में भी जड़ें जमा रही है.

दिप्रिंट अब इस पर एक साप्ताहिक राउंडअप तैयार करेगा कि उर्दू मीडिया में क्या लिखा जा रहा है. रोज़मर्रा की ख़बरें कैसे रिपोर्ट की जा रही हैं और उनमें से कुछ पर संपादकीय रुख़ क्या रहता है.

उर्दूस्कोप के इस पहले संस्करण में एक नज़र बीते हफ़्ते की सुर्ख़ियों पर…

 

त्रिपुरा हिंसा

त्रिपुरा हिंसा उर्दू प्रेस में ख़ास सुर्ख़ियों में रही. पिछले रविवार यानी 7 नवंबर को इंक़लाब ने अपने पहले पेज पर राज्य के दौरे पर पहुंची फै़क्ट फ़ाइंडिंग समिति के सदस्यों के ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई पर विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों की प्रतिक्रियाओं पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की.

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पी.वी. अब्दुल वहाब और आईयूएमएल के ई.टी. मुहम्मद बशीर जैसे सांसदों की प्रतिक्रिया के साथ इस रिपोर्ट में बताया गया कि सांसद इसी महीने शुरू होने वाले संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में यह मुद्दा कैसे उठाने की योजना बना रहे हैं.

सोमवार, 8 नवंबर को सियासत ने अपने पहले पन्ने पर त्रिपुरा में 102 सोशल मीडिया हैंडल के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत दर्ज मामलों के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की. उसी दिन इंक़लाब में प्रमुख समाचार यह क़दम उठाए जाने से बढ़ी ‘नाराज़गी’ को लेकर ख़बर दी. इसने इस क़दम की आलोचना करते हुए एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया का बयान भी प्रकाशित किया.

12 नवंबर को भी इंक़लाब ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से इस मामले पर एक याचिका स्वीकार किए जाने की ख़बर अपने पहले पन्ने पर लगाई.

बिहार में ज़हरीली शराब से मौत

बिहार में ज़हरीली शराब के कारण 30 से अधिक लोगों की मौत का मुद्दा इस हफ़्ते उर्दू के विभिन्न अख़बारों में सुर्ख़ियों में छाया रहा.

इंक़लाब ने 8 नवंबर को अपने एक संपादकीय में लिखा कि 2016 में शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब का व्यापार जारी रहने के लिए राज्य सरकार दोषी है और कहा कि चूंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने फै़सले से राजनीतिक लाभ उठाया है इसलिए यह बताना भी उनकी ही जवाबदेही है कि फै़सले पर अमल में चूक कहां हुई.

10 नवंबर को एक अन्य रिपोर्ट में इंक़लाब ने उस घटना के बारे में बताया जिसमें बेतिया से बीजेपी सांसद संजय जायसवाल को ज़हरीली शराब से मरने वालों के परिवारों को 5,000 रुपए के लिफ़ाफे़ सौंपने के बाद उनके ग़ुस्से का सामना करना पड़ा था. अख़बार ने कहा कि अब जब ग़रीब नाराज़ होने लगे हैं तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को शराबबंदी का राजनीतिक लाभ मिलना बंद हो सकता है.

नवाब मलिक बनाम देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र में एनसीपी के मंत्री नवाब मलिक और बीजेपी के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच वाकयुद्ध पर उर्दू प्रेस एकदम बारीक़ी से नज़र रखे है और हर आरोप-प्रत्यारोप के बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की जा रही है—चाहे नवाब मलिक का यह आरोप हो कि अभिनेता शाहरुख़ ख़ान का बेटा आर्यन ‘फ़िरौती की साज़िश के लिए अपहरण’ (8 नवंबर, सियासत) का शिकार बना था, या फिर मलिक की वह प्रेस कांफ़्रेंस जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि फडणवीस ने कई सरकारी पदों पर ‘अपराधियों’ को नियुक्त किया था (11 नवंबर, इंक़लाब).

उसी दिन, सियासत ने मलिक की तरफ़ से जारी एक तस्वीर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया जिसमें मोदी एक कथित हिस्ट्रीशीटर के साथ नज़र आ रहे थे. अख़बार ने अपने पहले पन्ने पर (10 नवंबर को) एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसमें एनसीबी के जोनल डायरेक्टर समीर वानखेड़े के परिवार के सदस्यों ने मलिक के ख़िलाफ़ राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से शिकायत की थी.

लखीमपुर खीरी

पिछले महीने लखीमपुर खीरी में हुई मौतें सभी भाषाओं में मीडिया की सुर्ख़ियों बनी रही हैं लेकिन केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा की गन को लेकर फोरेंसिक सबूत सामने आने से पहले ही उर्दू अख़बार इस घटना के लिए ‘हत्या’ शब्द का इस्तेमाल करते रहे हैं.

इस घटनाक्रम ने 10 नवंबर को इंक़लाब और रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा दोनों के पहले पन्ने पर जगह बनाई. सियासत ने 9 नवंबर को उत्तर प्रदेश सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि वह ‘हत्या’ मामले में ‘आरोपियों’ को बचाने की कोशिश कर रही है.

नोटबंदी

8 नवंबर को नोटबंदी की पांचवीं वर्षगांठ का इस्तेमाल अख़बारों ने इस कदम के पीछे सरकार के घोषित लक्ष्यों की दिशा में कोई ठोस प्रगति न होने की तरफ़ ध्यान दिलाने के लिए किया. सियासत ने 9 नवंबर को इस मुद्दे पर एक न्यूज़ रिपोर्ट प्रकाशित की जबकि इंक़लाब ने 11 नवंबर को एक संपादकीय लिखा जिसमें सवाल उठाया गया कि आख़िर इतनी बड़ी तादाद में मुद्रा को चलन से बाहर करने का स्थायी सकारात्मक नतीजा क्या निकला?

सियासत ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि नोटबंदी से बेरोज़गारी बढ़ी और कारोबार ठप हो गया.

अंतरराष्ट्रीय घटनाएं

सियासत ने 8 नवंबर को पहले पेज पर इजरायली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के बयान को जगह दी जिसमें उन्होंने कहा था कि फ़िलिस्तीनियों के लिए यरूशलेम में कोई अमेरिकी वाणिज्य दूतावास नहीं है. अगले दिन, अख़बार ने पहले पेज पर सऊदी अरब में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से अनिवासियों को मक्का और मदीना में अचल संपत्ति में निवेश की अनुमति देने के फै़सले के बारे में एक रिपोर्ट प्रकाशित की.

11 नवंबर को अफ़गानिस्तान के घटनाक्रम पर भारत का क्षेत्रीय वार्ता की मेज़बानी करना अख़बारों में ख़ासतौर पर सुर्ख़ियों में रहा. इंक़लाब ने जहां चीन और पाकिस्तान दोनों की ग़ैर-मौजूदगी को रेखांकित किया, वहीं सियासत ने सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति और सशस्त्र बलों को सतर्क रहने की आवश्यकता जताने वाले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के एक बयान के साथ इस वार्ता के बारे में रिपोर्ट प्रकाशित की.

गुजरात दंगों पर ज़किया जाफ़री

सियासत और रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा दोनों ने ही 11 नवंबर को कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल के उस बयान को पहले पेज पर प्रमुखता से छापा, जिसमें गुजरात दंगों के मामले में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफ़री की पत्नी ज़किया जाफ़री की तरफ़ से सुप्रीम कोर्ट में पेश होने के दौरान उन्होंने कहा था कि सांप्रदायिक हिंसा ज्वालामुखी के लावा की तरह फैलती है. एहसान जाफ़री की 2002 में गुलबर्ग सोसाइटी में हत्या कर दी गई थी.

अपने वकील सिब्बल के जरिए ज़किया ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विशेष जांच दल ने राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी और 64 अन्य को क्लीन चिट देने के लिए तमाम अहम सबूतों के प्रति अपनी आंखें मूंद ली थीं.

(उर्दूस्कोप को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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