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सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो/पीटीआई)
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सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश से संबंधित 19 याचिकाएं लंबित हैं, इनमें निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की गई है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश संबंधी संवैधानिक पीठ के फैसले के खिलाफ दोबारा सुनवाई का आग्रह करने वाली कई याचिकाओं पर मंगलवार को निर्णय करेगा. सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने अपने ऐतिहासिक फैसले में केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी है.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय कृष्ण कौल की पीठ ने सोमवार को कहा कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई में जिस पीठ ने 28 सितम्बर को यह फैसला सुनाया था, उसे दोबारा पुनर्गठित किया जाना है.


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पुनर्विचार याचिकाओं पर प्राय: मामले के संबंध में फैसला सुनाने वाली पीठ ही विचार करती है. नेशनल एसोसिएशन ऑफ अयप्पा डिवोटीज की ओर से पुनर्विचार याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग के बाद प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सुनवाई के संबंध में निर्णय लिया जाएगा.

धार्मिक विश्वास को ‘तार्किक आधार पर न परखें

अदालत के समक्ष इस संबंध में 19 याचिकाएं लंबित हैं, जिसमें निर्णय पर दोबारा सुनवाई की मांग की गई है. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में रजस्वला महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं देने की वर्षों पुरानी परंपरा को समाप्त कर दिया है.

याचिकाकर्ताओं ने फैसले में प्रक्रियात्मक त्रुटियों का मुद्दा उठाकर मामले की दोबारा सुनवाई की मांग की है. इसके साथ ही याचिकाकर्ताओं ने कहा कि धार्मिक विश्वास को ‘तार्किक आधार पर परखा नहीं जा सकता.’

बराबरी के अधिकार का उल्लंघन

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 4:1 के बहुमत से यह फैसला सुनाया था.

पीठ ने कहा था कि रजस्वला उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने देना उनके मूलभूत अधिकार और संविधान की ओर से बराबरी के अधिकार की गारंटी का उल्लंघन है.

इस मंदिर में रजस्वला महिलाओं की उपस्थिति को ‘अपिवत्र’ माना जाता रहा है.

कोर्ट पर भारी पड़े प्रदर्शनकारी

बीते बुधवार को मंदिर को दर्शनार्थियों के लिए खोला गया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कोई महिला मंदिर में प्रवेश नहीं कर पाई. मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही कई संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया था. प्रदर्शनकारियों के विरोध के चलते किसी महिला को मंदिर में प्रवेश नहीं मिल सका.

हालांकि, प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लागू करवाने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की थी लेकिन प्रदर्शनकारी पुलिस, प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट पर भारी पड़े. कई महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन उन्हें मंदिर में प्रवेश नहीं ​करने दिया गया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ भाजपा, कांग्रेस, विहिप जैसे दलों ने भी बंद और प्रदर्शन को समर्थन दिया.

रविवार को 4 महिलाओं को प्रदर्शनकारियों ने लौटाया

आंध्र प्रदेश की रहने वाली चार महिलाएं रविवार को भगवान अयप्पा के दर्शन के लिए सबरीमाला मंदिर की ओर जा रही थीं कि तभी गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने उनका रास्ता रोका और उन्हें वापस लौटा दिया. सुबह 10 बजे एक पुरुष श्रद्धालु के साथ दो महिलाओं को प्रदर्शनकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ा. श्रद्धालु पहाड़ी पर स्थित मंदिर के अपने सफर की शुरुआत करने के लिए मंदिर कस्बे के मुख्य मार्ग में प्रवेश करने के करीब थे कि तभी प्रदर्शनकारियों ने उन्हें घेर लिया.

संकट बढ़ता देख पुलिस अधिकारियों ने दोनों महिलाओं के इर्द-गिर्द एक सुरक्षा घेरा बना लिया और वे उन्हें पांबा के पुलिस नियंत्रण कक्ष ले गए.


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पुलिस महानिरीक्षक एस.श्रीजित ने संवाददाताओं को बताया कि दोनों महिलाओं का कहना है कि जब उन्होंने सुना कि सर्वोच्च न्यायालय ने सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की इजाजत दे दी है, तो उन्होंने तीर्थयात्रा करने का फैसला किया.

श्रीजित ने कहा, ‘ये महिलाएं आंध्र प्रदेश के तीर्थयात्रा समूह का हिस्सा हैं और केरल के विभिन्न मंदिरों की यात्रा कर रही हैं. जब उन्हें विरोध प्रदर्शन के बारे में बताया गया तो उन्होंने लौटने का फैसला किया और हमने उन्हें निलक्कल में खड़े वाहन तक पहुंचाया.’

दोनों महिलाओं को वापस भेजने के तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों ने एक अन्य महिला को मंदिर की ओर जाते हुए पाया. उन्होंने उसे भी रोका और वापस जाने को कहा.

होहल्ला होते देख पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे. महिला के आधार कार्ड में उसकी उम्र 47 वर्ष देखने के बाद प्रदर्शनकारी भड़क गए. हंगामे के बीच महिला ने बेचैनी महसूस की, जिसे क्लीनिक ले जाया गया. उसके बाद बिना दर्शन किए उसे वापस लौटना पड़ा.

पहाड़ी की चोटी पर पालकी से जा रही चौथी महिला को प्रदर्शनकारियों ने मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर पहचान लिया. जैसे ही प्रदर्शनकारी महिला के पास पहुंचे, पुलिस ने महिला को बचा लिया और उसे वापस पांबा ले जाया गया.

इस बीच भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष पीएस श्रीधरन पिल्लई ने रविवार को कहा कि मुख्यमंत्री पिनरई विजयन को विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाना चाहिए और केंद्र से अदालत के फैसले को रद्द कराने के लिए एक अध्यादेश लाने की सिफारिश करनी चाहिए.

(समाचार एजेंसी आईएएनएस से इनपुट के साथ)


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