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Monday, 17 June, 2024
होमसमाज-संस्कृतिअगर राहुल अडानी के बारे में झूठे दावे कर रहे हैं तो सरकार उन्हें ग़लत साबित क्यों नहीं कर रही है: उर्दू प्रेस

अगर राहुल अडानी के बारे में झूठे दावे कर रहे हैं तो सरकार उन्हें ग़लत साबित क्यों नहीं कर रही है: उर्दू प्रेस

पेश है दिप्रिंट का राउंड-अप कि कैसे उर्दू मीडिया ने पिछले सप्ताह के दौरान विभिन्न समाचार संबंधी घटनाओं को कवर किया और उनमें से कुछ ने इसके बारे में किस तरह का संपादकीय रुख इख्तियार किया.

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तुर्की और सीरिया में तबाही मचाने वाले और कई हजार लोगों की जान लेने वाले भूकंप ने उर्दू प्रेस में पहले पन्ने की सुर्खियां बटोरीं. अडानी समूह संबंधी हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर संसद में हंगामा ने भी पिछले सप्ताह की तरह इस हफ्ते भी अख़बारों को गुलज़ार रखा.

24 जनवरी को अपनी रिपोर्ट में अमेरिकी फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी समूह पर ‘बेशर्म स्टॉक हेरफेर’ का आरोप लगाया था. रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद से, अडानी समूह के शेयरों में तेजी से गिरावट आई, समूह का लगभग आधा मार्किट वैल्यू दो सप्ताह में ही समाप्त हो गया.

खासतौर से, इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान और प्रधानमंत्री मोदी के पलटवार को उर्दू अखबारों में प्रमुख्ता से कवरेज मिली है.

हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और पूर्व पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की मौत ने भी उर्दू प्रेस में जगह बनाई.

दिप्रिंट आपके लिए इस सप्ताह उर्दू प्रेस में सुर्खियां बटोरने वाले सभी मुद्दों का साप्ताहिक राउंडअप लेकर आया है.

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राहुल गांधी और अडानी

हिंडनबर्ग रिपोर्ट के नतीजे और सरकार-विपक्ष के बीच इसे लेकर खींचतान रोज़नामा राष्ट्रीय सहारा, इंकलाब और सियासत में व्यापक रूप से कवर किया गया.

6 फरवरी को उर्दू अखबारों ने खबर दी कि कांग्रेस प्रधानमंत्री से अडानी के संबंध में तीन सवाल पूछने जा रही है. सियासत ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक और सिक्योरिटिज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया सभी ने इस विषय पर टालमटोल वाले जवाब दिए, जबकि मोदी ने अध्ययन के बाद चुप्पी साध रखी है.

7 फरवरी को, तीनों अखबारों ने खबर दी कि महाराष्ट्र सरकार ने गौतम अडानी के बेटे करण और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी के छोटे बेटे अनंत को टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन की अध्यक्षता वाली राज्य आर्थिक सलाहकार परिषद में शामिल किया है.

एक अलग रिपोर्ट में सहारा ने लिखा कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद दुनिया के 10 सबसे अमीर अरबपतियों में भारत की स्थिति खराब हो गई है.

गौरतलब है कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद से, अडानी की व्यक्तिगत संपत्ति में $44 बिलियन की गिरावट देखी गई है, जिससे अंबानी को एशिया के सबसे अमीर अरबपति के रूप में आगे निकलने में मदद मिली है. फोर्ब्स की अमीरों की लिस्ट में जहां अंबानी नौवें स्थान पर थे, वहीं अडानी 15वें स्थान पर खिसक गए हैं.

उसी अखबार के एक अन्य कॉलम में राहुल गांधी के हवाले से लिखा गया है कि मोदी संसद में इस मुद्दे पर चर्चा से बचने की कोशिश करेंगे.

उसी दिन, इंकलाब ने खबर दी कि विपक्ष ने इस विषय पर चर्चा की मांग करना जारी रखी है, यहां तक ​​कि उन्होंने अडानी समूह के खिलाफ हिंडनबर्ग के आरोपों की जांच के लिए एक संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की मांग की.

इसी अखबार ने अपने संपादकीय में कहा है कि सरकार को जनता के बीच विश्वास पैदा करने के लिए जरूरी सभी उपायों को अपनाना चाहिए. अगर यह एक ऐसा विषय है जिसका राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर कोई वास्तविक प्रभाव नहीं है – जैसा कि सरकारी सूत्रों ने जनता को विश्वास दिलाया है – जेपीसी के लिए विपक्ष की मांग को सम्मानपूर्वक स्वीकार करने में कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए.

8 फरवरी को, उर्दू अखबारों ने लोकसभा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के प्रधानमंत्री पर तीखे हमले के बारे में लिखा है. संसद में अपने भाषण में, गांधी ने अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी के साथ कथित संबंधों को लेकर मोदी पर निशाना साधा और उन पर क्रोनी कैपिटलिज्म का आरोप लगाया. भाषण के अंश तब से संसद के रिकॉर्ड से हटा दिए गए हैं.

सियासत ने उसी दिन अपने पहले पन्ने पर जानकारी दी कि विपक्षी दल एक बार फिर हिंडनबर्ग रिपोर्ट पर बहस के लिए लामबंद हो गए हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि विरोध प्रदर्शनों ने राज्यसभा को दोपहर 2 बजे तक ठप कर दिया था और इसकी वजह से प्रश्नकाल और शून्यकाल नहीं हो सका.

9 फरवरी को अपने संपादकीय में सहारा ने आश्चर्य जताया कि अगर गांधी के आरोप वास्तव में झूठे थे तो क्यों मोदी और उनके कैबिनेट सहयोगियों ने पॉइंट-टू-पॉइंट खंडन के माध्यम से उन्हें गलत साबित किया. इसके बजाय, सरकार ने पिछली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के प्रदर्शन पर सवाल उठाया, जिसने दिखाया कि वह इन आरोपों का स्पष्ट जवाब देने की स्थिति में नहीं थी.

सियासत ने एक रिपोर्ट में गांधी के आरोपों के जवाब में मोदी द्वारा संसद में जारी किए गए बयान का जिक्र किया. अपने जवाब में, मोदी ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया और उन पर उनके खिलाफ एक बदनाम अभियान चलाने का आरोप लगाया.

उसी दिन, सियासत ने मोदी के बयान को अपने पहले पन्ने पर छापा। उसी अखबार की एक अन्य रिपोर्ट में गांधी के हवाले से पूछा गया कि उनके शब्दों को क्यों हटाया गया.

अगले दिन अपने संपादकीय में, सियासत ने कहा कि विपक्ष के दृष्टिकोण पर चर्चा करने का कोई प्रयास नहीं किया गया है, न ही कभी इसकी राय ली गई है. संपादकीय में तर्क दिया गया है कि सरकार की नीतियों और उपायों को बलपूर्वक और लोकतांत्रिक परंपराओं के लिए अल्प सम्मान के साथ लागू करने में थोड़ी सी भी हिचकिचाहट नहीं है, यह कहते हुए कि इस तरह की स्थिति देश के लोकतंत्र के लिए स्वस्थ नहीं है.


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तुर्की भूकंप

6 फरवरी को तुर्की और सीरिया में तीन भूकंपों से हुई तबाही ने अगले दिन तीनों अखबारों के पहले पन्ने पर जगह बनाई.

सियासत ने बचाव कार्यों की तीन तस्वीरों के साथ फ्रंट पेज पर खबर दी और यह भी बताया कि भारत मानवीय सहायता के साथ-साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के कर्मियों को मदद के लिए भेजेगा.

इस बीच, इंकलाब ने भूकंप के झटकों की एक टाइमलाइन दी, जो सभी 24 घंटों में आए थे. रिपोर्ट में कहा गया है कि पहला झटका एक मिनट के लिए महसूस किया गया था और लगभग इतनी ही तीव्रता का दूसरा झटका 11 मिनट बाद महसूस किया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मोदी सरकार ने तुर्की को हर संभव सहायता देने का वादा किया था.

8 फरवरी को सहारा ने लिखा कि प्रधानमंत्री कार्यालय से सहायता की घोषणा के कुछ घंटे बाद भारत ने तुर्की को भूकंप राहत सामग्री के दो बैच भेजे.

सियासत ने बताया कि भूकंप के कारण मरने वालों की संख्या 5 हजार पार कर गई थी और बचाव कार्य अभी भी चल रहा था. अखबार ने पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज़ शरीफ की घोषणा की कि वह तुर्की का दौरा करने जा रहे हैं.

उसी दिन अखबार में एक संपादकीय में कहा गया था कि सीरिया एक ऐसा देश जो पहले से ही एक दशक से लंबे युद्ध से जूझ रहा है. उसके लिए भूकंप विशेष रूप से विनाशकारी था और ऐसे समय में दुनिया को अपने राजनीतिक मतभेदों को दूर कर दोनों देशों की मदद करनी चाहिए.

9 फरवरी को, सियासत ने अपने पहले पन्ने पर बताया कि भूकंप ने तुर्की और सीरिया में 11 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई है. इसमें विदेश मंत्री एस जयशंकर के हवाले से यह भी कहा गया है कि वायु सेना के दो विमान दक्षिण तुर्की में भूकंप प्रभावित अदाना पहुंचे थे और सेना वहां 30 बिस्तरों वाला फील्ड अस्पताल स्थापित कर रही थी.

अतिक्रमण रोधी अभियान

उर्दू अखबारों में अतिक्रमण विरोधी अभियान पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ने भी सुर्खियां बटोरीं हैं.

8 फरवरी को, सहारा ने लिखा कि सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार और भारतीय रेलवे को उस जमीन पर बनी कॉलोनियों के निवासियों के पुनर्वास के लिए आठ हफ्ते का समय दिया है, जिस पर रेलवे अपना दावा कर रहा है. अदालत उत्तराखंड हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी जिसमें कॉलोनियों में रहने वाले 4 हजार परिवारों को बेदखल करने का आदेश दिया गया था.

सहारा ने एक अन्य रिपोर्ट में बताया कि कैसे जम्मू-कश्मीर प्रशासन का अतिक्रमण विरोधी अभियान एक बड़े विवाद में बदल गया था.

विवाद 9 जनवरी को शुरू हुआ, जब प्रशासन ने एक नोटिस जारी कर जिला अधिकारियों को महीने के अंत तक राज्य की भूमि पर सभी अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया. बुलडोजर चलने से विरोध जारी रहा, विपक्ष ने अब प्रशासन पर गरीबों को निशाना बनाने और लोगों को विस्थापित करने का आरोप लगाया.


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हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट

हेट स्पीच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख ने उर्दू प्रेस के पहले पन्नों पर जगह बनाई.

8 फरवरी को, सियासत ने सुप्रीम कोर्ट के हवाले से कहा कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म आधारित घृणा अपराधों के लिए कोई जगह नहीं है. अदालत ने अपने रुख को कड़ा करते हुए कहा कि देश में नफरत भरे भाषण की घटनाएं बढ़ रही हैं और यह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों के खिलाफ कार्रवाई करें.

अगले दिन संपादकीय में सियासत ने कहा कि पिछले आठ सालों में राजनीतिक माहौल ने घृणा अपराधों को फलने-फूलने दिया है. अखबार ने कहा कि आश्चर्य की बात यह है कि कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​ऐसे अपराधों के अपराधियों के खिलाफ मामले दर्ज नहीं कर रही हैं, और इसके बजाय पीड़ितों को निशाना बना रही हैं. संपादकीय में कहा गया है कि यह सब नफरत का नतीजा है.

मुशर्रफ की मौत

पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की मौत को भी फ्रंट पेज पर कवर किया गया था, तीनों अखबारों ने उनकी मौत की खबर को 6 फरवरी को अपने पहले पन्ने की लीड के रूप में छापा.

मुशर्रफ का लंबी बीमारी के बाद 5 फरवरी को दुबई के एक अस्पताल में निधन हो गया. वह 79 साल के थे.

6 फरवरी को, सहारा ने जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के बयान को जगह दी जिसमें उन्होंने मुशर्रफ को एकमात्र पाकिस्तानी जनरल बताया था जिन्होंने कश्मीर मुद्दे को ईमानदारी से हल करने की कोशिश की थी.

(उर्दूस्कोप को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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