News on social and culture | ThePrint.in
हार्दिक पांड्या । फेसबुक
Text Size:
  • 491
    Shares

हार्दिक पांड्या और केएल राहुल के ‘कॉफी विद करन’ शो पर जाने से हमारे समाज की एक बड़ी समस्या को एक नाम मिल गया है. ये समस्या लंबे समय से मौजूद थी, पर इसके लिए कोई शब्द नहीं मिल रहा था. हार्दिक और राहुल का नजरिया इसी समस्या का प्रोडक्ट है. ऐसा नहीं है कि इन दोनों लड़कों ने ही देश में पहली बार ऐसा कुछ कहा है, बल्कि ऐसा बोलने का कल्चर हर जगह है. हुआ ये है कि पहली बार इस समस्या पर एक्शन लिया गया है.

इस कल्चर का नाम है- लूज टॉक कल्चर

किसी लड़की को लेकर उसके रंग-रूप या यौनिकता को लेकर कुछ भी बोल देना और बोल के निकल जाना. इसी दौरान साथ ही चार-पांच प्रशंसक भी बना लेना, जो कि ह्यूमर की तारीफ करते नहीं थकते और बोलने वाले को पार्टी की जान भी बतायेंगे. गौरतलब है कि इन प्रशंसकों में लड़कों के अलावा लड़कियां भी शामिल हो सकती हैं. जो लोग ऑफिस में महिला मुद्दों पर लिबरल रहते हैं, वही लोग लड़कों के ग्रुप में लूज टॉक करते पाए जाते हैं.

क्या ये संभव है कि जो लोग हास्य के नाम पर लूज टॉक करते हैं, वो औरतों के प्रति इज्जत की भावना रख सकते हैं? ‘कॉफी विद करन’ में हार्दिक और राहुल ने चीयरलीडर्स को लेकर जिस तरह की बातें कीं, उससे क्या अंदाजा लगाया जा सकता है? चीयरलीडर्स के सेक्सुअल हैरेसमेंट की कई खबरें आ चुकी हैं.

हार्दिक के कितनी चीयरलीडर्स के साथ संबंध रहे हैं, वो मुद्दा नहीं है. मुद्दा है कि हार्दिक चीयरलीडर्स को किस नजर से देखते हैं. वो कहते हैं कि वो नाम नहीं पूछते, पार्टियों में लड़कियों का चलना देखते हैं. इन बातों से जाहिर ये होता है कि हार्दिक लड़कियों को एक इंसान के तौर पर नहीं देख पाते.

समझ तो हमें एआईबी की वीडियो के वक्त ही आ गया था, लेकिन शब्द नहीं थे

आज से चार-पांच साल पहले 2014 में ऑन एयर हुआ एआईबी रोस्ट उस साल का सबसे कंट्रोवर्शियल मुद्दा बन गया था. यूट्यूब पर वीडियो अपलोड करने के 24 घंटे के अंदर ही एआईबी की इस वीडियो को 7 मिलियन हिट्स मिले और ये भारत में नंबर वन ट्रेंडिंग पर आ गया. टेलरस्विफ्ट और मैरून 5 जैसे दुनिया के सबसे बड़े यूट्यूब चैनलों को पछाड़कर एआईबी सब्सक्राइबर्स इकट्ठा करने में नंबर वन बन चला.

एआईबी की विवादित वीडियो की बहस पर सोशल मीडिया पर दो धड़े बन गए थे. आधे कह रहे थे कि बोलने की आज़ादी है और बचे आधे कह रहे थे कि ये कैसी आज़ादी है. उस वक्त ‘मिसोजनिस्टिक’ और ‘सेक्सिस्ट’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल आज की तरह नहीं हो रहा था. गाली-गलौज और बकवास करने वाले लोग ही इन शब्दों का इस्तेमाल कर हिट वीडियोज बना रहे थे और बाकी देख रहे थे.

खुद एआईबी भी लड़कियों के सपोर्ट में वीडियोज बना रहा था. विडंबनात्मक रूप से 2018 में ऐसे वीडियो बनाने वाले लोगों पर यौन शोषण के आरोप लगे. एआईबी के तन्मय, गुरसिमरन खंबा जैसे बड़े नाम भी इसमें लिए गए. सोना महापात्रा ने एआईबी के कॉमेडियंस के पुराने ट्वीट्स को रीट्वीट कर उनमें फैली सड़ांध की ओर ध्यान दिलाया.

उस वक्त लोग कह रहे थे कि इस वायरल वीडियो के साथ कुछ गलत है. लेकिन सही शब्दों के साथ नहीं कह पा रहे थे. यही कह रहे थे कि गालियां हैं, पोर्नोग्राफी है. इसके जवाब में शो के सपोर्टर कह रहे थे कि इसमें गलत क्या है. आज जब ‘कॉफी विद करण’ के शो का हार्दिक पांड्या और केएल राहुल का वीडियो हॉट स्टार वालों द्वारा हटा लिया गया है तो हमें सही शब्दों का पता चल पाया, जो हम 2014-15 में भी बोल सकते थे.

उस वक्त के ट्वीट्स पर गौर करें तो पता चलता है कि वरुण ग्रोवर जैसे कॉमेडियंस को इस वायरल वीडियो के बचाव में पब्लिकली आना पड़ा. इसके अलावा सोनाक्षी सिन्हा ने लगातार ट्ववीट्स कर कहा कि हंसने के लिए किसी को जेल कैसे भेजा जा सकता है? करण जौहर ने कहा था, ‘अगर ये तुम्हारी चाय का कप नहीं है तो मत पियो.’ आलिया भट्ट ने लिखा था कि लोगों को ज़िंदगी को बहुत सीरियसली न लेने का एक ज़रूरी पाठ सीख लेना चाहिए. राम गोपाल वर्मा ने यहां तक कह दिया था कि एआईबी की वीडियो इस बात का सबूत हैं कि भारत अब पुरानी एज से बाहर आ गया है.

इन बातों में क्या है ऑफेंसिव?

कुछ लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि इस शो में क्या ऑफेंसिव था. एक कैंटीन में लंच करते हुए लड़कों की बातचीत कुछ ऐसी सुनी-

‘यार उस हार्दिक वाले केस का क्या रहा?’

‘अरे कुछ नहीं, उसने ऐसे ही बोल दिया.’

‘अब ये फेमिनिज्म वाले घुस गए हैं.’

‘ऐसे तो बोलते रहते हैं.’

इस बातचीत को यहां बताने का सबसे मुख्य कारण है कि करण जौहर, हार्दिक पांड्या और केएल राहुल ने जो लूज टॉक उस शो के दौरान की, वही लूज टॉक हमारे आस-पास के हर बॉयज ग्रुप में हो रहे हैं, लेकिन हमारा ध्यान नहीं गया.

ऑफेंसिव था हार्दिक पांड्या का पब में खड़े होकर लड़कियों को पीछे से मूव करते हुए देखना. ऑफेंसिव था उसका अपने माता-पिता के सामने किसी ट्रॉफी को जीतकर लाने की तरह कहना कि वो इसके भी साथ सो चुका है, उसके साथ भी. ठीक वैसे ही जैसे संजू फिल्म में संजय दत्त का कैरेक्टर साढ़े तीन सौ लड़कियों के साथ सो चुके होने की बात करता है.

पर ऐसा नहीं है कि ये लूज टॉक सिर्फ लड़कों तक ही सीमित है. ऊपर मैंने लिखा कि इस लूज टॉक में लड़कियां भी शामिल होती हैं. इसके अलावा इसी कल्चर से प्रभावित होकर लड़कियों के ग्रुप भी वैसी ही बातें करने लगे हैं, जैसा कि फिल्म ‘वीरे दि वेडिंग’ के साथ हुआ. फिल्म के डायलॉग प्रॉब्लमैटिक थे. महिला कैरेक्टर्स द्वारा ‘अरे तू इसकी ले ले’ कहना उतना ही भद्दा है, जितना हार्दिक पांड्या का ये कहना कि इन सारी लड़कियों के साथ सो चुका हूं.

‘वीरे दि वेडिंग’ को वीमेन फ्रेंडशिप और वीमेन सेक्सुअलिटी के नाम पर प्रोमोट किया गया था. प्रमोशन के दौरान फिल्म की अभिनेत्रियां कह रही थीं कि हमने तो गालियां और ऐड करवाई थीं, क्योंकि घर पर तो सब ऐसे ही बात करते हैं. गालियों से क्या दिक्कत है? गालियों से यही दिक्कत है कि तुरंत आप बाउंड्री क्रॉस कर जाते हैं.

हार्दिक पांड्या के मसले पर विराट कोहली ने संतुलित प्रतिक्रया दी है, पर वो खुद भूल जाते हैं कि मैदान पर उन्होंने कितनी खराब-खराब गालियां दी हैं. वही गालियां, जिसका अपने एक कुख्यात गाने में इस्तेमाल कर हिट होने का आरोप गायक हनी सिंह पर लगा था.

लूज टॉक सिर्फ इन लड़कों तक ही सीमित नहीं है. कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह ने एक बार एक महिला नेता को ‘टंच माल’ से संबोधित किया था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2013 में शशि थरूर के बारे में बोलते हुए उनकी ‘पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड’ का जिक्र कर चुके हैं. शरद यादव पर कई बार लड़कियों के बारे में लूज टॉक करने के आरोप लगे हैं.

निश्चित रूप से मीटू ने बदली है परिभाषा

2015 से 2019 तक का सफर काफी क्रांतिकारी रहा. खासकर महिलाओं के लिए. मीटू आंदोलन ने समाज को देखने का नज़रिया ही बदल डाला. आज जब किसी वेब सीरीज़ को हम देखते हैं तो उसके बोल्ड सीन पर सवाल खड़ा करते हैं कि कहीं इसके शूट के दौरान ऐक्ट्रेस के साथ कोई दुर्व्यवहार तो नहीं हुआ? हम ऐसे सीनों को स्क्रिप्ट में जोड़ने की मंशा पर भी सवाल उठा सकते हैं.

ऐसा ही करण जोहर के शो के साथ हुआ. सोशल मीडिया पर हार्दिक पंड्या और केएल राहुल की आलोचना को बीसीसीआई ने गंभीर लिया और जांच-पड़ताल होने तक दोनों खिलाडियों को सस्पेंड भी कर दिया. हालांकि, हार्दिक पंड्या अपनी कही गई बातों के लिए माफ़ी भी मांग चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई चांस नहीं दिया गया. उम्मीद है कि लूज टॉक करने पर लोग खुद ही रोक लगायेंगे और सिर्फ टीवी शोज ही नहीं, सामान्य जीवन में भी लड़कियों के प्रति लूज टॉक करने से बचेंगे.

(लेखिका एक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)


  • 491
    Shares
Share Your Views

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here