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Thursday, 30 May, 2024
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बजट 2023: बीते बजट में वित्त मंत्री ने की थी डिजिटल यूनिवर्सिटी की घोषणा, जुलाई से शुरू होगी पढ़ाई

बजट 2022 में घोषित, नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी को NEP 2020 के कुछ लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. हालांकि, यह शुरुआत में केवल डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स प्रदान करेगा.

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नई दिल्ली: दिप्रिंट को मिली जानकारी के अनुसार साल 2022 के बजट में घोषित नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी अगले शैक्षणिक सत्र से एक वास्तविक आकर लेने वाली है.

पिछले साल के अपने बजट भाषण में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राष्ट्रीय डिजिटल विश्वविद्यालय (नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी) की स्थापना की घोषणा की थी, जिसे बेहतर रोजगार क्षमता और साल केंद्र सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में परिकल्पित 2030 तक उच्च शिक्षा में 50 प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात (ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो- जीईआर) प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है.

दिप्रिंट के साथ बात करते हुए, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष एम. जगदीश कुमार ने कहा कि नेशनल डिजिटल यूनिवर्सिटी (एनडीयू) जुलाई 2023 तक अपने पाठ्यक्रमों की पेशकश करना शुरू कर देगा.

उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय प्रमाण पत्र और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की पेशकश के साथ अपना काम- काज शुरू करेगा और अंततः डिग्री कार्यक्रमों को प्रदान करने की तरफ आगे बढ़ेगा.

वित्त मंत्री सीतारमण ने पिछले साल के अपने बजट भाषण में कहा था कि ‘पूरे देश भर के छात्रों को विश्व स्तरीय गुणवत्ता वाली सार्वभौमिक शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने के लिए एक डिजिटल यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी.’

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उन्होंने कहा था कि यह पाठ्यक्रम विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा.

सीतारमण ने कहा था, ‘यह विश्वविद्यालय एक  हब-स्पोक (धुरी और इसकी तिल्लियों) मॉडल वाले नेटवर्क के रूप में बनाया जाएगा, जिसके तहत हब (धुरी) अत्याधुनिक आईसीटी विशेषज्ञता का निर्माण करेगा और देश के सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक विश्वविद्यालय और संस्थान इस नेटवर्क के स्पोक्स (तिल्लियों) के रूप में सहयोग करेंगे.’

जैसा कि शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया, उसके बाद से केंद्र सरकार और देश भर के शैक्षिक संस्थानों के बीच कई दौर की चर्चा हो चुकी है, जिसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे नामचीन संस्थान भी शामिल हैं.


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‘हब-एंड-स्पोक्स’: कैसे काम करेगा एनडीयू

यूजीसी के एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि केंद्र सरकार आखिरकार इस बारे में एक योजना लेकर आई है कि यह विश्वविद्यालय कैसे काम करेगा.

सूत्र ने कहा कि वर्तमान योजना केंद्र सरकार के मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स (एमओओसी) वाले प्लेटफॉर्म ‘स्वयं’ को एनडीयू कार्यक्रम के ‘हब’ के रूप में देखती है.

‘स्वयं’, जो स्टडी वेब्स ऑफ एक्टिव-लर्निंग फॉर यंग एस्पायरिंग माइंड्स का संक्षिप्त रूप है, को साल 2017 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा देश भर के छात्रों के लिए विभिन्न प्रकार के पाठ्य क्रमों को मुफ्त में उपलब्ध कराकर शिक्षा का लोकतंत्रीकरण करने के प्रयास के तहत लॉन्च किया गया था.

एनडीयू की वर्तमान योजना के तहत, ‘स्वयं’ इन पाठ्यक्रमों की मेजबानी करेगा और विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों – इसके स्पोक्स – से जुड़ा होगा.

इस सूत्र ने कहा कि कोई भी विश्वविद्यालय जो एनडीयू के जरिये अपने पाठ्यक्रमों की पेशकश करना चाहता है, वह इसके प्लेटफार्म पर ऐसा करेगा. छात्र अपनी डिग्री या तो इसी विश्वविद्यालय से या फिर एनडीयू से  प्राप्त करने का विकल्प चुन सकते हैं.

मिसाल के तौर पर, एक छात्र जो दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा पेश किए गए पाठ्यक्रम का विकल्प चुनता है और अपेक्षित क्रेडिट प्राप्त करता है, वह या तो डीयू या एनडीयू की डिग्री का विकल्प चुन सकता है, इस सूत्र के अनुसार, इस योजना के बारीक विवरणों, जैसे कि फीस (शुल्क) और प्रवेश प्रक्रिया के ऊपर अभी भी काम किया जा रहा है.

‘वन क्लास, वन टीवी चैनल’

एनडीयू को आगे बढ़ाने की सरकार की योजनाओं के बावजूद, बजट 2022 में शिक्षा जगत के लिए मोदी सरकार की दूसरी बड़ी घोषणा, ‘वन क्लास, वन टीवी चैनल प्रोग्राम को विस्तारित किये जाने- के बारे में स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है.

केंद्र सरकार के डिजिटल शिक्षा कार्यक्रम पीएम ई-विद्या के तहत साल 2021 में पहली बार घोषित यह कार्यक्रम- ‘वन क्लास, वन टीवी चैनल’- टेलीविजन कार्यक्रमों का उपयोग करके शिक्षा प्रदान करने की परिकल्पना करता है.

साल 2022 के बजट भाषण में, सीतारमण ने घोषणा की थी कि सरकार इस योजना के तहत शामिल डीटीएच चैनलों की संख्या 12 से बढ़ाकर 200 कर रही है.

वित्त मंत्री सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा था, ‘हम पूरक शिक्षण प्रदान करने और शिक्षा के णवितरित करने के लिए एक लचीला तंत्र बनाने की आवश्यकता को स्वीकार करते हैं. इस उद्देश्य के लिए, पीएम ईविद्या के तहत आने वाले ‘वन क्लास, वन टीवी चैनल’कार्यक्रम को 12 से 200 टीवी चैनलों तक विस्तारित किया जाएगा. यह सभी राज्यों को कक्षा 1-12 के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में पूरक शिक्षा प्रदान करने में सक्षम बनाएगा.’

हालांकि, शिक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से पता चलता है कि इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है.

(अनुवाद: राम लाल खन्ना | संपादनः ऋषभ राज)

(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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