नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भौगोलिक रूप से संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में जलवायु अनुकूल सड़क बुनियादी ढांचा विकसित करना जटिल भौगोलिक परिस्थितियों, ढलानों की अस्थिरता और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के कारण एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
गडकरी ने ‘पहाड़ी क्षेत्रों में मजबूत राष्ट्रीय राजमार्ग बुनियादी ढांचे’ विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार वैश्विक सर्वोत्तम गतिविधियों और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाकर इस दिशा में निरंतर प्रयास कर रही है।
मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में भूस्खलन की समस्या से निपटने के लिए टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड के साथ समझौता किया गया है। वहीं, सुरंग और सड़क परियोजनाओं के लिए भू-वैज्ञानिक जांच और आंकड़ों के आदान-प्रदान हेतु भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के साथ भी सहयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिला यांत्रिकी संस्थान (एनआईआरएम) के साथ मिलकर परियोजनाओं की तकनीकी जांच, डिजाइन की पुष्टि, सुरंगों की सुरक्षा जांच और निगरानी जैसे काम किए जा रहे हैं।
गडकरी ने बताया कि अब पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण शुरू करने से पहले ढलानों को मजबूत करना जरूरी किया गया है, ताकि सड़कें लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ रह सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की को पहाड़ी ढलानों की अस्थिरता पर दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए सहयोग दिया जा रहा है, जिसमें वास्तविक समय पर निगरानी प्रणाली का उपयोग होगा।
इसके अलावा, उत्तराखंड में चारधाम मार्ग के करीब 100 किलोमीटर हिस्से में भूस्खलन की निगरानी और समय रहते चेतावनी देने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित प्रणाली लगाने का भी समझौता किया गया है।
मंत्री ने कहा कि अब सड़क परियोजनाओं की योजना बनाते समय लिडार (लाइट डिटेक्शन एंड रेजिंग) और यूएवी जैसी तकनीक का उपयोग कर विस्तृत सर्वे किया जा रहा है, ताकि भूस्खलन की संभावनाओं और पुराने आंकड़ों को ध्यान में रखकर बेहतर और सुरक्षित सड़कें बनाई जा सकें।
भाषा योगेश रमण
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