नई दिल्ली: जुलाई 1998 में, मुंबई की जांच एजेंसियों ने पहली बार सलीम डोला का नाम एक खुफिया सूचना में सुना.
यह जानकारी बिल्कुल साफ थी. डोला और उसके साथी भारत से मैंड्रेक्स टैबलेट की बड़ी खेप बाहर भेजने की तैयारी कर रहे थे. तस्करों ने 29 जुलाई को उस समय के सहारा एयरपोर्ट के डिपार्चर गेट का इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी.
इस योजना में दो सूटकेस, जिनमें मैंड्रेक्स भरा था, एक बाहर जाने वाले विमान में चढ़ाने की कोशिश थी. यह काम एयरपोर्ट सुरक्षा और कस्टम से बचकर, कथित तौर पर एयर इंडिया के एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी की मदद से किया जाना था.
सूचना मिलने पर अधिकारियों ने एयरपोर्ट के पास एक टीम तैनात कर दी और इंतिजार करने लगे. 29 जुलाई की सुबह तड़के एक सफेद फिएट कार आई. उसमें दो लोग थे, जिनमें से एक डोला था. वह कार से उतरा, डिक्की खोली और दो सूटकेस निकाले. हर सूटकेस पर एक तरफ ‘M’ और दूसरी तरफ ‘स्वस्तिक’ बना था. इनमें मैंड्रेक्स भरा हुआ था. दोनों का कुल वजन 40 किलो था.
डोला को गिरफ्तार कर लिया गया और ड्रग्स जब्त कर लिए गए. लेकिन मामला फिर भी टिका नहीं. कोर्ट में सबूतों की कड़ी मजबूत नहीं रह पाई.
डोला छूट गया, लेकिन यहीं से उसके ड्रग्स साम्राज्य की शुरुआत हुई जो तेजी से बढ़ा. एक छोटे स्तर के पेडलर से वह एमडीएमए बनाने तक पहुंच गया, और बाद में ऐसे कारखानों का प्रमुख बन गया जो यह ड्रग बनाते थे, और पश्चिम और मध्य भारत में इसका बाजार अपने कब्जे में कर लिया.
वह पहले प्रोडक्शन हेड बना और बाद में सप्लाई नेटवर्क को नियंत्रित करने लगा, ऐसा कई एजेंसियों के सूत्रों का कहना है. दो बार गिरफ्तार होने के बावजूद, वह हर बार जमानत लेने या सजा से बचने में सफल रहा क्योंकि उसके खिलाफ केस टिक नहीं पाए.
यह सिलसिला दो दशकों से ज्यादा चला, जब तक कि बुधवार को उसे तुर्किये से भारत वापस नहीं लाया गया. कई ड्रग मामलों में वांछित डोला से अब पूछताछ होने की उम्मीद है, जिससे जांच एजेंसियों को उसके पूरे नेटवर्क का पता चल सकता है.
पैटर्न
सालों में डोला का नाम बार-बार अलग-अलग ड्रग मामलों में सामने आता रहा. उससे जुड़े ड्रग्स भी समय के साथ ज्यादा बड़े होते गए. पहले मारिजुआना और मेथ, और फिर फेंटानिल तक.
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम से उसके करीबी संबंधों ने उसके काम को बढ़ावा दिया. इससे उसका नेटवर्क फैल गया.
एक सूत्र ने बताया, “वह महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर एमडीएमए बनाने वाले कारखानों का संचालन कर रहा था. उसका मजबूत नेटवर्क था, जिससे वह अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया था. कच्चा माल लाना, फैक्ट्री लगाना और तेजी से सप्लाई करना, सब उसी और उसके नेटवर्क के नियंत्रण में था.” मुंबई क्राइम ब्रांच में उसके खिलाफ पांच से ज्यादा मामले दर्ज हैं.
सूत्र ने कहा, “उसके पूरे नेटवर्क को एक-एक करके ट्रैक किया गया और कई गिरफ्तारियां हुईं. पिछले साल उसके बेटे ताहेर और भतीजे मुस्तफा मोहम्मद कुब्बावाला को संयुक्त अरब अमीरात से वापस लाया गया, जिससे उसका नेटवर्क कमजोर हुआ.”
सूत्र ने यह भी कहा कि दो बार गिरफ्तारी के बावजूद बच निकलना उसे एक बड़ा अपराधी बनाता है.
2018 में उसे फिर गिरफ्तार किया गया. अधिकारियों को उसके पास 100 किलो एक संदिग्ध पदार्थ मिला, जिसे फेंटानिल बताया गया. जांचकर्ताओं के अनुसार, इसे मेक्सिको भेजने की योजना थी ताकि वहां फेंटानिल बनाया जा सके.
बाद में फोरेंसिक जांच में यह पदार्थ 1-फेनेथिल-4-पाइपेरिडोन (NPP) निकला, जो एक नियंत्रित केमिकल है, खुद ड्रग नहीं है. इसी आधार पर डोला को जमानत मिल गई.
इसके बाद मुंबई पुलिस ने उसे आखिरी बार देखा. जमानत की शर्त के अनुसार उसे नियमित रूप से पुलिस स्टेशन में हाजिरी देनी थी, लेकिन उसने इसका फायदा उठाकर पश्चिम एशिया भाग जाने का मौका बना लिया.
अब लगभग एक दशक बाद, तुर्किये से उसे वापस भारत लाया गया है. नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने, केंद्रीय जांच ब्यूरो की मदद से, उसे वापस लाने में सफलता पाई.
गृह मंत्रालय ने बयान में कहा, “एनसीबी ने अंतरराष्ट्रीय और भारतीय खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर ‘ऑपरेशन ग्लोबल-हंट’ के तहत वांछित ड्रग तस्कर मोहम्मद सलीम डोला को तुर्किये से वापस लाया है.”
2024 में उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था. वह कई मामलों में वांछित था, जिनमें एनसीबी, मुंबई पुलिस और गुजरात एटीएस के केस शामिल हैं.
गृह मंत्रालय के बयान में कहा गया, “सालों में डोला ने मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में फैला एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क बना लिया था. उसके दो दशकों के आपराधिक रिकॉर्ड में महाराष्ट्र और गुजरात में हेरोइन, चरस, मेफेड्रोन, मैंड्रेक्स और मेथामफेटामिन की बड़ी बरामदगी वाले मामलों में सीधी भूमिका शामिल है.”
2025 की शुरुआत में उसके बेटे ताहिर डोला को, कई साथियों के साथ, मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उन्हें संयुक्त अरब अमीरात से वापस लाया गया था.
पूरी कार्रवाई तुर्किये, इंटरपोल और भारतीय एजेंसियों के बीच अच्छे तालमेल और सहयोग को दिखाती है.
‘भारत और विदेश में मजबूत नेटवर्क’
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, सलीम डोला की भूमिका हमेशा एक बड़े सप्लायर की रही. वह भारत में नीचे के स्तर के ड्रग नेटवर्क को सप्लाई करता था.
जांचकर्ताओं के अनुसार, वह पौधों से बनने वाले और सिंथेटिक दोनों तरह के ड्रग्स में शामिल था, लेकिन उसके काम का बड़ा हिस्सा मेफेड्रोन पर केंद्रित था. इसे आम भाषा में “म्याऊ म्याऊ” या पार्टी ड्रग कहा जाता है.
यह एक सेंट्रल नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करने वाला ड्रग है, जो ज्यादा सक्रियता बढ़ाता है. इसे व्हाइट मैजिक और एम-कैट भी कहा जाता है. 2015 में इसे एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रतिबंधित कर दिया गया था.
एक सूत्र ने कहा, “वह हर तरह के ड्रग्स की तस्करी में शामिल था. भारत और विदेश में उसका मजबूत नेटवर्क था, जिसके जरिए वह ड्रग्स भेजता था.” उन्होंने यह भी कहा कि उससे पूछताछ से उसके पूरे नेटवर्क की जानकारी मिल सकती है. “मिडिल ईस्ट भागने के बाद वह कई साल वहां से काम करता रहा, लेकिन पिछले दो साल से तुर्किये में छिपा हुआ था.”
मुंबई और गुजरात में उसके नेटवर्क के बारे में दूसरे सूत्र ने बताया कि वह खाड़ी देशों के लोगों के संपर्क में बना रहता था. उसके निर्देश पर बड़ी मात्रा में ड्रग्स बंदरगाहों के जरिए भेजे जाते थे, जिन्हें अक्सर कूरियर पार्सल में छिपाकर भेजा जाता था.
‘चरस किंग’
मुंबई पुलिस के सूत्रों के अनुसार, मेफेड्रोन बनाने और तस्करी में आने से पहले सलीम डोला कई सालों तक चरस के कारोबार में था.
यह पहली बार जुलाई 2013 में पुलिस के ध्यान में आया, जब मुंबई की एंटी-नारकोटिक्स सेल ने उसे और उसके दो साथियों को एक खेप की डिलीवरी के तुरंत बाद गिरफ्तार किया.
पुलिस का दावा था कि उसके पास 18 डिब्बे चरस के मिले थे.
एक सूत्र ने कहा, “वह मुंबई में इस ड्रग का एक बड़ा सप्लायर बन गया था और काफी हद तक उसने इस पर कब्जा कर लिया था.”
हालांकि, मुंबई पुलिस उसके खिलाफ पहला मामला साबित नहीं कर पाई और मई 2016 में शहर की एक अदालत ने उसे बरी कर दिया.
सूत्र ने कहा, “कई ड्रग मामलों में पकड़े गए पेडलर और तस्करों से पूछताछ के दौरान डोला का नाम बार-बार सामने आता रहा, चाहे वह चरस हो, मेथ हो या फेंटानिल.”
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की एक जांच में अधिकारियों ने 20 किलो मेफेड्रोन बरामद किया. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में डोला का नाम सामने आया.
इसी समय के आसपास, मुंबई पुलिस ने शहर में मेफेड्रोन के दो और मामलों का खुलासा किया. जांच में डोला और उसके बेटे ताहिर डोला का नाम शामिल किया गया. ताहिर, जो दोनों मामलों में वांछित था, को पिछले साल जून में वापस लाया गया.
‘फिसलना’
सुरक्षा एजेंसियों के एक सूत्र के अनुसार, कई बार पुलिस के हाथ लगने के बावजूद डोला बार-बार बच निकलता रहा.
2018 के मामले का जिक्र करते हुए सूत्र ने कहा कि अगर उसे फेंटानिल केस में जमानत नहीं मिली होती, तो वह शायद कभी भाग नहीं पाता.
सूत्र ने कहा, “जमानत इस शर्त पर दी गई थी कि वह हर सोमवार सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक तीन घंटे के लिए जांच अधिकारी के सामने पेश होगा, जब तक चार्जशीट दाखिल नहीं हो जाती, और उसके बाद हर महीने के आखिरी सोमवार को भी.”
सूत्र ने कहा, “उसने पांच महीने तक अदालत की शर्तें मानीं, लेकिन बाद में उसने एक अर्जी दी कि हर हफ्ते पुलिस के सामने पेश होने की शर्त हटाई जाए, क्योंकि उसे आर्थिक दिक्कत है और सोमवार उसके काम के दिन होते हैं.”
सूत्र ने कहा, “अजीब बात है कि अदालत ने शर्त बदल दी और उसे हर महीने सिर्फ आखिरी रविवार को पुलिस के सामने पेश होने को कहा, जब तक मामला खत्म नहीं हो जाता. उसके बाद वह फिर कभी नहीं दिखा.”
‘बढ़ता हुआ ड्रग साम्राज्य’
डोला के भारत से भाग जाने के बाद भी, उसने कई राज्यों में फैले अपने बड़े नेटवर्क के जरिए काम जारी रखा.
दूसरे सूत्र ने कहा, “भारत से बाहर होने के बावजूद उसके ड्रग कारोबार पर ज्यादा असर नहीं पड़ा. बल्कि यह महाराष्ट्र से आगे बढ़कर गुजरात तक फैल गया.”
नवंबर 2022 में, गुजरात एटीएस की टीम ने वडोदरा के सिंधरोत में एक फैक्ट्री पर छापा मारा और बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित ड्रग मेफेड्रोन और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल जब्त किया.
जांच के दौरान एटीएस ने गुजरात के पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें मौलिक पाठक भी शामिल था. बाद में जांच में सामने आया कि इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड डोला था. वह विदेश से ही इस फैक्ट्री और पूरे नेटवर्क को चला रहा था.
सूत्र ने कहा, “पाठक की मुलाकात डोला से मुंबई की जेल में हुई थी, जब दोनों अलग-अलग एनडीपीएस मामलों में गिरफ्तार हुए थे.”
सूत्र ने कहा, “जेल में रहते हुए डोला ने उसे मेफेड्रोन बनाने के तरीके जल्दी-जल्दी सिखाए और यह भरोसा दिलाया कि वह सस्ता कच्चा माल उपलब्ध करा सकता है.”
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