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Monday, 27 April, 2026
होमहेल्थसर्वाइकल कैंसर घट रहा है, लेकिन ब्रेस्ट और ओरल कैंसर बढ़ रहे हैं—क्या कहती है ICMR की स्टडी

सर्वाइकल कैंसर घट रहा है, लेकिन ब्रेस्ट और ओरल कैंसर बढ़ रहे हैं—क्या कहती है ICMR की स्टडी

ICMR की स्टडी में 1998 से 2017 के बीच भारत में कैंसर के अलग-अलग ट्रेंड्स पर रोशनी डाली गई है, जो लाइफस्टाइल और हेल्थ से जुड़े इंटरवेंशन में बदलाव को दिखाते हैं.

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नई दिल्ली: भारत में 1998 से 2017 के बीच स्तन कैंसर और पुरुषों में ओरल कैंसर के मामले लगातार बढ़े, जबकि ज्यादातर समृद्ध G20 देशों में रुझान यह दिखाते हैं कि मामले या तो स्थिर हो रहे हैं या घट रहे हैं.

इसी दौरान भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले इसी अवधि में तेजी से घटे. यह जानकारी भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों के एक नए विश्लेषण में सामने आई है, जो इस महीने जर्नल ऑफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित हुआ है.

यह शोध ICMR-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ नॉन-कम्युनिकेबल डिज़ीज़ एपिडेमियोलॉजी (ICMR-NINE), बेंगलुरु के पांच वैज्ञानिकों ने किया है. यह संस्थान पहले नेशनल सेंटर फ़ॉर डिज़ीज़ इन्फ़ॉर्मेटिक्स एंड रिसर्च (NCDIR) के नाम से जाना जाता था. इस अध्ययन में 1996 से 2020 के बीच G20 देशों में स्तन, सर्वाइकल और ओरल कैंसर की घटनाओं और मृत्यु दर के रुझानों का विश्लेषण किया गया.

इस विश्लेषण में एज-पीरियड-कोहोर्ट एनालिसिस (age-period-cohort analysis) नाम की विधि का इस्तेमाल किया गया, जो उम्र बढ़ने के प्रभाव को बड़े ऐतिहासिक रुझानों और पीढ़ीगत बदलाव से अलग करके देखती है. इससे यह समझने में मदद मिलती है कि क्या कैंसर का जोखिम वास्तव में बढ़ रहा है या सिर्फ इसलिए बढ़ रहा है क्योंकि आबादी बूढ़ी हो रही है.

भारत के लिए क्या दिखाते हैं आंकड़े 

नतीजे भारत के लिए स्पष्ट हैं. स्तन कैंसर की घटनाएं प्रति वर्ष 1.83 प्रतिशत की दर से बढ़ीं. पुरुषों में ओरल कैंसर की घटनाएं सालाना 1.20 प्रतिशत बढ़ीं. लेकिन सर्वाइकल कैंसर इस रुझान से अलग रहा, जहां भारत में प्रति वर्ष 4.19 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज हुई, जो अध्ययन किए गए सभी देशों में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है.

Infographic: Deepakshi Sharma | ThePrint
इन्फोग्राफिक: दीपकशी शर्मा | दिप्रिंट

उच्च आय वाले देशों में रुझान अलग-अलग रहे. संयुक्त राज्य अमेरिका में स्तन कैंसर की घटनाओं में सालाना 0.44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई. ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और फ्रांस में हल्की बढ़ोतरी देखी गई. फ्रांस में पुरुषों के ओरल कैंसर की घटनाएं प्रति वर्ष 2.75 प्रतिशत घटीं, जो सबसे तेज गिरावटों में से एक है.

चीन में इस अध्ययन में सबसे तेज वृद्धि देखी गई. चीन में स्तन कैंसर की घटनाएं प्रति वर्ष 2.03 प्रतिशत बढ़ीं. सर्वाइकल कैंसर की घटनाएं 6.11 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ीं. पुरुषों में ओरल कैंसर भी चीन में 1.10 प्रतिशत सालाना बढ़ा.

भारत G20 के रुझान से अलग

इस अध्ययन ने देशों को उनके सामाजिक-जनसांख्यिकीय सूचकांक (SDI) के आधार पर बांटा, जो आय, शिक्षा और प्रजनन दर का संयुक्त माप है और विकास का एक संकेतक है. भारत इस में निम्न-मध्यम SDI समूह में आता है.

अधिकतर उच्च SDI देशों में मृत्यु दर की स्थिति बेहतर रही है. यूके में स्तन कैंसर से मृत्यु दर सालाना 2.52 प्रतिशत घटी. कनाडा में 2.47 प्रतिशत और ऑस्ट्रेलिया में 2.25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई. सर्वाइकल कैंसर से मृत्यु दर सबसे ज्यादा दक्षिण कोरिया में 3.06 प्रतिशत प्रति वर्ष घटी.

फ्रांस में पुरुषों के ओरल कैंसर से मृत्यु दर 4.16 प्रतिशत सालाना घटी. लेकिन सभी उच्च आय देशों में ऐसा नहीं हुआ. जापान और दक्षिण कोरिया में स्तन कैंसर से मृत्यु दर बढ़ी. यूके में पुरुषों और महिलाओं दोनों में ओरल कैंसर से मृत्यु दर भी बढ़ी.

चूंकि भारत के लिए मृत्यु दर का डेटा इस अध्ययन में उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह कहना संभव नहीं है कि बढ़ती घटनाएं मौतों में कैसे बदल रही हैं.

कोहोर्ट विश्लेषण यह भी दिखाता है कि भारत में हर पीढ़ी में कैंसर का जोखिम लगातार ऊंचा बना हुआ है, जबकि उच्च आय वाले देशों में हर नई पीढ़ी में जोखिम घटता है. लेखकों ने बताया कि भारत, चीन और तुर्की में जोखिम लगातार ऊंचा बना हुआ है, जो चबाने वाले तंबाकू, पान मसाला और शराब के लगातार उपयोग को दर्शाता है.

Infographic: Deepakshi Sharma | ThePrint
इन्फोग्राफिक: दीपकशी शर्मा | दिप्रिंट

ओरल कैंसर: तंबाकू की समस्या जो खत्म नहीं हो रही

ओरल कैंसर भारत के लिए सबसे अलग तरह का कैंसर है, जो देश की खास जोखिम परिस्थितियों से जुड़ा है. अध्ययन में तंबाकू का उपयोग, शराब सेवन, एचपीवी संक्रमण और सुपारी चबाने को मुख्य कारण बताया गया है और कहा गया है कि ओरल कैंसर भारत में एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है. क्योंकि अधिकतर मामले देर से पहचान में आते हैं, इसलिए शुरुआती पहचान बहुत जरूरी है.

भारत में उम्र का पैटर्न भी महत्वपूर्ण है. पुरुषों और महिलाओं में ओरल कैंसर की दर लगभग 40 साल की उम्र तक समान रहती है, लेकिन इसके बाद पुरुषों में यह तेजी से बढ़ती है.

अध्ययन की सह-लेखिका और ICMR-NINE की साइंटिस्ट-एफ डॉ. अनीता नाथ ने कहा, “ओरल कैंसर के लिए, इसका बोझ लगातार जोखिम कारकों जैसे तंबाकू उपयोग (विशेषकर बिना धुएं वाला तंबाकू) और पान-गुटखा चबाने से जुड़ा हुआ है.”

Infographic: Deepakshi Sharma | ThePrint
इन्फोग्राफिक: दीपकशी शर्मा | दिप्रिंट

स्तन कैंसर और जीवनशैली में बदलाव

भारत में स्तन कैंसर के मामलों में वृद्धि अब कई विकासशील देशों में दिखने वाले पैटर्न से मेल खाती है. इस अध्ययन में इसे “पश्चिमीकरण” वाली जीवनशैली को अपनाने से जोड़ा गया है. इसमें धूम्रपान, शराब का सेवन और मोटापा शामिल हैं, साथ ही हार्मोन और प्रजनन से जुड़े बदलाव जैसे मासिक धर्म का जल्दी शुरू होना, देर से बच्चे होना और स्तनपान की अवधि का कम होना भी शामिल है.

डॉ. नाथ ने समझाया, “भारत में स्तन और ओरल कैंसर दोनों की बढ़ती घटनाएं जोखिम कारकों में बदलाव और जांच में सुधार के संयुक्त परिणाम के रूप में समझी जा सकती हैं. स्तन कैंसर के लिए यह वृद्धि व्यापक सामाजिक-आर्थिक और जीवनशैली बदलावों से जुड़ी है.”

G20 देशों में उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कोरिया में स्तन कैंसर की सबसे तेज वृद्धि 5.07 प्रतिशत प्रति वर्ष रही. इसके बाद तुर्की में 2.42 प्रतिशत, चीन में 2.03 प्रतिशत और भारत में 1.83 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई.

सर्वाइकल कैंसर: एक दुर्लभ सफलता और उससे मिलने वाली सीख

भारत के कैंसर आंकड़ों में सबसे बड़ा अंतर सर्वाइकल कैंसर में दिखता है. जहां स्तन और ओरल कैंसर बढ़ रहे हैं, वहीं सर्वाइकल कैंसर घट रहा है. अध्ययन के लेखक कहते हैं कि यह अंतर नीति निर्माताओं के लिए महत्वपूर्ण सीख देता है.

डॉ. नाथ ने इस गिरावट का कारण कई कारकों को बताया. उन्होंने कहा, “भारत में सर्वाइकल कैंसर की घटनाएं दशकों से लगातार घट रही हैं. यह प्रगति बढ़ती जागरूकता, स्वच्छता में सुधार और प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार के संयुक्त प्रभाव से हुई है.”

केंद्र सरकार ने हाल ही में देशव्यापी HPV टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके तहत लगभग 1.15 करोड़ 14 साल की लड़कियों को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मुफ्त टीका दिया जा रहा है. यह एक डोज वाला कार्यक्रम है जिसमें गार्डासिल-4 का उपयोग किया जाता है, जो HPV टाइप 16 और 18 से सुरक्षा देता है, जो अधिकतर सर्वाइकल कैंसर के लिए जिम्मेदार हैं.

लेखकों ने सर्वाइकल कैंसर के लिए HPV टीकाकरण को तेज करने, संगठित स्क्रीनिंग कार्यक्रमों और शहरी-ग्रामीण तथा सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को कम करने की सिफारिश की है. ओरल कैंसर के लिए उन्होंने तंबाकू और शराब पर सख्त नियंत्रण नीतियां और उच्च जोखिम वाले समूहों में लक्षित स्क्रीनिंग की सिफारिश की है. स्तन कैंसर के लिए उन्होंने सस्ती स्क्रीनिंग बढ़ाने की बात कही है, शहरों में मैमोग्राफी और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में अल्ट्रासाउंड.

लेखकों ने लिखा, “अपनी प्रभावशाली स्थिति के कारण G20 देश असमानताओं को कम करने और वैश्विक कैंसर रोकथाम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.”

डॉ. नाथ ने कहा, “तत्काल प्रतिक्रिया संतुलित और व्यापक होनी चाहिए. कैंसर निगरानी प्रणाली को मजबूत करना चाहिए जिसमें मृत्यु दर और स्टेज से जुड़ा मजबूत डेटा हो. रोकथाम के प्रयासों को बढ़ाना चाहिए जैसे तंबाकू और शराब नियंत्रण, जीवनशैली हस्तक्षेप, और शुरुआती पहचान और इलाज सेवाओं का विस्तार.”

इस अध्ययन का डेटा ग्लोबल कैंसर ऑब्जर्वेटरी से लिया गया है. घटना के रुझानों का विश्लेषण 11 देशों में किया गया, जिनमें अर्जेंटीना, चीन, जर्मनी, भारत, इटली, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, तुर्की और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं. यह विश्लेषण 1998 से 2017 तक किया गया, जबकि दक्षिण कोरिया का डेटा 2003 से उपलब्ध था.

मृत्यु दर के रुझानों का विश्लेषण 12 देशों में किया गया, जिनमें अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, मेक्सिको, दक्षिण कोरिया, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं, जो 1996 से 2020 तक का समय कवर करता है. भारत इस डेटा में मृत्यु दर के लिए शामिल नहीं था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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