नई दिल्ली: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के एक अधिकारी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. उस पर आरोप है कि उसने कोयंबटूर स्थित एक फर्म से 250 ग्राम सोने के सिक्के रिश्वत के रूप में मांगे, जो सोने के आभूषणों के थोक व्यापार और निर्माण से जुड़ी है.
इस अधिकारी की पहचान विकास पाल के रूप में हुई है. वह 2014 बैच के केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के अधिकारी हैं और वर्तमान में मेरठ जोन के सेंट्रल GST विभाग में डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात हैं.
पाल के साथ CBI ने उसके कथित प्रतिनिधि मोहम्मद सबाहुद्दीन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. उस पर आरोप है कि उसने फर्म के प्रमोटर को तीन बार फोन कर पाल की 250 ग्राम सोने के सिक्कों की मांग पूरी करने के लिए कहा.
CBI की FIR के अनुसार, यह मामला तब सामने आया जब डायरेक्टरेट जनरल ऑफ विजिलेंस ने कोयंबटूर की कंपनी आलाया ज्वेल इंडस्ट्री द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोपों को समर्थन देने वाले पर्याप्त सबूत पाए.
यह मामला उस समय का है जब विकास पाल चेन्नई के मद्रास एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन में डिप्टी कमिश्नर (कस्टम्स) के पद पर थे, जहां से आलाया ज्वेल इंडस्ट्री आभूषण बनाने के लिए कच्चा सोना आयात करती थी.
अपने पद का उपयोग करते हुए, पाल ने कथित तौर पर कंपनी के संस्थापक से 250 ग्राम सोने के सिक्कों की मांग की, बदले में कंपनी के बैंक खातों को अनफ्रीज करने के लिए, जिन्हें पहले कस्टम जांच के तहत फ्रीज किया गया था.
रिश्वत की मांग के बाद, फर्म के प्रमोटर ने मार्च 2021 में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ विजिलेंस में शिकायत दर्ज कराई.
FIR में कहा गया है, “श्री एस. श्रीगंथ, निदेशक, M/s आलय ज्वेल इंडस्ट्री प्राइवेट लिमिटेड, MEPZ-SEZ तांबरम, चेन्नई ने शिकायत में आरोप लगाया है कि श्री विकास पाल, तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर, कस्टम्स, MEPZ-SEZ, चेन्नई (वर्तमान में डिप्टी कमिश्नर, सेंट्रल GST नोएडा (अपील्स), नोएडा, मेरठ सेंट्रल GST जोन के तहत) ने अवैध रूप से 250 ग्राम सोने के सिक्कों की मांग की, ताकि उनकी कंपनी के बैंक खाते डी-फ्रीज किए जा सकें.”
FIR में आगे कहा गया है, “डायरेक्टरेट जनरल ऑफ विजिलेंस ने जांच के बाद पाया कि आरोपों को समर्थन देने वाले पर्याप्त सबूत मौजूद हैं.” इसके बाद विभाग ने यह शिकायत पिछले अक्टूबर में आगे की कार्रवाई के लिए CBI को भेज दी.
इसके बाद सक्षम प्राधिकारी की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत पूर्व अनुमति भी भेजी गई, जिसके बाद FIR दर्ज की गई.
CBI की FIR के अनुसार, सबाहुद्दीन, जिसे पाल का माध्यम बताया गया है, ने कोयंबटूर फर्म से सोने के सिक्के वसूलने में भूमिका निभाई. वह पहले GST का अपराधी था और उसने पाल को रिश्वत के रूप में फ्लाइट टिकट, होटल और कैब बुकिंग भी दी थी.
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