नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी)ने दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान दो परिवारों के बीच हुई झड़प के दौरान एक युवक की हत्या के मामले में हिरासत में लिये गए दो नाबालिगों को जमानत देने से इनकार कर दिया है।
दो पड़ोसी समुदायों के बीच 4 मार्च को होली के दिन हुई झड़प में घायल होने के बाद 26 वर्षीय तरुण की मृत्यु हो गई थी। यह झड़प तब शुरू हुई, जब एक समुदाय की लड़की द्वारा फेंका गया पानी का गुब्बारा गलती से दूसरे समुदाय की एक महिला को लग गया।
पीठासीन अधिकारी चित्रांशी अरोड़ा ने दो नाबालिग आरोपियों द्वारा दायर जमानत आवेदन पर सुनवाई करते हुए कहा कि उनकी रिहाई से ‘‘सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है और न्याय प्रदान करने की व्यवस्था में जनता का विश्वास कम हो सकता है’’।
जेजेबी ने कहा कि दोनों नाबालिग आरोपियों को छोड़ने से उन्हें शारीरिक और मनोवैज्ञानिक खतरे का भी सामना करना पड़ सकता है।
बोर्ड ने 9 अप्रैल को जारी अपने आदेश में कहा, ‘‘घटना में नामजद और कथित रूप से शामिल आरोपी किशोरों की समय से पहले रिहाई से मौजूदा स्थिति और बिगड़ सकती है, सार्वजनिक शांति भंग हो सकती है तथा न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास कमज़ोर हो सकता है।’’
जेजेबी ने जांच अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जानकारी का संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया कि इस घटना ने क्षेत्र के समुदायों के बीच तनाव पैदा कर दिया और सार्वजनिक व्यवस्था तथा सामाजिक सद्भाव पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है।
बोर्ड ने कहा कि नाबालिगों की निरंतर सुरक्षात्मक हिरासत दंडात्मक नहीं, बल्कि उनकी देखभाल, संरक्षण, मनोवैज्ञानिक स्थिरता तथा पुनर्वास सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है, जो किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के तहत न्याय की अवधारणा के अभिन्न अंग हैं।
फैसले में कहा गया कि नाबालिगों की शिक्षा में व्यवधान की चिंताओं को बोर्ड स्वीकार करता है, लेकिन जब विश्वसनीय सामग्री से ज्ञात हो कि रिहाई हानिकारक हो सकती है, तो ऐसे विचार सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास के मुद्दों पर हावी नहीं हो सकते।
भाषा
धीरज दिलीप
दिलीप
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