नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) पर्यावरण मंत्रालय ने कर्नाटक के काली बाघ अभयारण्य के आसपास 663.32 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील (ईएसजेड) घोषित करने के लिए एक मसौदा अधिसूचना जारी की है।
ईएसजेड वैसे क्षेत्र होते हैं, जिन्हें सरकार द्वारा संरक्षित क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास अधिसूचित किया जाता है।
अधिसूचना के अनुसार, यह अभयारण्य काली नदी और उसकी सहायक नदियों -नागझरी और कनेरी- के प्रमुख जलग्रहण क्षेत्र को समेटे हुए है। इस क्षेत्र में बाघ, तेंदुए, जंगली कुत्ते, हाथी, भारतीय गौर, पैंगोलिन, ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल और ‘कैसलरॉक नाइट फ्रॉग’ जैसे कई विलुप्तप्राय और संकटग्रस्त प्राणी रहते हैं।
यह अधिसूचना दो अप्रैल को जारी की गयी, लेकिन मंगलवार को प्रकाशित की गयी।
यह बाघ अभयारण्य डांडेली वन्यजीव अभयारण्य और अंशी राष्ट्रीय उद्यान से मिलकर बना है, जो पश्चिमी घाट के जैविक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में स्थित हैं।
अधिसूचना के मुताबिक, यह ईएसजेड अभयारण्य की सीमा से लेकर 10 किलोमीटर तक फैला होगा। हालांकि, उत्तर, पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा में ईएसजेड निर्धारित नहीं किया गया है, क्योंकि वहां पास में भीमगढ़ वन्यजीव अभयारण्य मौजूद है।
पर्यावरण मंत्रालय ने इस मसौदे पर हितधारकों से 60 दिन में सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने का अनुरोध किया है।
भाषा जोहेब सुरेश
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