नई दिल्ली: मंगलवार को ईरान के खार्ग द्वीप पर कई धमाकों की खबर आई. यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात का अहम केंद्र है. यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने तेहरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को दोबारा खोलने के लिए दी गई समयसीमा नज़दीक आने की बात कही है.
ईरान की अर्ध-सरकारी मीडिया मेहर न्यूज़ एजेंसी ने खार्ग द्वीप पर कई हमलों की जानकारी दी. यहां से ईरान के लगभग 90 प्रतिशत तेल का निर्यात होता है. अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा कि अमेरिका ने “खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों” को निशाना बनाया.
हमलों के कुछ ही देर बाद ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा, “आज रात एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा. मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन शायद ऐसा होगा. हालांकि, अब जब हमारे पास पूरी तरह और संपूर्ण शासन परिवर्तन है, जहां अलग, ज्यादा समझदार और कम कट्टर सोच वाले लोग आगे आएंगे, तो शायद कुछ क्रांतिकारी रूप से अच्छा हो सकता है, कौन जानता है?

“हमें आज रात पता चल जाएगा, यह दुनिया के लंबे और जटिल इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण पलों में से एक होगा. 47 साल की जबरन वसूली, भ्रष्टाचार और मौत आखिरकार खत्म होगी. ईरान के महान लोगों को भगवान आशीर्वाद दें!”
हाल ही में अमेरिका द्वारा वहां सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने के बावजूद खार्ग द्वीप पर तेल से जुड़ा काम ज्यादातर बिना रुकावट जारी रहा.
द्वीप के गहरे पानी के कारण बड़े तेल टैंकर वहां रुक सकते हैं, जिससे अंदरूनी तेल क्षेत्रों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ा जाता है. यहां पाइपलाइन और स्टोरेज की सुविधा का बड़ा नेटवर्क भी मौजूद है.

13-14 मार्च को अमेरिका ने खार्ग पर हवाई और मिसाइल हमला किया था, जिसका मकसद वहां मौजूद सैन्य ठिकानों को खत्म करना था. ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार उस समय द्वीप की तेल सुविधाओं को निशाना नहीं बनाया गया था.
इस द्वीप पर बलपूर्वक कब्ज़ा करना काफी जटिल और महंगा हो सकता है. द्वीप पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए जमीन पर हज़ारों सैनिकों की ज़रूरत होगी. इसके लिए वायु, थल और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल और ईरान की मिसाइलों और ड्रोन से लगातार बचाव करना होगा.

अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोमवार को तेहरान को चेतावनी दी थी कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को दोबारा नहीं खोला गया तो अमेरिका एक ही रात में ईरान को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.
उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति के इस अहम रास्ते को खोलने के लिए बुधवार सुबह 5:30 बजे (IST) तक का समय दिया था. इससे पहले भी ट्रंप ईरान के पुल, बिजली संयंत्र और पानी साफ करने वाले प्लांट को नष्ट करने की धमकी दे चुके हैं.
मंगलवार को ईरानी मीडिया ने बताया कि मध्य ईरान के काशान शहर में याह्या अबाद रेलवे पुल पर हुए हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और दो अन्य घायल हो गए. यह हमला उस चेतावनी के कुछ घंटे बाद हुआ जिसमें इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने ईरानी लोगों से ट्रेन से यात्रा न करने और रेलवे स्टेशनों से दूर रहने को कहा था.
दूसरी ओर, ईरान की सेना ने ट्रंप की चेतावनी को “भ्रमित करने वाली” बताते हुए इसे “असभ्य, घमंडी बयानबाजी और बेबुनियाद धमकी” कहा.
व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा था कि अगर मंगलवार रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) तक होरमुज जलडमरूमध्य नहीं खोला गया तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा और परिवहन ढांचे को निशाना बना सकता है.
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जवाब देते हुए कहा कि अब संयम का दौर खत्म हो गया है और उसने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगियों के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने की चेतावनी दी. बयान में कहा गया कि अगर अमेरिकी सेना ने “रेड लाइन” पार की तो ईरान की प्रतिक्रिया क्षेत्र से बाहर तक जा सकती है.
पिछले हफ्ते ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने खार्ग द्वीप को लेकर कड़ी चेतावनी दी थी.
उन्होंने कहा था, “खार्ग द्वीप पर किसी भी हमले का निर्णायक जवाब दिया जाएगा और जो भी इस द्वीप पर हमला करेगा, वह जिंदा वापस नहीं लौटेगा.”
ईरान की सेना ने मंगलवार को कहा कि उसने बड़े स्तर पर ड्रोन हमले किए, जिनमें अमेरिका और इजरायल से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया. इसमें दक्षिण इज़रायल के डिमोना के पास पेट्रोकेमिकल पावर यूनिट और ईंधन भंडारण स्थल, सऊदी अरब के जेबेल अली पोर्ट पर नौसैनिक रखरखाव सुविधा और कुवैत के अहमद अल-जबर एयर बेस पर रडार और आवासीय ठिकाने शामिल हैं. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, सेना ने इन कार्रवाइयों को ईरान के ऊर्जा और बुनियादी ढांचे पर हुए हमलों का जवाब बताया.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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