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Saturday, 11 April, 2026
होमरिपोर्टवाराणसी में ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का भव्य मंचन, 60 हजार से ज्यादा दर्शकों ने देखा गौरवशाली इतिहास

वाराणसी में ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य का भव्य मंचन, 60 हजार से ज्यादा दर्शकों ने देखा गौरवशाली इतिहास

इस महानाट्य का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया.

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भोपाल/वाराणसी: देश की धर्म नगरी वाराणसी 3 से 5 अप्रैल तक सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन, वीरता और साहस की गवाह बनी. मध्यप्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ऐतिहासिक महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ को 60 हजार से ज्यादा दर्शकों ने देखा. यह अपने आप में एक खास रिकॉर्ड रहा. शानदार मंचन देखकर दर्शक रोमांचित हो गए. कलाकारों ने मंच पर भारत के गौरवशाली इतिहास को जीवंत कर दिया, जिसने सदियों से मानव समाज को स्वतंत्रता और सुशासन के लिए प्रेरित किया है.

इस महानाट्य का शुभारंभ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह महानाट्य लोगों को सुशासन की श्रेष्ठ परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन से परिचित कराता है.

महानाट्य के लिए भव्य और विशाल सेट तैयार किया गया था. ऊंचे-ऊंचे किले और राजसी दृश्य दर्शकों को आकर्षित कर रहे थे. लाइट और म्यूजिक इफेक्ट ने मंचन को और भी जीवंत बना दिया. सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता और प्रजा के प्रति समर्पण देखकर दर्शकों को गर्व महसूस हुआ.

मंच पर हाथियों, घोड़ों और ऊंटों के काफिलों ने माहौल को और भी भव्य बना दिया. हाथियों की चिंघाड़ और घोड़ों की टापों से रणभूमि का वास्तविक दृश्य महसूस हुआ, जिसे देखकर दर्शक रोमांचित हो उठे.

इस महानाट्य में 200 से ज्यादा कलाकारों ने अभिनय किया. कलाकारों ने सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व के कई ऐसे पहलुओं को दिखाया, जो उन्हें एक साधारण राजा से चक्रवर्ती सम्राट बनाते हैं. नाटक में यह भी दिखाया गया कि कैसे सम्राट विक्रमादित्य भेष बदलकर रात में प्रजा का हाल जानने निकलते थे. कई भावुक दृश्यों को देखकर दर्शकों की आंखों में आंसू आ गए. नाटक के अंत में दर्शक “सम्राट विक्रमादित्य की जय” के नारे लगाने लगे.

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