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Thursday, 9 April, 2026
होमदेशPIL में अरुणाचल CM पेमा खांडू के परिवार को मिले कॉन्ट्रैक्ट का मुद्दा, SC ने CBI को दिए जांच के आदेश

PIL में अरुणाचल CM पेमा खांडू के परिवार को मिले कॉन्ट्रैक्ट का मुद्दा, SC ने CBI को दिए जांच के आदेश

लेकिन SC ने साफ किया कि उसका आदेश आरोपों की सच्चाई पर नहीं है, बल्कि यह तय करने के लिए है कि मामले में विस्तृत जांच ज़रूरी है या नहीं.

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिया कि वह दो हफ्ते के अंदर एक प्रारंभिक जांच दर्ज करे. यह जांच अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू के रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों की कंपनियों को सरकारी कॉन्ट्रैक्ट देने में कथित गड़बड़ियों को लेकर होगी.

जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन. वी. अंजारिया की बेंच ने यह निर्देश NGOs Save Mon Region Federation और Voluntary Arunachal Sena द्वारा दायर याचिका पर दिया. याचिका में आरोप लगाया गया कि राज्य के सभी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट सीएम के करीबी परिवार के सदस्यों को दिए जा रहे थे.

हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि उसका आदेश आरोपों की सच्चाई पर कोई फैसला नहीं है. सीबीआई को यह देखने के लिए कहा गया है कि क्या मामले में विस्तृत जांच की जरूरत है या नहीं.

सीबीआई को 16 हफ्तों के अंदर कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है.

प्रारंभिक जांच में जनवरी 2015 से दिसंबर 2025 तक राज्य में दिए गए सभी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट और अवॉर्ड शामिल होंगे और याचिका में बताए गए सभी मामलों की जांच होगी.

बीजेपी नेता जुलाई 2016 में सीएम बने थे और तब से पद पर हैं. कोर्ट ने कहा कि यह आदेश सीबीआई को अपनी जांच आगे बढ़ाने से नहीं रोकता, यानी वह याचिका में बताए गए मामलों से आगे भी जांच कर सकती है.

फैसले में सीबीआई की प्रारंभिक जांच का दायरा बताया गया है. इसमें कहा गया कि केंद्रीय एजेंसी सभी फाइलें, खरीद प्रक्रिया और टेंडर दिए जाने के कारणों की जांच करेगी.

कोर्ट ने अरुणाचल सरकार और उसके सभी विभागों को सीबीआई के साथ सहयोग करने का आदेश दिया और राज्य को चार हफ्ते में पिछले 10 साल में कंपनियों को दिए गए कॉन्ट्रैक्ट से जुड़े सभी रिकॉर्ड, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी शामिल हैं, सौंपने को कहा.

राज्य के मुख्य सचिव सीबीआई के साथ समन्वय के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे, जो एजेंसी की टीम को रिकॉर्ड और अधिकारियों तक पहुंच दिलाने में मदद करेगा.

मुख्य सचिव को एक हफ्ते के अंदर सभी विभागों को निर्देश देने को भी कहा गया है कि जांच से जुड़े रिकॉर्ड और दस्तावेज नष्ट, बदले या छुपाए न जाएं.

17 फरवरी को बेंच ने याचिकाकर्ताओं और जवाब देने वाले पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद कार्यवाही पूरी कर ली थी.

‘प्रायोजित मुकदमेबाजी’

राज्य सरकार ने कोर्ट नोटिस के जवाब में दाखिल अपने हलफनामे में सीएम पेमा खांडू के परिवार के सदस्यों को सरकारी काम दिए जाने की जानकारी दी थी. लेकिन मौखिक बहस के दौरान राज्य के वकील ने याचिका को “प्रायोजित मुकदमेबाजी” बताया.

पिछले साल 2 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरुणाचल प्रदेश सरकार से 2015 से 2025 तक दिए गए कॉन्ट्रैक्ट की जानकारी मांगी थी, जिसमें सीएम के परिवार के सदस्यों की कंपनियों को दिए गए कॉन्ट्रैक्ट भी शामिल थे.

याचिका में सीएम खांडू भी एक पक्ष थे. इसके अलावा उनके पिता दोरजी खांडू की दूसरी पत्नी रिंचिन ड्रेमा और भतीजे त्सेरिंग ताशी भी पक्ष थे.

दोरजी खांडू 2007 से अप्रैल 2011 में हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत तक अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे.

सरकारी दस्तावेज़ का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता वकील प्रशांत भूषण ने पिछली सुनवाई में कोर्ट को बताया कि पिछले 10 साल में अरुणाचल प्रदेश में लगभग 1,270 करोड़ रुपये के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट खांडू से जुड़ी चार कंपनियों को दिए गए.

भूषण ने कहा कि 11 साल में 31 कॉन्ट्रैक्ट ब्रांड इगल्स नाम की कंपनी को दिए गए, जो CM की पत्नी की कंपनी है. उन्होंने 17 फरवरी को अपनी दलील खत्म करते हुए कहा कि यह साफ तौर पर हितों के टकराव का मामला है.

उन्होंने एक दूसरी कंपनी Frontier Associate का भी ज़िक्र किया, जो उनकी ही मालिकाना कंपनी है और जिसे भी काम के आदेश दिए गए.

भूषण ने कहा कि हलफनामे में केवल चार कंपनियों का ज़िक्र है जो सीधे तौर पर खांडू के परिवार से जुड़ी हैं. इनमें से दो कंपनियों को इस अवधि में लगभग 25 करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट मिले.

भूषण के अनुमान के अनुसार, पिछले 10 साल में राज्य में दिए गए कुल कॉन्ट्रैक्ट की कीमत का लगभग 3 प्रतिशत केवल इन चार कंपनियों को मिला.

उन्होंने सीबीआई जांच की मांग की क्योंकि पूरी प्रक्रिया “भ्रष्टाचार की बदबू” देती है.

भूषण ने कहा कि जब किसी मौजूदा सीएम के परिवार से सीधे जुड़ी कंपनियां शामिल हों, तो राज्य पुलिस निष्पक्ष जांच नहीं कर पाएगी.

भूषण ने कहा कि जांच में यह देखा जाना चाहिए कि खांडू से सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी इन कंपनियों ने सरकारी टेंडर या काम के आदेश में हिस्सा लिया था या नहीं.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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