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Saturday, 11 April, 2026
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संघर्ष के युग में गांधी का अहिंसा सिद्धांत आगे का मार्ग प्रशस्त करता है: उपराष्ट्रपति

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(तस्वीरों के साथ)

मोतिहारी, चार अप्रैल (भाषा) उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को कहा कि संघर्ष, विभाजन और असहिष्णुता से भरे इस युग में महात्मा गांधी का अहिंसा का सिद्धांत मानवता के लिए एक सशक्त मार्ग प्रशस्त करता है।

पूर्वी चंपारण जिले में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राधाकृष्णन ने जोर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डेटा साइंस जैसे क्षेत्र विकास और नवाचार के नए द्वार खोल रहे हैं।

उन्होंने युवाओं से इन प्रगति को जिज्ञासा और जिम्मेदारी के साथ अपनाने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी जानते हैं कि गौतम बुद्ध को बिहार में ज्ञान प्राप्त हुआ था और गांधी जी को चंपारण की इसी भूमि में अपनी सच्ची ‘कर्मभूमि’ मिली थी।’’

राधाकृष्णन ने कहा कि चाहे बौद्ध धर्म हो, जैन धर्म हो या समाजवादी क्रांति का विचार, सब कुछ ने यहीं आकार लिया।

उन्होंने कहा, ‘‘बिहार ने लोक नायक जयप्रकाश नारायण जैसे दूरदर्शी व्यक्तित्व को जन्म दिया जिन्होंने भारत की नैतिक और राजनीतिक चेतना को आकार दिया। मैं स्वयं, 18 या 19 वर्ष की उम्र में, 1974 में कोयंबटूर के जिला महासचिव के रूप में जेपी आंदोलन से गहराई से जुड़ा था।’’

उपराष्ट्रपति ने भारत की सामाजिक-राजनीतिक स्थिति को ऊपर उठाने में कर्पूरी ठाकुर, प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद और परोपकारी महारानी जानकी कुंवर के योगदान को याद किया।

स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने उनसे राष्ट्रवाद को अपनाने और ‘एक स्वस्थ और सुदृढ़ समाज के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने’ का आग्रह किया जो अनैतिक चीजों को कभी स्वीकार न करे।

उन्होंने कहा, ‘‘आज जब आप अपनी उपाधियां प्राप्त कर रहे हैं, तो आपसे भारत की समृद्ध विरासत का पथप्रदर्शक बनने की अपेक्षा की जाती है। आप महात्मा गांधी के आदर्शों को आगे बढ़ाएं और एक मजबूत, समृद्ध और विकसित भारत की प्राप्ति में योगदान दें।’’

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को व्यक्तिगत विकास और समाज को सशक्त बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डेटा विज्ञान जैसे क्षेत्र संभावनाओं को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं और विकास तथा नवाचार के नए रास्ते खोल रहे हैं। मैं आपको जिज्ञासा और जिम्मेदारी के साथ इन प्रगति को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता हूं।’’

राधाकृष्णन ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए विशिष्ट अनुसंधान अवसर भारत की पारंपरिक बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने और बढ़ावा देने के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

उन्होंने कहा, “मुझे यह भी जानकारी मिली है कि विश्वविद्यालय ‘फिट इंडिया’ अभियान के तहत खेल और फिटनेस की संस्कृति को सक्रिय रूप से बढ़ावा देता है। इसने विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।’’

इस समारोह में राज्यपाल सैयद अता हसनैन और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

भाषा संतोष शफीक

शफीक

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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