नई दिल्ली: राष्ट्रीय खाद्य नियामक पर भरोसा कमजोर करने के लिए “राष्ट्रीय स्तर की” एक “समन्वित साजिश”, ऐसा कंटेंट बनाने के लिए “विदेशी फंडिंग” की संभावना, और “फूड सेफ्टी की राष्ट्रीय प्राधिकरण” के खिलाफ जनता में अविश्वास पैदा करना. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) की आलोचना करने वाले कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स अब शीर्ष संस्था के निशाने पर हैं, जिसने 26 मार्च को दर्ज एक एफआईआर में उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं.
इनमें एक यूट्यूबर भी शामिल है, जिसने FSSAI की निगरानी भूमिका पर सवाल उठाते हुए नकली पनीर और दूध की व्यापक बिक्री का मुद्दा उठाया था. FSSAI के अनुसार, इन सोशल मीडिया अकाउंट्स ने संगठन के आधिकारिक दस्तावेजों को गैरकानूनी तरीके से हासिल किया और बिना अनुमति अपने प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किया.
दिल्ली पुलिस द्वारा इन एक्स अकाउंट्स के पीछे मौजूद लोगों के बारे में जानकारी—जैसे फोन नंबर, ईमेल आईडी, आईपी लॉग डिटेल—मांगने के कदम से सार्वजनिक नाराज़गी बढ़ गई है, जिसे कई लोग “संदेशवाहक को ही निशाना बनाना” बता रहे हैं.
यह एफआईआर आईपी एस्टेट पुलिस स्टेशन में FSSAI अधिकारी डॉ. संजय कुमार की शिकायत पर दर्ज की गई, जब एक्स पर कुछ हैंडल्स ने फूड रेगुलेटर के कामकाज पर सवाल उठाते हुए पोस्ट करना शुरू किया. दिप्रिंट को जानकारी मिली है कि पुलिस ने एक्स को जिन प्रोफाइल्स की जानकारी दी है, उनमें @khurpenchh, @gemsofbabus_, @IamTheStory_, @NalinisKitchen और @YTKDIndia शामिल हैं.
जांच के दायरे में आए एक्स हैंडल्स में से एक—@khurpenchh—ने एक पोस्ट में ‘Sweety Behera’ नाम से पहचानी गई FSSAI डायरेक्टर की नियुक्ति पर सवाल उठाया था. यह हैंडल सिविल सर्वेंट्स और एस्पिरेंट्स पर निगरानी से जुड़े पोस्ट के कारण काफी फॉलोअर्स हासिल कर चुका है.
एक अन्य हैंडल @NalinisKitchen, जिसे यूट्यूबर नलिनी उनागर चलाती हैं, ने FSSAI डायरेक्टर की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि बाजार में बिक रहे नकली दूध, पनीर, तेल और अन्य हानिकारक उत्पादों पर अथॉरिटी चुप रही, जिन्हें लोग खा रहे हैं और बीमार हो रहे हैं. उन्होंने खराब स्वच्छता मानकों को लेकर भी चिंता जताई. नीचे उस पोस्ट का स्क्रीनशॉट है, जिसे बाद में डिलीट कर दिया गया.

इस बीच एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ लोगों का एक नेटवर्क “लगातार अभियान” चलाकर संस्था के खिलाफ भ्रामक कंटेंट फैलाने में लगा था और एक्स व लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म पर आंतरिक गोपनीय दस्तावेज भी लीक किए गए, जिनमें से कुछ फर्जी थे. एफआईआर में कहा गया है कि यह काम FSSAI की छवि खराब करने के लिए “इनसाइडर्स” की मदद से किया गया.
मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने दिप्रिंट को बताया, “एक्स पर 100 से ज्यादा पोस्ट संगठित तरीके से साझा किए गए, जिनमें कहा गया कि भारतीय फूड ऑपरेटर्स भारतीयों को सुरक्षित भोजन देने में सक्षम नहीं हैं.”
“जांच के दौरान हमें पता चला कि FSSAI के गोपनीय दस्तावेज हासिल किए गए, साझा किए गए और उनके कुछ हिस्सों को चुनकर हाईलाइट किया गया, जिनमें दावा किया गया कि FSSAI द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही और संस्थाएं जहर खिला रही हैं. यह दस्तावेज फूड रेगुलेशन से जुड़ा नहीं था. यह एक कर्मचारी की राय थी, जो इंडक्शन के दौरान दी गई थी और उसी को हाईलाइट किया गया.”
अधिकारी के अनुसार, इस मामले की गहराई से जांच जरूरी है.
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि सोशल मीडिया पोस्ट में FSSAI की आलोचना के साथ-साथ कुछ आंतरिक दस्तावेज भी शामिल थे, जैसे मीटिंग की कार्यवाही और एक अधिकारी की नियुक्ति से जुड़ी आंतरिक समिति की रिपोर्ट, जिसमें उनके अनुभव के बारे में गलत जानकारी देने की बात कही गई थी.
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “मामले की मेरिट के आधार पर जांच की जाएगी. हम उन दस्तावेजों की प्रकृति देखेंगे जो कथित तौर पर लीक हुए हैं और यह भी जांचेंगे कि वे कितने संवेदनशील हैं.”
FSSAI ने सोशल मीडिया हैंडल्स का विश्लेषण भी किया और आरोप लगाया कि पोस्ट जिस समन्वित तरीके से साझा किए गए, उससे “बड़ी साजिश” की ओर इशारा मिलता है. एफआईआर में कहा गया है कि कई हैंडल्स के भारत के बाहर से संचालित होने का संदेह है.
इस पर टिप्पणी करते हुए ऊपर बताए गए अधिकारी ने कहा, “ऐसा लगता है कि यह अभियान कुछ विदेशी बिजनेस संस्थाओं को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार किया गया हो सकता है, ताकि उपभोक्ताओं का भरोसा कम किया जा सके. जिन कई इन्फ्लुएंसर्स ने इसे साझा किया, उनमें से कुछ भारत में नहीं रहते और अपने असली आईडी का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं.”
‘एक साजिश’
एफआईआर के अनुसार, FSSAI को बदनाम करने की कथित साजिश का उद्देश्य उन बिजनेस संस्थाओं को अनुचित फायदा पहुंचाना था, जिनके पास FSSAI सर्टिफिकेशन नहीं है, जो इसे हासिल करने में विफल रहे, या जिनके लाइसेंस रद्द कर दिए गए.
इसमें कहा गया है कि कुछ इन्फ्लुएंसर्स द्वारा की गई “आपराधिक मानहानि” का मकसद “भारत के बाहर की संस्थाओं को अनुचित लाभ” पहुंचाना था, ताकि “फूड सेफ्टी के लिए जिम्मेदार राष्ट्रीय एजेंसी FSSAI को बदनाम” किया जा सके.
एफआईआर में आगे कहा गया है कि खाद्य और अन्य उपभोग की वस्तुएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती रुचि का विषय बन चुकी हैं, जिसका कारण बढ़ती क्रय शक्ति और भारत की अर्थव्यवस्था का विस्तार है, जिससे संस्थाओं के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है.
इसमें जोड़ा गया है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने के लिए पहले भी कई तरीके अपनाए जाते रहे हैं और FSSAI को बदनाम करना भी ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा बताया गया है.
एफआईआर में दावा किया गया है कि कुछ लोगों ने संभवतः FSSAI के अंदर मौजूद अधिकारियों की मदद से आंतरिक दस्तावेज हासिल किए और उन्हें सोशल मीडिया पर साझा किया, ताकि “फूड सेफ्टी के लिए जिम्मेदार सरकारी संस्थाओं के कामकाज और अधिकार पर जनता का भरोसा कमजोर किया जा सके.”
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि जिन दस्तावेजों की बात की जा रही है, वे या तो चोरी किए गए थे या साजिशकर्ताओं ने FSSAI अधिकारियों की मदद से उन्हें हासिल किया, जिससे सरकारी कर्मचारी के रूप में आपराधिक विश्वासघात हुआ.
“जो दस्तावेज सोशल मीडिया हैंडल्स पर दिखाई दे रहे हैं, वे विशेष रूप से उन्हें संभालने वाले स्टाफ को सौंपे गए थे.”
इसमें आगे आरोप लगाया गया है कि ये दस्तावेज FSSAI स्टाफ ने साजिशकर्ताओं के साथ मिलकर और समन्वय करके बाहर निकाले.
एफआईआर में कहा गया है, “उसी दस्तावेज या उसके हिस्से को असली या फर्जी रूप में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया, ताकि उनके दावे ज्यादा विश्वसनीय लगें.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
