नई दिल्ली: एक मार्केट एक्सपर्ट ने कहा कि करीब 6 लाख बैरल ईरानी कच्चे तेल की एक खेप, जो 4 अप्रैल को पिंग शुन जहाज के जरिए गुजरात के वडिनार पोर्ट पहुंचने वाली थी, उसने भारत को अपना घोषित गंतव्य हटा दिया है और अब चीन की ओर संकेत कर रही है.
“Kpler, जो एक ग्लोबल ट्रेड डेटा इंटेलिजेंस फर्म है, में रिफाइनरी और ऑयल मार्केट मॉडलिंग के मैनेजर सुमित रितोलिया ने शुक्रवार को दिप्रिंट को बताया, “ईरानी कच्चे तेल का जहाज ‘PING SHUN’, जो पिछले तीन दिनों से भारत के वडिनार की ओर जा रहा था, पहुंचने से पहले भारत को अपने घोषित गंतव्य से हटा चुका है और अब चीन की ओर संकेत कर रहा है.”
रितोलिया ने मार्केट सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि गंतव्य में बदलाव पेमेंट शर्तों में बदलाव से जुड़ा है, जहां विक्रेता अब 30–60 दिन का क्रेडिट देने के बजाय एडवांस पेमेंट की मांग कर रहे हैं.
रितोलिया ने कहा, “यह बदलाव पेमेंट से जुड़ा लगता है, जहां विक्रेता पहले की 30–60 दिन की क्रेडिट अवधि से हटकर अब एडवांस या जल्दी भुगतान की शर्त रख रहे हैं.”
उन्होंने कहा, “हालांकि, यात्रा के बीच में गंतव्य बदलना ईरानी कच्चे तेल के मामले में नया नहीं है, लेकिन यह दिखाता है कि ट्रेड फ्लो अब वित्तीय शर्तों और दूसरी पार्टी के जोखिम के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो गया है.”
यह साफ नहीं है कि किस भारतीय रिफाइनरी ने यह खेप खरीदी थी, क्योंकि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, नायरा एनर्जी और भारत पेट्रोलियम सहित कई रिफाइनरियां वडिनार के जरिए कच्चा तेल लेती हैं.
हालांकि, रितोलिया ने संकेत दिया कि अगर पेमेंट की समस्या सुलझ जाती है तो यह खेप फिर से भारत की ओर भेजी जा सकती है.
रितोलिया ने कहा, “अगर पेमेंट से जुड़ी समस्या सुलझ जाती है, तो यह खेप भारत की किसी रिफाइनरी तक पहुंच सकती है.”
उन्होंने कहा, “यह घटना दिखाती है कि चीन के अलावा दूसरे देशों में ईरानी कच्चे तेल के प्रवाह को तय करने में अब लॉजिस्टिक्स के साथ-साथ कमर्शियल शर्तें भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई हैं.”
अगर जहाज आखिर में भारत पहुंचता है, तो 2019 के बाद यह देश में ईरानी कच्चे तेल की पहली खेप होगी.
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