नई दिल्ली: आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) में एक-तिहाई पद खाली हैं, यह जानकारी संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोक सभा में दी.
कुल 7,585 स्वीकृत पदों में से 2,646 पद ASI की 38 सर्किल में खाली हैं.
दिप्रिंट ने संसदीय डेटा का विश्लेषण किया और पाया कि सभी ASI सर्किल गंभीर स्टाफ कमी से जूझ रहे हैं. शेखावत यह जवाब ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस सांसद शर्मिला सरकार के सवाल के जवाब में दे रहे थे.
शेखावत ने बताया कि भोपाल में 393 स्वीकृत पदों में से 201 पद खाली हैं. दिल्ली में 622 पदों में से 158 पद खाली हैं. आगरा में 552 पदों में से 132 पद खाली हैं. औरंगाबाद, अमरावती, जबलपुर, मुंबई, पुरी और श्रीनगर जैसे शहरों में भी इस 165 साल पुराने संगठन में स्टाफ कमी की स्थिति समान है.
उत्तर भारत के एक सर्किल के सुपीरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट ने दिप्रिंट को नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया, “स्टाफ की कमी ASI के सबसे बड़े चुनौतियों में से एक है. स्टाफ की कमी का असर जमीन पर संरक्षित स्मारकों की निगरानी पर पड़ता है, और सर्किलों पर काम का बोझ बढ़ जाता है.”
अधिकारी ने कहा कि ये पद स्टाफ सिलेक्शन कमिशन (SSC) और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के माध्यम से भरे जाते हैं.
उन्होंने कहा, “पिछले 11 सालों में सर्किल स्तर पर लोगों को भर्ती नहीं किया गया है.” उन्होंने यह भी बताया कि तकनीक की वजह से एक व्यक्ति कई लोगों का काम संभाल सकता है, जो स्टाफ न भर्ती करने का एक कारण है.
देशभर में स्टाफ की कमी के बावजूद, यह सरकारी एजेंसी भारत में 3,686 संरक्षित स्मारकों और स्थलों की देखरेख करती है, और केवल 143 स्मारकों पर ही प्रवेश शुल्क लिया जाता है.
भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक ने पिछले 13 सालों में दो बार स्टाफ कमी के मुद्दे को उठाया है, और 2022 में तथा पिछले हफ्ते एक बार फिर संसद की समिति इस मामले को देखी.
हाल ही में ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर पर पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट में ASI संरक्षित स्थलों पर संरक्षकों की कमी पर चिंता जताई गई है.
रिपोर्ट में लिखा है, “समिति यह भी सुझाव देती है कि मंत्रालय (संस्कृति) संरक्षित स्मारकों के संरक्षण और रख-रखाव में समुदाय की संगठित भागीदारी के मॉडलों की सक्रिय रूप से खोज करे, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ASI के स्टाफ स्तर स्वीकृत संख्या से कम हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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