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Tuesday, 31 March, 2026
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कारोबार सुगमता बढ़ाने को ई-कॉमर्स निर्यात, कूरियर व्यापार सुधार लागू

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नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने ई-कॉमर्स निर्यात और कूरियर आधारित आयात एवं निर्यात को मजबूत और व्यवस्थित करने के लिए व्यापक सुधार लागू किए हैं। ये सुधार एक अप्रैल यानी बुधवार से लागू हो रहे हैं।

वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को बयान में कहा कि इन सुधारों में कूरियर निर्यात पर प्रति खेप 10 लाख रुपये की मूल्य सीमा को पूरी तरह से हटाना, लौटाए गए और अस्वीकृत पार्सल के निपटान के लिए एक व्यवस्थित रूपरेखा लागू करना और बिना मंजूरी वाले निर्यात के लिए कानूनी रूप से वैध ‘मूल स्थान पर वापसी’ (आरटीओ) की व्यवस्था शामिल हैं। इन उपायों का मकसद कारोबार सुगमता बढ़ाना है।

बयान के अनुसार, इससे लॉजिस्टिक संबंधित अक्षमताओं में कमी आएगी और विशेष रूप से लघु एवं मझोले उद्यमों, कारीगरों और स्टार्टअप के लिए भारत की वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धी क्षमता मजबूत होगी।

इन सुधारों के तहत कूरियर माध्यम से वाणिज्यिक निर्यात खेपों के लिए मौजूदा 10 लाख रुपये की मूल्य सीमा को हटा दिया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि इस उपाय से विशेष रूप से ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। क्योंकि इससे निर्यात मूल्य में अधिक लचीलापन आएगा और कूरियर माध्यम से निर्बाध निर्यात संभव हो सकेगा। इससे मूल्य प्रतिबंधों के कारण ऐसे निर्यात को पारंपरिक हवाई या समुद्री कार्गो में भेजने की जरूरत समाप्त हो जाएगी।

इन उपायों की घोषणा फरवरी में संसद में पेश किए गए बजट में की गई थी।

सीबीआईसी ने अंतरराष्ट्रीय कूरियर टर्मिनल पर बिना मंजूरी वाले या बिना दावे वाले आयातित सामान के कारण भीड़ और निपटान में होने वाली देरी को दूर करने के लिए ‘मूल स्थान पर वापसी’ सुविधा शुरू की है।

इस सुविधा के तहत, जो सामान 15 दिन से अधिक समय तक बिना मंजूरी वाले या बिना दावे वाले होते हैं और प्रतिबंधित, सीमित या प्रवर्तन के तहत नहीं हैं, उन्हें एक सरलीकृत प्रक्रिया के बाद मूल स्थान पर वापस भेजा जा सकता है। इससे कूरियर टर्मिनल पर भीड़ कम होने और लॉजिस्टिक दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है।

सीबीआईसी ने ई-कॉमर्स निर्यात से संबंधित सामान सहित, लौटाए गए या अस्वीकृत सामान के पुनः आयात की प्रक्रिया को भी सरल बनाया है।

वस्तु आधारित सत्यापन के स्थान पर जोखिम-आधारित दृष्टिकोण अपनाया गया है और संबंधित अधिसूचना में आवश्यक संशोधन किए गए हैं।

इसके अतिरिक्त, एक्सप्रेस कार्गो मंजूरी प्रणाली में अलग से ‘रिटर्न मॉड्यूल’ विकसित किया गया है ताकि ऐसे रिटर्न की सुगम प्रक्रिया सुनिश्चित हो सके।

बयान के अनुसार, इन उपायों से प्रतीक्षा समय में कमी आएगी, लेनदेन लागत घटेगी और निर्यातकों, लॉजिस्टिक परिचालकों और अंतरराष्ट्रीय कूरियर व्यापार, विशेष रूप से ई-कॉमर्स से जुड़े अन्य संबंधित पक्षों को महत्वपूर्ण राहत मिलेगी।

ये उपाय कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने, देश के ई-कॉमर्स निर्यात परिवेश को मजबूत करने और वैश्विक व्यापार में देश की प्रतिस्पर्धी क्षमता को बढ़ाने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।

भाषा रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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