नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण एयरलाइन कंपनियों की संभावनाओं पर इसके पूरे प्रभाव का सटीक आकलन करना अभी असंभव है। हालांकि, ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि, सीमित क्षमता और एयरलाइंस के कम मुनाफे के चलते पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण हवाई किराये में पहले से ही वृद्धि हो रही है। यह जानकारी वैश्विक एयरलाइंस समूह आईएटीए ने मंगलवार को दी।
अंतरराष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (आईएटीए) लगभग 350 एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करता है, जिनमें एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस, इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी कंपनियां शामिल हैं।
आईएटीए ने मंगलवार को बयान में फरवरी, 2026 के लिए वैश्विक यात्री मांग के आंकड़े जारी किए और बताया कि राजस्व यात्री किलोमीटर (आरपीके) के संदर्भ में कुल मांग पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 6.1 प्रतिशत बढ़ी है।
बयान के अनुसार, उपलब्ध सीट किलोमीटर (एएसके) के रूप में मापी जाने वाली कुल क्षमता में सालाना आधार पर 5.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि यात्रियों के संदर्भ में विमान क्षमता का उपयोग 81.4 प्रतिशत रहा, जो फरवरी का अब तक का सबसे अधिक आंकड़ा है।
आईएटीए के महानिदेशक विली वॉल्श ने कहा कि राजस्व यात्री किलोमीटर में 6.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ, फरवरी एक बेहतर महीना रहा। यह बताता है कि मांग में वृद्धि के लिए आधारभूत परिस्थितियां सकारात्मक बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, पश्चिम एशिया में युद्ध की अवधि और तीव्रता जाने बिना, एयरलाइन कंपनियों की संभावनाओं पर इसके पूरे प्रभाव का सटीक आकलन करना असंभव है। लेकिन कुछ बातें पहले से ही साफ हैं। ईंधन की लागत में भारी वृद्धि हुई है। सीमित क्षमता और कम मुनाफे के कारण हवाई किराये पहले से ही बढ़ रहे हैं।’’
वॉल्श के अनुसार, क्षमता तैनाती में भी बदलाव हो रहा है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया से आने-जाने वाले या वहां से गुजरने वाले यातायात के लिए या उन क्षेत्रों में जहां ईंधन आपूर्ति एक समस्या है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मार्च के लिए निर्धारित क्षमता वृद्धि पहले के पांच प्रतिशत से अधिक के अनुमान से घटकर 3.3 प्रतिशत रह गई है।
एक अलग घटनाक्रम में, इंडिगो ने मंगलवार को घोषणा की कि वॉल्श एयरलाइन के अगले सीईओ होंगे।
इस बीच, 28 फरवरी से शुरू हुआ पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण उड़ान संचालन बाधित हो रहा है। परिचालन संबंधी चुनौतियों और हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण एयरलाइन कंपनियों को सेवाएं कम करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
भाषा रमण अजय
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