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Tuesday, 31 March, 2026
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हालात सुधरने पर नए वित्त वर्ष में बाजार परिदृश्य संरचनात्मक रूप से सकारात्मकः विश्लेषक

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नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच घरेलू शेयर बाजारों ने वित्त वर्ष 2025-26 का समापन भले ही सात प्रतिशत की गिरावट के साथ किया है, लेकिन विश्लेषकों की नजर में अगले वित्त वर्ष में बाजारों के लिए परिदृश्य संरचनात्मक रूप से सकारात्मक बना हुआ है।

आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में बीएसई सेंसेक्स 5,467.37 अंक यानी करीब सात प्रतिशत टूट गया, जबकि एनएसई निफ्टी में 1,187.95 अंक यानी पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

समाप्त वित्त वर्ष के दौरान घरेलू शेयर बाजार पर वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, कच्चे तेल के बढ़े हुए दाम, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भू-राजनीतिक तनाव का दबाव रहा।

इस दौरान पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद बाजारों में तेज गिरावट देखी गई। 28 फरवरी से अब तक सेंसेक्स 9,339.64 अंक यानी 11.48 प्रतिशत तक लुढ़क चुका है। इस दौरान ब्रेंट कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया जिससे मुद्रास्फीति और ब्याज दरों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

ऑनलाइन ट्रेडिंग मंच एनरिच मनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) पोनमुडी आर. ने कहा, ‘‘मौजूदा गिरावट घरेलू अर्थव्यवस्था की कमजोरी के बजाय बाहरी कारकों से प्रेरित है। कच्चे तेल के दाम, पश्चिम एशिया में तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली ने जोखिम से बचने का माहौल बना दिया है।’’

मार्च में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक बहिर्वाह है।

स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख संतोष मीणा ने कहा, “निकट अवधि में बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है, लेकिन मजबूत घरेलू निवेश प्रवाह और कंपनियों की आय वृद्धि से आगे चलकर गिरावट को सीमित रखने में मदद मिलेगी।”

उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों की वापसी के लिए कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, रुपये की स्थिरता और पश्चिम एशिया तनाव में कमी जरूरी होगी।

विश्लेषकों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान बाजार दो चरणों में बंटा रहा। पहले हिस्से में बाजारों ने मजबूत प्रदर्शन किया और दिसंबर, 2025 में सेंसेक्स 86,159 अंक के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया। लेकिन वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में वैश्विक झटकों के कारण इसमें तेज गिरावट आई।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय बाजार के परिदृश्य को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार होने पर बाजारों में धीरे-धीरे स्थिरता लौटेगी और आय आधारित वृद्धि के दम पर दूसरी छमाही में सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि, निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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