हैदराबाद, 31 मार्च (भाषा) तेलंगाना सरकार वित्त वर्ष 2024-25 में अपनी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए केवल दो दिन को छोड़कर पूरे 363 दिन भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से उधार लेती रही।
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) द्वारा ऑडिट किए गए वार्षिक खातों के अनुसार, राज्य सरकार ने इस दौरान आरबीआई से 27,730 करोड़ रुपये की ‘विशेष आहरण सुविधा’ (एसडीएफ) का लाभ उठाया।
कैग की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य ने 298 दिन के लिए 64,188 करोड़ रुपये के ‘अर्थोपाय अग्रिम’ (डब्ल्यूएमए) का उपयोग किया। वित्त वर्ष के अंत में राज्य पर डब्ल्यूएमए का 5,842 करोड़ रुपये का बकाया शेष था।
एसडीएफ और डब्ल्यूएमए दरअसल आरबीआई द्वारा राज्य सरकारों को दी जाने वाली अल्पकालिक कर्ज की सुविधाएं हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य राज्य सरकार की कमाई और खर्च के बीच के अस्थायी अंतर को पाटना है, ताकि सरकारी खजाने में पैसों की कमी के कारण रोज़ाना के कामकाज और भुगतान न रुकें।
राज्य विधानसभा में पेश की गई कैग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि तेलंगाना सरकार ने वर्ष के दौरान 123 दिन के लिए कुल 37,457 करोड़ रुपये का ‘ओवरड्राफ्ट’ भी लिया।
ओवरड्राफ्ट की स्थिति तब पैदा होती है जब सरकार अपनी उधार लेने की सभी सामान्य सीमाएं (एसडीएफ और डब्ल्यूएमए) खत्म कर चुकी होती है और फिर भी उसके पास अपने रोज़ाना के खर्च चलाने के लिए बैंक खाते में ज़रूरी न्यूनतम राशि नहीं बचती।
भाषा सुमित अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
