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Sunday, 29 March, 2026
होमरिपोर्टउत्तराखंड में ‘रेवेन्यू लोक अदालत’ की शुरुआत, सीएम धामी बोले- राजस्व विवादों का होगा तेज निपटारा

उत्तराखंड में ‘रेवेन्यू लोक अदालत’ की शुरुआत, सीएम धामी बोले- राजस्व विवादों का होगा तेज निपटारा

बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार राजस्व मामलों का तेजी से निपटारा किया जाएगा और लंबित मामलों को मिशन मोड में खत्म किया जाएगा, जिसमें जमीन से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी.

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देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य स्तरीय ‘रेवेन्यू लोक अदालत’ का उद्घाटन किया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के विजन की भावना को दर्शाती है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हमेशा इस बात पर जोर देते रहे हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक जल्दी और आसानी से पहुंचे.

उन्होंने बताया कि लंबे समय से लंबित राजस्व मामलों के तेजी और प्रभावी निपटारे के लिए रेवेन्यू लोक अदालत का आयोजन किया गया है. उन्होंने कहा कि ऐसे मामले केवल कागजी प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि किसानों की जमीन, परिवारों की आजीविका और लोगों की गरिमा से जुड़े होते हैं.

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि राज्य में इस समय 400 से अधिक राजस्व अदालतें विभिन्न स्तरों पर काम कर रही हैं, जिनमें राज्य स्तर पर राजस्व परिषद, मंडल स्तर पर आयुक्त अदालत, जिला स्तर पर कलेक्टर अदालत, और तहसील स्तर पर एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार की अदालतें शामिल हैं. इन अदालतों में इस समय 50 हजार से अधिक मामले लंबित हैं.

इन चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने “सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि” के सिद्धांतों पर आधारित रेवेन्यू लोक अदालत की शुरुआत की है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि “आपके द्वार न्याय” की अवधारणा के तहत राज्य के सभी 13 जिलों के 210 स्थानों पर एक साथ रेवेन्यू लोक अदालत आयोजित की जा रही है, जिसमें लगभग 6,933 मामलों का जल्द निपटारा होने की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि जमीन विवादों के अलावा आबकारी, खाद्य, स्टांप शुल्क, SARFAESI एक्ट, गुंडा एक्ट, CrPC, बिजली अधिनियम, वरिष्ठ नागरिक अधिनियम और किराया नियंत्रण अधिनियम से जुड़े मामलों का भी तय समय में पारदर्शी तरीके से निपटारा किया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” के विजन के अनुसार प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाने पर लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि ‘रेवेन्यू कोर्ट केस मैनेजमेंट सिस्टम’ पोर्टल के माध्यम से राजस्व अदालतों की प्रक्रिया को डिजिटल किया गया है, जिससे लोग घर बैठे अपने केस दर्ज कर सकते हैं और उनकी स्थिति देख सकते हैं.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिना विवाद वाले उत्तराधिकार मामलों में जमीन मालिक की मृत्यु के बाद तय समय के भीतर नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया पूरी की जाए. उन्होंने सुझाव दिया कि यह प्रक्रिया तेरहवीं संस्कार तक पूरी हो जाए और परिवार को अपडेट खसरा-खतौनी दे दी जाए. उन्होंने यह भी कहा कि जमीन की पैमाइश और कब्जे से जुड़े मामलों का निपटारा एक महीने के भीतर किया जाए.

उन्होंने कहा कि लोक अदालतों की सबसे बड़ी खासियत पारदर्शिता और निष्पक्षता है, जहां सभी पक्षों को सुनकर संवेदनशीलता के साथ न्याय दिया जाता है. उन्होंने शासन में तकनीक और नवाचार के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल इंडिया पहल से लोगों तक सेवाएं पहुंचाना आसान हुआ है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हर नागरिक को समय पर और निष्पक्ष न्याय देने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है और भविष्य में भी ऐसी पहल जारी रहेगी.

बैठक के दौरान मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार राजस्व मामलों का तेजी से निपटारा किया जाएगा और लंबित मामलों को मिशन मोड में खत्म किया जाएगा, जिसमें जमीन से जुड़े मामलों को प्राथमिकता दी जाएगी.

उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि लंबित राजस्व मामलों का एक महीने के भीतर प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए.

बैठक में राजस्व सचिव रंजना राजगुरु भी मौजूद रहीं.

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