scorecardresearch
Wednesday, 25 March, 2026
होमदेशअर्थजगतमहाराष्ट्र में सड़क परियोजनाओं में 297 करोड़ रुपये का 'अनावश्यक' खर्च, कैग ने उठाए सवाल

महाराष्ट्र में सड़क परियोजनाओं में 297 करोड़ रुपये का ‘अनावश्यक’ खर्च, कैग ने उठाए सवाल

Text Size:

मुंबई, 25 मार्च (भाषा) भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने महाराष्ट्र में ‘हाइब्रिड एन्यूइटी मॉडल’ (एचएएम) के तहत संचालित सड़क परियोजनाओं में 297.97 करोड़ रुपये के अनावश्यक खर्च पर सवाल उठाए हैं।

बुधवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई कैग की रिपोर्ट में वर्ष 2018-19 से 2022-23 के बीच सड़कों के सुधार कार्य का ऑडिट किया गया है।

‘हाइब्रिड एन्यूइटी मॉडल’ (एचएएम) सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) का एक तरीका है, जिसमें सड़क निर्माण की कुल लागत का एक हिस्सा सरकार देती है और बाकी हिस्सा निर्माणकर्ता यानी ठेकेदार लगाता है। ठेकेदार की रकम उसे बाद में किस्तों में लौटाई जाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में सड़क की मोटाई का प्रावधान जरूरत से ज्यादा रखा गया। यातायात के वास्तविक अनुमान (एमएसए) के मुकाबले अत्यधिक मोटाई तय करने की वजह से 297.97 करोड़ रुपये का अतिरिक्त और बेवजह खर्च हुआ।

कैग ने पाया कि भूमि अधिग्रहण की उन गतिविधियों के लिए भी 5.55 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया, जो कभी हुई ही नहीं।

सरकार द्वारा समय पर पैसा जारी न करने के कारण किस्त के भुगतान में देरी हुई, जिससे ठेकेदारों को 4.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ब्याज देना पड़ा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रखरखाव के खर्च में बीमा शुल्क को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। वास्तविक प्रीमियम कम होने के बावजूद कागजों में ज्यादा खर्च दिखाकर 34.56 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डाला गया।

कैग ने सिफारिश की है कि भविष्य में सड़क परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) अधिक सटीक यानी वास्तविक आंकड़ों के आधार पर तैयार की जाए। साथ ही, रिपोर्ट में ब्याज के अतिरिक्त बोझ से बचने के लिए बजट का समय पर आवंटन करने, रखरखाव के खर्च का सही अनुमान लगाने और निगरानी तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

भाषा सुमित अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments