मुंबई, 24 मार्च (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का विधान परिषद में कार्यकाल समाप्त होने पर मंगलवार को उन्हें औपचारिक विदाई दी गई। इस दौरान उन्होंने और उनके पूर्व सहयोगी तथा उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने एकदूसरे पर जमकर निशाना साधा।
ठाकरे के अलावा, विधान परिषद ने उप सभापति नीलम गोर्हे (शिवसेना), अमोल मिटकारी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी), शशिकांत शिंदे (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी-शरदचंद्र पवार), राजेश राठौड़ (कांग्रेस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दादाराव केचे, संजय कानेकर, रणजीत सिंह मोहिते-पाटिल और संदीप जोशी को भी विदाई दी।
शिंदे ने विदाई प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत की।
उन्होंने ठाकरे को ‘उद्धव साहब ठाकरे’ कहकर संबोधित किया। शिंदे और ठाकरे जून 2022 में शिंदे द्वारा ठाकरे के नेतृत्व के खिलाफ बगावत करने के बाद अलग हो गए थे। उन्होंने सदन में एक दूसरे पर निशाना साधते वक्त भी एक-दूसरे का नाम लेने से परहेज किया।
शिंदे ने कहा कि राजनीति में कोई पूर्ण विराम नहीं होता और उन्होंने ठाकरे को शुभकामनाएं दीं।
उप मुख्यमंत्री ने परोक्ष रूप से उद्धव ठाकरे से तुलना करते हुए गोर्हे के बारे में कहा कि वह किसी अमीर परिवार में पैदा नहीं हुई थीं।
ठाकरे ने पार्टी नेतृत्व अपने पिता, शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे से विरासत में प्राप्त किया था।
शिंदे और नीलम गोर्हे दोनों ने बाल ठाकरे के नेतृत्व में काम किया था।
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में ‘स्वयंभू धर्मगुरु’ अशोक खरात के मामले का जिक्र किया, जिसे अनुष्ठान करने के बहाने एक महिला के साथ बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
उन्होंने परोक्ष रूप से कटाक्ष करते हुए कहा, ‘‘अपने हितों के लिए दूसरे की बलि दी जा रही है।’’
भाषा धीरज रंजन
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