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Wednesday, 1 April, 2026
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अनुसूचित जाति पर शीर्ष अदालत का फैसला स्वागतयोग्य: अखिल भारतीय संत समिति

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नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) अखिल भारतीय संत समिति ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया कि केवल हिंदुओं, सिखों और बौद्धों को ही अनुसूचित जाति के रूप में मान्यता दी जा सकती है।

उसने केंद्र से अपील की कि धर्मांतरित लोगों को आरक्षण का लाभ उठाने से रोका जाए।

समिति के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, ‘‘हम उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हैं और इस तरह के लाभों के माध्यम से सनातन धर्म को कमजोर करने के विदेशी प्रायोजित प्रयासों पर रोक लगाने के लिए उसे धन्यवाद देते हैं। संगठन ने इस फैसले के लिए उच्चतम न्यायालय को हार्दिक बधाई दी है।’’

उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि हिंदू धर्म, सिख धर्म या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाले किसी भी व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में सरस्वती ने सरकार से अपील की कि वह अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदायों के उन लोगों की पहचान करने के लिए एक अभियान शुरू करे, जो इस्लाम या ईसाई धर्म में परिवर्तित होने के बाद भी आरक्षण का लाभ उठाते रहते हैं। उन्होंने इन लाभों को समाप्त करने का आग्रह किया है।

सरस्वती ने दावा किया कि संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रथाएं विरोधाभास पैदा करती हैं, खासकर तब जब समानता का दावा करने वाले समुदाय ‘दलित ईसाई’ या ‘पिछड़े मुस्लिम’ जैसी श्रेणियों के तहत लाभ प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने कहा कि धर्मांतरित व्यक्तियों को आरक्षण का लाभ देना, बी.आर. आंबेडकर द्वारा परिकल्पित मूल लाभार्थियों के अधिकारों का हनन है।

भाषा

राजकुमार सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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