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Tuesday, 24 March, 2026
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समर्पित एनआईए अदालतें यूएपीए मामलों की सुनवाई एक वर्ष के भीतर पूरी करें: न्यायालय

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नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र सहित 17 राज्यों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) से संबंधित मामलों की सुनवाई एक वर्ष के भीतर पूरी हो जाए।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि राज्य उन मामलों में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के लिए समर्पित अदालतें स्थापित कर सकते हैं जहां 10 से अधिक मामले लंबित हैं। पीठ ने कहा कि साथ ही वे उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श करके समर्पित पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित कर सकते हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘राज्यों को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि विशेष एनआईए अदालतों में सुनवाई एक वर्ष के भीतर पूरी हो जाए। ऐसा हो सकता है कि किसी एक मामले के निस्तारण में एक महीने से अधिक समय लगे, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि एक एनआईए मामले की सुनवायी औसतन एक महीने में पूरी हो जाएगी। इसके लिए प्रतिदिन सुनवाई होनी चाहिए और एक विशेष लोक अभियोजक नियुक्त किया जाना चाहिए।’’

उसने कहा कि केंद्र ने एक कार्यालय ज्ञापन के माध्यम से प्रत्येक विशेष एनआईए अदालत के लिए गैर-आवर्ती व्यय के लिए एक करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान और आवर्ती व्यय के लिए प्रतिवर्ष एक करोड़ रुपये देने की प्रतिबद्धता जताई है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा, ‘‘यह सामान्य फॉर्मूले के अनुसार अनुदान मिलान का मामला नहीं होना चाहिए, जिसमें केंद्र 60 प्रतिशत धनराशि देता है और शेष 40 प्रतिशत राज्य देते हैं। कई बार यह संभव नहीं होता क्योंकि कुछ राज्य राजस्व घाटे में हैं और कुछ की प्राथमिकताएं अलग हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘नतीजतन, न्यायिक अवसंरचना के निर्माण के लिए केंद्र द्वारा आवंटित 60 प्रतिशत अनुदान का या तो उपयोग नहीं हो पाता है या उसका दुरुपयोग होता है। अवसंरचना की कमी के कारण कई राज्यों में न्यायपालिका को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।’’

पीठ ने इस बात को रिकॉर्ड में लिया कि 17 राज्यों के एडवोकेट जनरल सुनवाई के लिए भौतिक रूप से या डिजिटल माध्यम से उपस्थित थे और उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा कि समर्पित एनआईए अदालतें जल्द से जल्द काम करना शुरू कर दें।

पीठ ने कहा, ‘‘राज्यों को एनडीपीएस मामलों, मकोका और अन्य विशेष कानूनों के लिए अधिक समर्पित अदालतें स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि इससे जघन्य अपराधों से जुड़े मामलों के शीघ्र निस्तारण में मदद मिलेगी।’’

दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस डी संजय ने पीठ को सूचित किया कि समर्पित एनआईए अदालतों के अलावा, एनडीपीएस, मकोका और अन्य मामलों सहित 15 विशेष अदालतें जल्द ही राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स की दूसरी मंजिल पर काम करना शुरू कर देंगी।

कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों के एडवोकेट जनरल ने पीठ को बताया कि उनके पास 10 से अधिक एनआईए मामले हैं।

पीठ ने उनसे अपने-अपने मुख्य न्यायाधीशों से परामर्श करने और एक से अधिक एनआईए अदालत स्थापित करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि पीठासीन अधिकारियों पर अन्य मामलों का बोझ न पड़े।

शीर्ष न्यायालय ने सभी उच्च न्यायालयों को समर्पित एनआईए अदालतों की स्थापना के लिए कुछ प्रक्रियाएं तैयार करने के लिए नोटिस भी जारी किया। उसने कहा कि इन विशेष अदालतों में कार्यरत पीठासीन अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट पर विचार करने के लिए एक विशेष तंत्र बनाया जाएगा और उन पर पारंपरिक रूप से विचार नहीं किया जाएगा।

दस फरवरी को, उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र सहित 17 राज्यों को नोटिस जारी करके यह सुनिश्चित करने को कहा था कि जिन राज्यों में आतंकवाद रोधी कानूनों के तहत 10 या उससे अधिक मामले लंबित हैं, वहां विशेष एनआईए अदालतों की स्थापना की जाए।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा एक विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के बाद उच्चतम न्यायालय ने राज्यों से जवाब मांगा था। रिपोर्ट में कहा गया था कि मंत्रालय ने उन राज्यों में विशेष अदालतों की स्थापना का प्रस्ताव रखा है जहां एनआईए द्वारा जांच किए जा रहे 10 या उससे अधिक मामले लंबित हैं।

पीठ ने भाटी के इस कथन पर भी गौर किया था कि गृह मंत्रालय ने इन विशेष अदालतों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के मानदंडों को अंतिम रूप दे दिया है।

दिल्ली सरकार ने पीठ को यह भी सूचित किया कि ये विशेष अदालतें अप्रैल 2026 तक परिचालन के लिए तैयार हो जाएंगी। सरकार ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने इसकी पुष्टि की है कि दिल्ली उच्च न्यायिक सेवा के न्यायिक अधिकारी इन अदालतों का नेतृत्व करने के लिए उपलब्ध हैं।

भाषा अमित नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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