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Monday, 23 March, 2026
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महायुति सहयोगी सेना और NCP ने सतारा जिला परिषद चुनाव में ‘हेरफेर’ को लेकर BJP की कड़ी आलोचना की

सेना और NCP गठबंधन ने सतारा जिला परिषद चुनाव में 65 में से 35 सीटें जीती थीं, लेकिन 27 सीटें पाने वाली BJP ने एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन से अध्यक्ष पद जीत लिया.

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मुंबई: एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने अपने सहयोगी बीजेपी पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि सतारा में जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव को प्रभावित करने के लिए शक्ति का गलत इस्तेमाल किया गया. यह सत्तारूढ़ महायुति के सहयोगियों के बीच नया विवाद बन गया है.

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह विभाग पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले हफ्ते हुए जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव के दौरान पुलिसकर्मियों ने शिवसेना और एनसीपी नेताओं के साथ धक्का-मुक्की की.

इसके बाद सोमवार को शिवसेना नेता और विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे ने राज्य सरकार को सतारा के पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी को निलंबित करने का निर्देश दिया. हालांकि, बाद में बीजेपी के राम शिंदे ने इस आदेश पर रोक लगा दी.

सेना और एनसीपी ने आरोप लगाया कि उनके दो पार्षदों को वोट डालने से रोका गया, जिसके बाद बीजेपी अपने अध्यक्ष को चुनने में सफल रही. शिवसेना के मंत्री शंभूराज देसाई ने भी आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान सतारा में पुलिस ने उनके साथ धक्का-मुक्की की.

सोमवार को महाराष्ट्र विधानसभा में बोलते हुए शिंदे ने कहा, “देसाई ने जो घटना बताई, मैं उसका गवाह हूं. लोगों को वोट देने से रोकना लोकतंत्र की हत्या है. मंत्रियों को आरोपी की तरह ले जाया गया. केवल दो लोगों को ही वोट देने कैसे दिया गया? महाराष्ट्र के इतिहास में मैंने पहली बार ऐसा देखा है.”

शिंदे के आरोपों पर जवाब देते हुए फडणवीस ने कहा कि उपमुख्यमंत्री द्वारा बताए गए तथ्यों की जांच की जाएगी और उसके अनुसार कार्रवाई होगी.

सोमवार को विधानसभा के बाहर भी हंगामा हुआ, जब शिवसेना नेताओं ने पुलिस द्वारा पार्टी नेताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन किया. उन्होंने सतारा के एसपी तुषार दोशी की तुलना हिटलर से करते हुए पोस्टर भी लगाए.

शिवसेना के राज्यसभा सांसद मिलिंद देवड़ा ने एक्स पर लिखा कि सतारा से आई खबरें चिंताजनक हैं, जहां जिला परिषद चुनाव में चुने हुए पार्षदों को कथित तौर पर वोट देने से रोका गया. उन्होंने कहा कि एक पर्यटन मंत्री के साथ पुलिस द्वारा धक्का-मुक्की की खबर भी गंभीर है और यह संवैधानिक पद की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ है.

पिछले हफ्ते शिवसेना के संरक्षक मंत्री शंभूराज देसाई और एनसीपी के कैबिनेट मंत्री मकरंद पाटिल को अपने सदस्यों को सतारा जिला परिषद हॉल तक ले जाने के लिए पुलिस और प्रशासन से जूझना पड़ा. देसाई ने कहा कि इस धक्का-मुक्की में उन्हें चोट लगी, जबकि पाटिल को 20-25 पुलिसकर्मियों ने घेर लिया. उनका आरोप है कि इस अफरातफरी का फायदा उठाकर बीजेपी ने अपना अध्यक्ष चुन लिया.

सतारा जिला परिषद चुनाव में सेना और एनसीपी गठबंधन ने 65 में से 35 सीटें जीती थीं. बीजेपी 27 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही, लेकिन एक निर्दलीय उम्मीदवार के समर्थन से उसने अध्यक्ष पद जीत लिया. सेना और एनसीपी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनके सदस्यों को वोट देने से रोका.

देसाई ने कहा, “40 साल के राजनीतिक जीवन में मैंने पहली बार ऐसा देखा है. करीब 100 पुलिसकर्मियों ने मुझे रोका. जैसे आरोपी को घसीटते हैं, वैसे मेरे दोनों हाथ पकड़कर मुझे खींचा गया. अभी भी दर्द है और दवा ले रहा हूं. यह अभूतपूर्व है.”

इसके बाद विधान परिषद की उपसभापति नीलम गोरहे ने राज्य सरकार को सतारा के पुलिस अधीक्षक आईपीएस अधिकारी तुषार दोशी को निलंबित करने का निर्देश दिया.

मंत्री उदय सामंत ने कहा कि सरकार निर्देशों का पालन करेगी.

हालांकि, बीजेपी मंत्री जयकुमार गोरे ने निलंबन पर रोक लगाने की मांग की. उन्होंने कहा, “जमीनी हकीकत जाने बिना, पूरी जानकारी के बिना, सिर्फ सदन में चर्चा के आधार पर किसी आईपीएस अधिकारी को निलंबित करना नियमों के अनुसार नहीं है. इस पर रोक लगनी चाहिए.”

विधान परिषद के सभापति राम शिंदे ने निलंबन पर रोक लगाते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जाएगी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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