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Monday, 23 March, 2026
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दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय वित्त वर्ष 2025-26 में 5.31 लाख रुपये रहने का अनुमान: आर्थिक समीक्षा

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नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को विधानसभा में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की।

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, प्रति व्यक्ति आय मौजूदा कीमतों पर अग्रिम अनुमान के अनुसार, 2025-26 में 5,31,610 रुपये तक पहुंचने की संभावना है जो 2024-25 के मुकाबले 7.92 प्रतिशत की वृद्धि है।

समीक्षा के मुताबिक, 2025-26 के दौरान दिल्ली की प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से लगभग ढाई गुना अधिक रहने का अनुमान है। 2025-26 के लिए अनुमानित राजस्व अधिशेष 9,661.31 करोड़ रुपये है जो राज्य सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 0.73 प्रतिशत है।

मौजूदा कीमतों पर 2025-26 के दौरान दिल्ली का जीएसडीपी अग्रिम अनुमान के अनुसार 13,27,055 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है जो 2024-25 की तुलना में 9.42 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। इसमें कहा गया कि 2025-26 में दिल्ली सरकार का कर संग्रह सालाना आधार पर 15.54 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है।

वित्त वर्ष 2025-26 का बजट 1,00,000 करोड़ रुपये का था, जिसमें से 59,300 करोड़ रुपये दिल्ली सरकार की योजनाओं, कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं के लिए आवंटित किए गए हैं। यह राशि 2024-25 के बजट अनुमान में निर्धारित 39,000 करोड़ रुपये की तुलना में 20,300 करोड़ रुपये अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली ने लगातार राजस्व अधिशेष बनाए रखा है, हालांकि 2025-26 के बजट अनुमान में इसका राजकोषीय घाटा बढ़कर 13,703 करोड़ रुपये हो गया है। इसका मुख्य कारण पूंजीगत व्यय में 2024-25 की तुलना में दोगुनी से अधिक (145 प्रतिशत) की वृद्धि होना है।

पूंजीगत व्यय, जो 2024-25 (अस्थायी) में 11,485 करोड़ रुपये था, उसे बढ़ाकर 28,115 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

समीक्षा कहती है कि दिल्ली सरकार मुख्य रूप से अपने व्यय बजट का वित्तपोषण स्वयं के कर राजस्व के माध्यम से करती है, जो 2025-26 में व्यय बजट का 68.7 प्रतिशत था।

कुल कर राजस्व का 71.3 प्रतिशत हिस्सा माल एवं सेवा कर (जीएसटी) और मूल्य वर्धित कर (वैट) से आने की संभावना है। इसके बाद 13.1 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क, 10.2 प्रतिशत आबकारी और 5.4 प्रतिशत मोटर वाहन कर से प्राप्त होंगे।

अर्थव्यवस्था के ढांचे पर रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में सेवा क्षेत्र की प्रधानता है, जो 2025-26 के दौरान सकल राज्य मूल्य वर्धन (जीएसवीए) में लगभग 86.32 प्रतिशत का योगदान देता है। इसके बाद द्वितीयक क्षेत्र (12.88 प्रतिशत) और प्राथमिक क्षेत्र (0.80 प्रतिशत) का स्थान है।

भाषा सुमित अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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