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Wednesday, 18 March, 2026
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हरियाणा कांग्रेस ने 2 MLA के धरना देने के बाद RS चुनाव में क्रॉस वोट करने वालों के नाम उजागर किए

गोकुल सेतिया और मंजू चौधरी ने चंडीगढ़ में पार्टी दफ़्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि उनके नाम ग़लत तरीक़े से उन लोगों में शामिल किए जा रहे हैं, जिन्होंने क्रॉस-वोटिंग की है. हुड्डा ने दोनों विधायकों से मुलाक़ात की.

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गुरुग्राम: राज्यसभा उपचुनाव में कांग्रेस विधायकों की क्रॉस-वोटिंग का असर विपक्षी पार्टी में अभी भी दिख रहा है. हरियाणा के कम से कम दो विधायकों ने सार्वजनिक रूप से उन लोगों के नाम बताने की मांग की है, जिन्होंने पार्टी लाइन तोड़ी है.

सिरसा से कांग्रेस विधायक गोकुल सेतिया बुधवार को चंडीगढ़ में पार्टी दफ़्तर के गेट पर धरने पर बैठ गए. उनके साथ नांगल चौधरी की विधायक मंजू चौधरी भी शामिल हो गईं.

राज्यसभा चुनावों में, जिसमें कांग्रेस उम्मीदवार करतमवीर बौद्ध बड़ी मुश्किल से जीत पाए थे, कहा गया कि पांच कांग्रेस विधायकों ने एक निर्दलीय उम्मीदवार को वोट दिया था, और चार कांग्रेस वोट अमान्य घोषित कर दिए गए थे. हुड्डा ने मंगलवार को कहा था कि पांच लोगों ने पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ वोट दिया था.

पार्टी ने कहा था कि वह इन विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करेगी, हालांकि उसने उनकी पहचान ज़ाहिर नहीं की थी. दोनों विधायकों ने कहा कि इस चुप्पी की वजह से अफ़वाहों और अटकलों को जगह मिल गई, और उनके नाम भी इस विवाद में घसीटे गए.

जब ये दोनों विधायक धरने पर बैठे थे, तभी हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बी.के. हरिप्रसाद ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और उन चार विधायकों के नाम बताए, जिनके बारे में उन्होंने कहा कि उन्होंने क्रॉस-वोटिंग की थी—नारायणगढ़ से शैले चौधरी, पुन्हाना से मोहम्मद इलियास, हथीन से मोहम्मद इसराइल और सढौरा से रेनू बाला.

हरिप्रसाद ने कहा कि पार्टी की अनुशासन समिति के अध्यक्ष धर्मपाल मलिक को सूचित कर दिया गया है, और दिन में ही चारों को कारण बताओ नोटिस भेज दिए जाएंगे. पांचवें नाम का खुलासा नहीं किया गया, जिससे एक ऐसा अधूरा मामला रह गया, जिसके बारे में पार्टी ने कोई सफ़ाई नहीं दी.

खास बात यह है कि नामों की घोषणा से एक दिन पहले ही, शैले चौधरी के पति राम किशन गुर्जर ने कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पद और पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया था.

शिकायत

विरोध कर रहे दोनों विधायकों ने कहा कि सोशल मीडिया पर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से उनके नाम उन लोगों में शामिल करके फैलाए जा रहे हैं, जिनके वोट या तो रद्द हो गए थे या फिर निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में डाले गए थे. जब पार्टी नेतृत्व ने इस पर कुछ नहीं कहा, तो उनमें से कोई भी चुपचाप इस शक को बर्दाश्त करने को तैयार नहीं था.

उनकी मांग के दो हिस्से थे. पहला, कांग्रेस को उन विधायकों के नाम सार्वजनिक रूप से बताने चाहिए जिन्होंने क्रॉस-वोटिंग की. दूसरा, उसे उन लोगों की पहचान करनी चाहिए जिनके मतपत्र (बैलेट्स) अमान्य हो गए थे, और उन परिस्थितियों के बारे में बताना चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक निर्दोष विधायकों पर उस विश्वासघात का दाग लगा रहेगा जो उन्होंने किया ही नहीं.

सेतिया ने पूछा, “हमें उन लोगों में क्यों गिना जाए जिन्होंने पार्टी के साथ धोखा किया?”

सेतिया ने मंगलवार देर रात एक वीडियो जारी करके पार्टी नेतृत्व को चेतावनी दी—या तो उन पांच विधायकों के नाम सार्वजनिक रूप से बताएं जिन्होंने क्रॉस-वोटिंग की, या फिर बुधवार सुबह 9 बजे चंडीगढ़ में पार्टी कार्यालय के बाहर उन्हें विरोध प्रदर्शन करते हुए पाएं.

अपने वीडियो में, सेतिया ने कहा कि पांच वोट निर्दलीय उम्मीदवार को गए और तीन से चार मतपत्र अमान्य हो गए. वह चाहते थे कि पार्टी सबसे पहले रद्द हुए वोटों का हिसाब दे—कि वे किसने डाले और क्यों—और फिर उन पांच लोगों की पहचान करे जिन्होंने पूरी तरह से पार्टी की लाइन छोड़ दी.

उन्होंने कहा, “मैं सुबह नौ बजे सेक्टर 9 में पार्टी कार्यालय के गेट पर बैठूंगा. यह मेरे अस्तित्व का सवाल है,” उनके शब्दों में उस व्यक्ति की हताशा झलक रही थी जो जानता है कि उसके निर्वाचन क्षेत्र के लोग उससे ऐसे सवाल पूछ रहे हैं जिनका जवाब वह नहीं दे सकता.

उन्होंने बात को और आगे बढ़ाया. उन्होंने तर्क दिया कि 37 विधायकों के समूह में से पांच से सात विधायकों को हटाने से सरकार नहीं गिरेगी. लेकिन इससे एक संदेश ज़रूर जाएगा. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ, तो ये विधायक चुपचाप सत्ताधारी दल के साथ सौदे कर लेंगे, और पार्टी अपने क्षेत्रों में नया नेतृत्व खड़ा करने में असमर्थ हो जाएगी.

उन्होंने कहा, “इन लोगों को बाहर निकाल देना चाहिए.”

सेतिया के मामले में, एक और पेचीदगी भी है. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हाल ही में उनके घर आए थे. क्रॉस-वोटिंग के बाद बने राजनीतिक माहौल में, सिर्फ़ उस एक मुलाक़ात ने ही शक पैदा करने के लिए काफ़ी था. सेतिया ने साफ़ तौर पर कहा है कि वह सिर्फ़ एक सामाजिक शिष्टाचार था और उससे ज़्यादा कुछ नहीं.

“मुख्यमंत्री मेरे घर आए थे. मैं उनका सम्मान करता हूं और आगे भी करता रहूंगा. यह एक सामाजिक रिश्ता है; इसका मतलब यह नहीं कि मैं अपनी पार्टी के ख़िलाफ़ जाऊंगा.” उन्होंने कहा, “खट्टर साहब ने भी मुझसे बात की. लेकिन यह एक सामाजिक रिश्ता है; इसका मतलब यह नहीं है कि मैं अपनी पार्टी के खिलाफ जाऊं.”

यह धरना किसी लंबे प्रदर्शन में तब्दील नहीं हुआ. विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा पार्टी दफ्तर पहुंचे, दोनों विधायकों से मिले और उन्हें अपनी गाड़ी में बिठाकर अपने आवास ले गए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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