नई दिल्ली: सोमवार देर शाम काबुल के एक अस्पताल पर पाकिस्तान के एयरस्ट्राइक में कम से कम 400 लोगों की मौत हो गई और 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए. तालिबान सरकार ने उमर एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर पर हुए इस हमले को “मानवता के खिलाफ अपराध” बताया है और कहा कि यह आधुनिक अफगान इतिहास के सबसे खतरनाक हमलों में से एक हो सकता है.
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोमवार को बयान में कहा, “पाकिस्तानी सेना ने एक बार फिर अफगानिस्तान की हवाई सीमा का उल्लंघन किया और काबुल में ड्रग्स रिहैबिलिटेशन हॉस्पिटल को निशाना बनाया, जिससे इलाज करा रहे नशे के आदि मरीजों की मौत हुई और कईं घायल हुए. हम इस अपराध की कड़ी निंदा करते हैं और इसे सभी मान्य सिद्धांतों के खिलाफ और मानवता के खिलाफ अपराध मानते हैं.”
यह हमला अफगानिस्तान के समय के अनुसार रात करीब 9 बजे हुआ. काबुल में 2000 बेड वाले उमर एडिक्शन ट्रीटमेंट सेंटर को निशाना बनाया गया. इस हमले में अस्पताल का बड़ा हिस्सा तबाह हो गया. स्थानीय टीवी चैनलों पर फायर ब्रिगेड को आग बुझाने के लिए संघर्ष करते हुए दिखाया गया.
तालिबान के डिप्टी प्रवक्ता हमीदुल्लाह फितरत ने मंगलवार को बयान में कहा कि 400 लोग मारे गए और 250 से ज्यादा घायल हुए हैं. यह हमला इस मध्य एशियाई देश के इतिहास के सबसे घातक हमलों में से एक है.
अफगानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष रिपोर्टर रिचर्ड बेनेट ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि पाकिस्तान के हमलों से नागरिकों की मौत पर वह “बहुत दुखी” हैं. उन्होंने कहा, “मैं सभी पक्षों से तनाव कम करने, ज्यादा संयम बरतने और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करने की अपील करता हूं, जिसमें नागरिकों और अस्पताल जैसे स्थानों की सुरक्षा शामिल है.”
पाकिस्तान का यह ताज़ा एयरस्ट्राइक ऐसे समय में हुआ है जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच जारी संघर्ष तीसरे हफ्ते में पहुंच गया है और इसे अब तक का सबसे खतरनाक दौर बताया जा रहा है. हमले से कुछ घंटे पहले दोनों देशों ने डूरंड लाइन पर फायरिंग की बात मानी थी, जिसमें कम से कम 4 अफगान नागरिकों की मौत हो गई थी.
पाकिस्तान के सूचना और प्रसारण मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने इन आरोपों को खारिज किया कि नागरिक ढांचे को निशाना बनाया गया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सेना के ऑपरेशन ‘गज़ब लिल हक’ के तहत काबुल और नंगरहार में “आतंकवाद को समर्थन देने वाले अफगान तालिबान के सैन्य ठिकानों” पर हमला किया गया.
तरार ने कहा, “काबुल के दो स्थानों पर टेक्निकल सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और हथियारों के स्टोरेज को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया. हमले के बाद हुए धमाके साफ दिखाते हैं कि वहां बड़े पैमाने पर हथियार मौजूद थे.”
इस्लामाबाद ने यह भी कहा कि तालिबान दुनिया को गुमराह करने और क्षेत्र में आतंकवाद को समर्थन देने की अपनी “घिनौनी हरकतों” को छिपाने की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान ने तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) समेत कई आतंकी संगठनों को पनाह देने और समर्थन देने का आरोप लगाया है और काबुल से ऐसी गतिविधियां रोकने को कहा है.
सोमवार को हुए ये हमले उस समय भी हुए जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) का कार्यकाल 17 जून तक तीन महीने के लिए बढ़ा दिया. आमतौर पर इसका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ाया जाता है, लेकिन इस बार अमेरिका ने कम अवधि का समर्थन किया.
यूएनएससी के प्रस्ताव में तालिबान सरकार से आतंकवाद के खिलाफ प्रयास तेज़ करने को भी कहा गया. संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के डिप्टी स्थायी प्रतिनिधि उस्मान जादून ने दावा किया कि काबुल में इस समय टीटीपी, बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, ISIL-कुर्दिस्तान, अल-कायदा और ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट जैसे कई आतंकी संगठन मौजूद हैं.
तालिबान ने इन आरोपों को बार-बार खारिज किया है और कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक सुरक्षा समस्याओं को संभालने में नाकाम रहा है और इसका दोष दूसरे देशों पर डाल रहा है.
पाकिस्तान पिछले एक साल से अफगानिस्तान में लगातार हमले करता रहा है. इसकी शुरुआत दिसंबर 2024 के आखिर में एयरस्ट्राइक से हुई थी, जिसमें कई नागरिकों की मौत हुई थी.
पहले पाकिस्तान अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन करता था और 2021 में अमेरिका के साथ दो दशक लंबे युद्ध के बाद काबुल में तालिबान की वापसी में भी उसने मदद की थी. लेकिन अब दोनों देशों के रिश्ते काफी खराब हो चुके हैं.
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