मुंबई: शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र विधानसभा में पास हुए ‘महाराष्ट्र फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल 2026’ (धर्म स्वतंत्रता अधिनियम) का समर्थन किया है.
सोमवार को मीडिया से बात करते हुए ठाकरे ने कहा कि धर्म की स्वतंत्रता संविधान का अधिकार है, लेकिन जबरदस्ती, लालच या धोखे से धर्म परिवर्तन कराना गलत है और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
उन्होंने कहा, “मैंने धर्म परिवर्तन से जुड़ा यह बिल देखा है…अगर कोई धमकी देकर धर्म परिवर्तन करवाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए…हम इस बिल का समर्थन करते हैं.”
इससे पहले महाराष्ट्र सरकार ने विधानसभा में फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल 2026 का ड्राफ्ट पेश किया था, जिसमें सजा का भी प्रावधान रखा गया है.
गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने बिल पेश करते हुए कहा कि हाल के वर्षों में जबरन धर्म परिवर्तन के कई मामले सामने आए हैं, जो सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था को प्रभावित करते हैं.
वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि यह बिल किसी को धर्म बदलने से नहीं रोकता, बल्कि जबरदस्ती, धोखे या लालच देकर कराए गए धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए है.
उन्होंने विधानसभा में कहा, “यह कानून धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के लिए नहीं है, बल्कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए है जहां लोगों को धोखे, दबाव या लालच देकर धर्म बदलवाया जाता है. ऐसे धर्म परिवर्तन को अदालत इस कानून के तहत अमान्य मान सकती है.”
इस बिल का उद्देश्य जबरदस्ती, धोखे, दबाव, लालच या शादी के जरिए कराए गए धर्म परिवर्तन को रोकना है. साथ ही गलत जानकारी, प्रभाव या प्रलोभन देकर कराए गए धर्म परिवर्तन को भी रोकने का प्रावधान इसमें है.
इस बीच AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस बिल की कड़ी आलोचना की है. उन्होंने इसे “सबसे खराब कानूनों से भी खराब” बताते हुए निजता के अधिकार का उल्लंघन कहा.
एक्स पर पोस्ट करते हुए ओवैसी ने कहा कि यह कानून पहले से मौजूद ऐसे कानूनों से भी ज्यादा सख्त है और इससे असली (स्वेच्छा से) धर्म परिवर्तन भी अपराध बन सकता है.
उन्होंने कहा कि इससे अलग-अलग धर्मों के लोगों की शादी करना भी जोखिम भरा हो जाएगा और धर्म परिवर्तन के लिए पहले अनुमति लेना जरूरी हो सकता है.
ओवैसी ने यह भी आरोप लगाया कि इस कानून में ऐसे शब्द हैं जिनका गलत इस्तेमाल कर लोगों को मनमाने तरीके से गिरफ्तार किया जा सकता है.
