नई दिल्ली: भारत में इज़रायल के राजदूत रेवेन अज़र ने सोमवार को कहा कि उनका देश हमेशा के लिए युद्ध नहीं चाहता, लेकिन ईरान के साथ चल रहा संघर्ष कब खत्म होगा, यह अभी नहीं बताया जा सकता.
उन्होंने साफ कहा कि युद्ध तभी रुकेगा जब ईरान की पूरी सैन्य क्षमता खत्म हो जाए, या ईरान की नीतियों में बदलाव आए, या फिर जनता के विरोध से वहां सरकार बदल जाए.
पत्रकारों के एक समूह से अपने निवास पर बातचीत में उन्होंने कहा, “हम यह ठीक-ठीक नहीं बता सकते कि इसमें कितना समय लगेगा, क्योंकि यह कई बातों पर निर्भर करता है…शुरुआत में अमेरिका और इज़रायल दोनों ने कहा था कि इसमें कुछ हफ्ते लग सकते हैं. यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि ईरान अपनी दिशा बदलने का मौका लेता है या नहीं.”
उन्होंने कहा, “फिलहाल ऐसा नहीं लग रहा कि वे अपनी दिशा बदल रहे हैं. इसके उलट वे और ज्यादा सख्त रुख अपना रहे हैं और अपने फैसले पर डटे हुए हैं.”
राजदूत ने कहा कि आगे चलकर स्थिति बदल भी सकती है.
उन्होंने कहा, “हमें ईरान के फैसले लेने की प्रक्रिया के अंदर मतभेदों की अलग-अलग अफवाहें सुनने को मिल रही हैं. इसलिए इसमें ज्यादा समय भी लग सकता है…अगर ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग करने का फैसला करता है, तो इसका कूटनीतिक समाधान भी निकल सकता है.”
इस सवाल पर कि क्या इज़रायल और अमेरिका के सैनिक ईरान की जमीन पर जाएंगे, उन्होंने कहा, “न तो अमेरिका और न ही इज़रायल का ईरान पर हमला करने का इरादा है.”
उन्होंने कहा कि इज़रायल चाहता है कि ईरान के लोगों के पास ऐसी स्थिति हो, जिसमें वे सरकार की नीतियों या शासन में बदलाव के लिए दबाव बना सकें.
उन्होंने कहा, “हम देखेंगे कि ऐसा होता है या नहीं, लेकिन हमारा ध्यान इसी पर है. इससे न केवल ईरान के लोगों को फायदा होगा, बल्कि क्षेत्र में ज्यादा स्थिर भविष्य बनाने के हमारे लक्ष्य को भी मदद मिलेगी.”
उन्होंने कहा कि इससे खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के हित भी पूरे होंगे, क्योंकि इससे पश्चिम एशिया या मध्य पूर्व ज्यादा स्थिर बन सकेगा और उन खतरों से मुक्त होगा, जिन्हें ईरान बनाने की योजना बना रहा था या बना रहा था.
उन्होंने इज़रायल के प्रधानमंत्री की मौत की अफवाहों को भी खारिज किया और कहा कि कल कैफे में उनका जो वीडियो जारी हुआ था, वह असली है, एआई से बनाया हुआ नहीं है.
होर्मुज़ जलडमरूमध्य से अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भारत के ईरान से संपर्क करने पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हर देश अपने हित के अनुसार फैसला करता है.
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