नई दिल्ली: वरिष्ठ हिन्दी लेखिका ममता कालिया को उनके संस्मरण ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिए जाने की घोषणा पर राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक महेश्वरी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी है.
अशोक महेश्वरी ने कहा कि ममता कालिया का लेखन साधारण दिखने वाली जीवन की घटनाओं में छिपे गहरे अर्थों को सामने लाने की क्षमता रखता है. उनकी रचनाएं कई दशकों से पाठकों और हिन्दी साहित्य जगत को समृद्ध करती रही हैं. उन्होंने कहा कि ‘जीते जी इलाहाबाद’ के लिए साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिलना उनके लंबे और महत्वपूर्ण साहित्यिक योगदान का स्वाभाविक सम्मान है.
उन्होंने यह भी बताया कि ममता कालिया की कई महत्वपूर्ण कृतियां राजकमल प्रकाशन समूह से प्रकाशित हुई हैं और लेखक-प्रकाशक का यह संबंध लंबे समय से बना हुआ है. इस उपलब्धि को प्रकाशन समूह के लिए भी गर्व का विषय बताया गया.
‘जीते जी इलाहाबाद’ एक महत्वपूर्ण संस्मरण है, जिसमें इलाहाबाद के जीवंत साहित्यिक और सांस्कृतिक वातावरण की झलक मिलती है. किताब में विश्वविद्यालय, कॉफी-हाउस, साहित्यिक गोष्ठियों और लेखक-मित्रताओं के जरिए उस दौर की साहित्यिक दुनिया को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया गया है.
ममता कालिया का जन्म 2 नवम्बर 1940 को वृन्दावन में हुआ. कहानी, उपन्यास, नाटक, निबंध, कविता और पत्रकारिता सहित हिन्दी साहित्य की कई विधाओं में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार के अलावा व्यास सम्मान, साहित्य भूषण सम्मान, यशपाल स्मृति सम्मान और महादेवी स्मृति पुरस्कार जैसे कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं.
