नई दिल्ली: राज्यसभा में सोमवार को एलपीजी संकट को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और केंद्रीय मंत्री तथा सदन के नेता जे.पी. नड्डा के बीच तीखी बहस हुई.
खरगे ने केंद्र सरकार से पूछा कि उसने पहले से कदम क्यों नहीं उठाए. वहीं नड्डा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह संकट के समय “देश के शांतिप्रिय लोगों को भड़का रही है” और “अराजकता फैला रही है.”
राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान बोलते हुए खरगे ने पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़रायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण भारत में पैदा हुए एलपीजी संकट का मुद्दा उठाया.
खरगे ने सोमवार को कहा, “एलपीजी संकट की वजह से पूरे देश में हंगामा मचा हुआ है. इसका बहुत गंभीर असर गरीबों, कमजोर वर्ग, मध्य वर्ग, रेस्टोरेंट, हॉस्टल और कमर्शियल इस्तेमाल करने वालों पर पड़ रहा है.”
उन्होंने बताया कि भारत अपनी लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी ज़रूरतें आयात करता है और कुल आयात का करीब 90 प्रतिशत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से होकर आता है. इसलिए मौजूदा स्थिति घरेलू उपलब्धता और कीमतों की स्थिरता के लिहाज से चिंता की बात है.
खरगे ने कहा, “हमारे पेट्रोलियम मंत्री ने लोकसभा में कहा था कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है और अफवाहों पर ध्यान न देने की चेतावनी दी थी, लेकिन जमीन पर हालात सरकार के दावों को गलत साबित कर रहे हैं. जब सरकार ने ईरान में भारतीय नागरिकों को सलाह दी कि हालात और बिगड़ सकते हैं, तब उसे यह भी साफ करना चाहिए था कि इससे समुद्री रास्तों और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है.”
उन्होंने कहा कि सरकार को क्षेत्र में बढ़ते तनाव और एलपीजी आयात में संभावित बाधा के संकेत पहले ही मिल गए होंगे. अगर पहले से योजना बनाई जाती और वैकल्पिक व्यवस्था की जाती, तो यह स्थिति नहीं आती.
खरगे ने एलपीजी सिलेंडरों की बढ़ती कीमत और लंबी वेटिंग पर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा, “इससे सिलेंडर जमा करने और घबराहट में बुकिंग करने की स्थिति बन रही है. इससे कुछ अहम सवाल उठते हैं. अगर सरकार को पता था कि एलपीजी आयात संकट में आने वाला है, तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? विपक्ष को भरोसे में लेकर संयुक्त प्रतिक्रिया और जनता की चिंता कम करने की कोशिश क्यों नहीं की गई? सरकार कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?”
खरगे ने कहा कि इस संकट ने देश के प्रशासन की कमजोर स्थिति को उजागर किया है और भारत की विदेश नीति तथा ऊर्जा नीति की कमजोरी भी सामने आई है.
खरगे की टिप्पणी पर जवाब देते हुए नड्डा ने कहा, “मुझे दुख है कि हमारा विपक्ष, खासकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, संकट के समय भी राजनीति करने से पीछे नहीं हटता. इस संकट में भारत का कोई योगदान नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण यह संकट पैदा हुआ है.”
उन्होंने कहा, “एक कांग्रेस नेता सिलेंडर जमा करते हुए पकड़ा गया है. वे देश के शांतिप्रिय लोगों को भड़का रहे हैं…ऐसे संकट के समय देश के साथ खड़े होने के बजाय वे माहौल खराब करने और देश में अराजकता फैलाने की कोशिश करते हैं. यह निंदनीय है.”
नड्डा ने शून्यकाल के दौरान सदन के नियमों का भी ज़िक्र किया और कहा कि सदस्यों को तीन मिनट के अंदर अपनी बात खत्म करनी होती है.
वहीं केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि जब पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने इस संकट पर बयान दिया था, तब कांग्रेस ने उसे ध्यान से नहीं सुना.
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