scorecardresearch
Sunday, 15 March, 2026
होमदेशदिल्ली पुलिस ने 10 छात्रों को 'हिरासत' में लिया. हाई कोर्ट ने पूछा—किन 'परिस्थितियों और अधिकार' से

दिल्ली पुलिस ने 10 छात्रों को ‘हिरासत’ में लिया. हाई कोर्ट ने पूछा—किन ‘परिस्थितियों और अधिकार’ से

पुलिस का कहना है कि राजधानी से हिरासत में लिए गए 10 छात्र कार्यकर्ताओं को शनिवार रात रिहा कर दिया गया, लेकिन उनके वकीलों ने इस दावे को खारिज कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि एक कार्यकर्ता का कोई अता-पता नहीं है.

Text Size:

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने रविवार को एक मामले की सुनवाई की. यह मामला 10 छात्र कार्यकर्ताओं से जुड़ा है, जिन्हें कथित तौर पर दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया था.

यह सुनवाई तब हुई, जब लापता छात्रों के परिवारों ने शनिवार को अपने वकीलों के ज़रिए कोर्ट में कुल तीन हेबियस कॉर्पस याचिकाएं दायर कीं. इस मामले की पैरवी कर रहे वकीलों के मुताबिक, 10 छात्र कार्यकर्ताओं—शिव कुमार, मंजीत, इलाकिया, दृष्टि बैश्य, रुद्रबिक्रम रॉय, अविनाश सतपथी, गौरव कुमार अक्षय, एहतमाम और लक्षिता राजोरा—को इस हफ़्ते की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में ले लिया था.

रविवार को, जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की एक विशेष बेंच ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया. कोर्ट ने पुलिस से उन “हालातों और कानूनी अधिकार” का ब्योरा मांगा, जिनके तहत इन छात्रों को हिरासत में लिया गया था.

याचिकाओं को स्वीकार करते हुए, कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जहांगीरपुरी और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम मेट्रो स्टेशनों के पास, और दयाल सिंह कॉलेज में लगे CCTV कैमरों की फुटेज को सुरक्षित रखा जाए. इन्हीं जगहों से कथित तौर पर अलग-अलग दिनों में इन छात्रों को हिरासत में लिया गया था.

दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए वकील संजीव भंडारी ने कोर्ट को बताया कि सभी 10 छात्र कार्यकर्ताओं को पुलिस ने शनिवार रात को ही रिहा कर दिया था.

हालांकि, वकील जयदीप ढिल्लों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल रुद्रबिक्रम रॉय को अभी तक रिहा नहीं किया गया है और उनका कोई पता नहीं चल पा रहा है. वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस, शाहरुख आलम और दीक्षा द्विवेदी—जो बाकी दो याचिकाकर्ताओं की पैरवी कर रहे थे—ने कोर्ट से एक अतिरिक्त हलफनामा दायर करने की अनुमति मांगी. इस हलफनामे में वे अपने मुवक्किलों की हिरासत के दौरान की पूरी जानकारी दर्ज करना चाहते थे.

जस्टिस चावला ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा, “इन तीनों मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं. दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त स्थायी वकील श्री भंडारी ने इन नोटिसों को स्वीकार कर लिया है. हमें यह जानकारी दी गई है कि जिन लापता व्यक्तियों को पुलिस द्वारा गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने का आरोप था, उन्हें अब रिहा कर दिया गया है.”

जस्टिस चावला ने कहा, “प्रतिवादी (दिल्ली पुलिस) आज से एक हफ़्ते के भीतर एक हलफनामा दायर करे. इस हलफनामे में वे उन हालातों और कानूनी अधिकार का स्पष्टीकरण दें, जिनके तहत उन्होंने शुरू में इन छात्रों को हिरासत में लिया था.”

इस न्यायिक कार्यवाही का पूरा ब्योरा देने वाले आदेश की विस्तृत प्रति अभी तक सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई है.

इस मामले की अगली सुनवाई 27 मार्च को तय की गई है. दिप्रिंट ने टिप्पणी के लिए दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता से संपर्क किया है. प्रवक्ता का जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: भारत के पड़ोस में जनांदोलनों के बाद शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन लोकतंत्र की मजबूती की मिसाल है


 

share & View comments