एलुरु (आंध्र प्रदेश), 15 मार्च (भाषा) आंध्र प्रदेश में नवजात शिशुओं को बेचने का खुलासा होने के बाद पुलिस ने एलुरु जिले में बच्चों की तस्करी में शामिल गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि संदिग्ध शिशु पंजीकरण रिकॉर्ड के सत्यापन के बाद कथित तस्करी नेटवर्क की जांच शुरू की गई।
अनुमंडलीय पुलिस अधिकारी (एसडीपीओ) डी. श्रवण कुमार ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “जांच के दौरान शिशुओं की अवैध बिक्री से जुड़े दो मामले सामने आने के बाद, हमने एलुरु जिले में नवजात शिशु तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया।”
पुलिस के अनुसार, पहला मामला मुदिनेपल्ली मंडल के एक दंपति से संबंधित है, जिन्होंने कथित तौर पर कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) के कई प्रयास विफल होने के बाद एक दिसंबर, 2024 को करीब तीन लाख रुपये में एक नवजात बच्ची को खरीदा था।
इस मामले में छह लोगों को आरोपी के तौर पर चिह्नित किया गया। जिनमें माता-पिता व अन्य लोग शामिल हैं।
दंपति ने गर्भावस्था का नाटक किया और बिचौलियों के माध्यम से बच्ची खरीदकर उसे अपनी जैविक संतान बताने की कोशिश की, जिसके लिए फर्जी दस्तावेज भी तैयार किए गए।
पूछताछ के दौरान नवजात बच्चे को बेचने का एक और मामला सामने आया, जिसमें 29 सितंबर, 2024 को एलुरु के एक निजी अस्पताल में कथित तौर पर एक नर्स की मिलीभगत से एक नवजात शिशु को करीब 30,000 रुपये में बेचा गया था।
इस संबंध में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं।
इस बीच, एलुरु जिला बाल संरक्षण अधिकारी (डीसीपीओ) सी. सूर्या चक्रवेणी ने बताया कि बच्चों के जन्म रिकॉर्ड के सत्यापन के दौरान यह पाया गया कि 24 सितंबर को एक निजी अस्पताल में जन्मे शिशुओं से जुड़ी कुछ प्रविष्टियां संदिग्ध थीं।
चक्रवेणी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘ये घटनाएं नवजात शिशुओं की अवैध बिक्री में शामिल एक संगठित नेटवर्क की संभावना की ओर इशारा करती हैं। मामले में जांच शुरू कर दी गई है।’
चक्रवेणी ने बताया कि अब तक दो शिशुओं के बेच जाने की पुष्टि हुई है लेकिन पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस नेटवर्क से जुड़े ऐसे और भी मामले हैं।
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प्रचेता प्रशांत
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