नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच चार मार्च को कोच्चि पहुंचे एक ईरानी युद्धपोत के चालक दल के गैर जरूरी सदस्यों को भारत ने उनके देश वापस भेज दिया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि पोत ‘आइरिस लावन’ के कोच्चि में होने के कारण उसके चालक दल के 183 सदस्यों में से 50 से अधिक सदस्य वहीं रुके हुए हैं।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि युद्धपोत के गैर-जरूरी चालक दल के सदस्य, साथ ही कई फंसे हुए ईरानी नागरिकों को एक विशेष विमान से रवाना किया गया। उन्होंने बताया कि विमान की व्यवस्था ईरान ने की थी।
मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि नाविक ‘टर्किश एयरलाइन’ के विमान में सवार होकर भारत से रवाना हुए। यह विमान कल देर रात कोच्चि पहुंचा। विमान चार मार्च को श्रीलंका के तट के पास अमेरिका की एक पनडुब्बी द्वारा डुबोए गए एक अन्य युद्धपोत के 80 से अधिक ईरानी नाविकों के शव कोलंबो से लेकर यहां आया।
‘आइरिस लावन’ चार मार्च से कोच्चि में ही है। पोत में कोई तकनीकी दिक्कतें आने पर ईरानी पक्ष के अनुरोध के बाद एक मार्च को इसे आपातकाल स्थिति में लंगर डालने की अनुमति दी गई।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक आइरिस लावन के ईरानी नाविक आर्मेनिया की राजधानी येरेवन से सड़क मार्ग से ईरान पहुंचेंगे।
चालक दल के सदस्यों को ऐसे समय में वापस भेजा गया है जब भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के दोनों ओर इस समय मौजूद भारतीय ध्वज वाले 24 से अधिक वाणिज्यिक पोतों के सुरक्षित परिवहन को सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है।
जायसवाल ने प्रेस वार्ता में बताया, ‘‘पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण व्यापक स्तर पर उड़ानों के परिचालन में व्यवधान आयी है जिसकी वजह से कई ईरानी नागरिक भारत में फंस गए थे। ईरानी अधिकारियों ने इन फंसे हुए नागरिकों को वापस लाने के लिए एक विशेष उड़ान की व्यवस्था की, जिनमें पर्यटक के रूप में भारत घूमने आए ईरानी नागरिक भी शामिल थे।’’
उन्होंने बताया, ‘‘विमान ने कल रात कोच्चि से उड़ान भरी। यात्रियों में आइरिस लावन के गैर-जरूरी चालक दल के सदस्य भी शामिल थे, जो अब भी कोच्चि में लंगर डाले हुए है।’’
भाषा
धीरज पवनेश
पवनेश
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