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Saturday, 14 March, 2026
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भारत के लंबी कूद के एथलीट लोकेश ने नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता

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नयी दिल्ली, 14 मार्च (भाषा) भारत के युवा एथलीट लोकेश सत्यनाथन ने अर्कांसस के फेयेटविले में एनसीएए इंडोर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पुरुषों की लंबी कूद में नए राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीतकर अपने करियर में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।

उन्होंने 8.21 मीटर की छलांग लगाकर नया इंडोर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया। इससे वहां लंबी कूद के भारत के स्टार एथलीट जेस्विन एल्ड्रिन (8.42 मीटर) और मुरली श्रीशंकर (8.41 मीटर) के बाद सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं।

टार्लेटन स्टेट यूनिवर्सिटी की तरफ से खेल रहे लोकेश ने अपने चौथे प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके पहला स्थान हासिल किया।

लोकेश ने यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न मिसिसिपी के डी ऑन्ड्रे वार्ड को पीछे छोड़ा, जिन्होंने 8.20 मीटर की छलांग लगाकर दूसरा स्थान हासिल किया। कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी के ताफदज़वा चिकोम्बा 8.15 मीटर की छलांग लगाकर तीसरे स्थान पर रहे।

लोकेश ने बाद में कहा, ‘‘मैं ईश्वर का आभार व्यक्त करता हूं क्योंकि मैं जानता हूं कि उनके बिना कुछ भी संभव नहीं है। मैं निश्चित रूप से बेंगलुरु में रह रहे अपने परिवार और अपने कोच का भी आभार व्यक्त करता हूं जो यहां मेरे लिए परिवार की तरह हैं।’’

लोकेश इस तरह से मोहिंदर सिंह गिल, विकास गौड़ा और तेजस्विन शंकर के बाद एनसीएए डिवीजन आई इंडोर ट्रैक एंड फील्ड चैंपियनशिप जीतने वाले चौथे भारतीय बन गए हैं।

भारतीय एथलीट ने एनसीएए आउटडोर की आयु आयु वर्ग की प्रतियोगिता में पांचवा स्थान हासिल किया था।

लोकेश ने 8.17 मीटर छलांग लगाकर अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी किया। इससे पहले उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 8.02 मीटर था। उनके नाम पर कई जूनियर राष्ट्रीय खिताब दर्ज हैं। उन्होंने 2018 में विश्व एथलेटिक्स अंडर-20 चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे को हमेशा मुझ पर भरोसा करते हैं चाहे कुछ भी हो जाए। मैं अपनी टीम के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त करता हूं क्योंकि हम एक परिवार की तरह हैं और हर दिन कड़ी मेहनत करते हैं और एक दूसरे को प्रेरित करते हैं।’’

लोकेश की मां का 2021 में कोविड-19 संक्रमण से जूझने के बाद निधन हो गया था।

उन्होंने कहा, ‘‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। मुझे पता नहीं था कि ऐसा होने वाला है। यह कोविड की दूसरी लहर के दौरान हुआ। मैंने तभी यहां आने का फैसला किया था। मेरी मां ने मुझे यहां आने के लिए प्रेरित किया था। मां ने तब कहा था ‘जाओ अपने सपनों को पूरा करो और मुझे दिखाओ कि तुम क्या कर सकते हो।’ यह बहुत दिल तोड़ने वाला था। अगर मेरी मां यही चाहती हैं तो मैं इसे पूरा करूंगा।’’

भाषा

पंत नमिता

नमिता

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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