नई दिल्ली: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश के कई राज्यों में लापता लोगों के बढ़ते मामलों और उन्हें ढूंढने की कम दर को लेकर मीडिया रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लिया है.
आयोग ने बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर दो हफ्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.
रिपोर्टों के अनुसार, बिहार में 2013 से हर साल लगभग 12,000 से 14,000 तक लापता व्यक्तियों के मामले दर्ज हो रहे हैं, जिनमें से कई मामले बच्चों से जुड़े हैं. हालांकि, लापता बच्चों में से केवल लगभग दो-तिहाई को ही खोजा जा सका है, जिससे उनकी सुरक्षा और संभावित शोषण को लेकर चिंता बढ़ गई है.
एनएचआरसी ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का भी संज्ञान लिया है. इन आंकड़ों के अनुसार मानव तस्करी के सबसे अधिक मामले ओडिशा, बिहार, तेलंगाना और महाराष्ट्र में दर्ज किए गए हैं. नाबालिग लड़कों की तस्करी के मामलों में ओडिशा सबसे ऊपर है, उसके बाद बिहार का स्थान है, जबकि नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामलों में राजस्थान सबसे आगे है.
आयोग ने 9 मार्च को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कई लापता बच्चों के बारे में आशंका है कि उन्हें भीख मंगवाने, बाल श्रम, वेश्यावृत्ति और अन्य अवैध गतिविधियों में जबरन लगाया जा सकता है.
आयोग ने कहा कि अगर रिपोर्ट में कही गई बातें सही हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है. आयोग ने यह भी कहा कि राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों के बावजूद लापता लोगों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है, जबकि बहुत कम लोगों का ही पता चल पा रहा है.
इसी कारण एनएचआरसी ने संबंधित राज्यों से दो हफ्तों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है, जिसमें यह बताया जाए कि लापता लोगों, खासकर बच्चों, की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं या उठाए जाने की योजना है.
इसके अलावा आयोग ने एनसीआरबी से भी इन पांचों राज्यों में लापता लोगों की स्थिति से जुड़े ताज़ा आंकड़े उसी समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराने को कहा है.
