scorecardresearch
Tuesday, 10 March, 2026
होमरिपोर्टउत्तराखंड विधानसभा में सीएम धामी ने दिवंगत विधायक दिवाकर भट्ट को दी श्रद्धांजलि

उत्तराखंड विधानसभा में सीएम धामी ने दिवंगत विधायक दिवाकर भट्ट को दी श्रद्धांजलि

सीएम ने कहा,‘फील्ड मार्शल’ के नाम से मशहूर थे भट्ट, उनका जीवन सेवा और समर्पण की प्रेरणा.

Text Size:

गैरसैंण, चमोली (उत्तराखंड): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को विधानसभा में देवप्रयाग के दिवंगत विधायक दिवाकर भटट् को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने कहा कि उनका दृढ़ व्यक्तित्व और निडर नेतृत्व उत्तराखंड के सार्वजनिक राजनीतिक जीवन की पहचान था.

मुख्यमंत्री ने कहा कि साधारण परिवार में जन्म लेने के बावजूद दिवाकर भट्ट ने अपने विचारों, संघर्ष और नेतृत्व के दम पर राज्य की राजनीति में खास पहचान बनाई.

उन्होंने कहा, “उत्तराखंड की राजनीति में भट्ट को ‘फील्ड मार्शल’ के नाम से जाना जाता था, जो उनके मजबूत और दृढ़ नेतृत्व को दर्शाता है.”

धामी ने कहा कि दिवंगत भट्ट का जीवन यह सिखाता है कि राजनीति केवल सत्ता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का रास्ता भी है.

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिवाकर भट्ट का जन्म 1946 में टिहरी जिले के बड़ियारगढ़ क्षेत्र के सुपार गांव में हुआ था. उन्होंने बहुत कम उम्र में ही जन आंदोलनों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया था और 19 साल की उम्र तक लोगों के मुद्दों को उठाने लगे थे.

उत्तराखंड राज्य आंदोलन के कठिन दौर में वे अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे और आंदोलन को नई ऊर्जा और दिशा देने का काम किया.

मुख्यमंत्री ने बताया कि 1995 के श्रीयात्रा टापू आंदोलन और खेत पर्वत पर उनका अनशन राज्य आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण घटनाओं में गिना जाता है.

शुरुआत में ट्रेड यूनियन गतिविधियों से जुड़े भट्ट ने उत्तराखंड आंदोलन को मजबूत करने के लिए BHEL की नौकरी छोड़ दी और पहाड़ की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई.

मुख्यमंत्री ने कहा, “दिवाकर भट्ट ने ‘घेरा डालो–डेरा डालो’ जैसे प्रभावशाली नारों के जरिए जन आंदोलन में नई ऊर्जा भर दी. यह नारा केवल एक आह्वान नहीं रहा, बल्कि जन दबाव बनाने की एक प्रभावी रणनीति बन गया, जिसने युवाओं और आम लोगों को जोड़ने का काम किया.”

उन्होंने बताया कि भट्ट का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ. 1983 में वे कीर्तिनगर के ब्लॉक प्रमुख चुने गए और लगभग एक दशक तक इस पद पर रहकर जनसेवा की. बाद में वे जिला पंचायत सदस्य भी बने और लगातार जनहित के मुद्दे उठाते रहे.

share & View comments