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Wednesday, 11 March, 2026
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बालेंद्र शाह की लहर नेपाल में लोकतंत्र की दूसरी वापसी का संकेत

जेन ज़ी आंदोलन एक मजबूत लहर था, जिसे आरएसपी और बालेन ने मिलकर पकड़ा—यह मुद्दों पर आधारित राजनीति की अहमियत दिखाने वाला पहला बड़ा पड़ाव है.

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बालेंद्र शाह की लहर ने नेपाल के पांचवें आम चुनाव को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है और नई पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) को ऐतिहासिक जीत दिलाई है.

नेपाल के 17 साल के लोकतांत्रिक इतिहास में पहले कभी किसी पार्टी को इतना बड़ा जनादेश नहीं मिला—यहां तक कि माओवादियों को भी नहीं, जिन्होंने राजशाही के खिलाफ दस साल लंबा संघर्ष किया था और 2008 में लोकतंत्र की नींव रखने में मदद की थी.

आरएसपी ने निचले सदन की 275 में से कुल 183 सीटें जीती हैं—125 सीटें फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट प्रणाली से और 58 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व के जरिए.

275 सदस्यीय निचले सदन में बहुमत के लिए 138 सीटें चाहिए होती हैं और दो-तिहाई बहुमत के लिए 184 सीटें. आरएसपी शायद दूसरे आंकड़े के भी बहुत करीब पहुंच गई है. अब तक नेपाल के चुनावों में साफ तौर पर क्षेत्रीय और जातीय विभाजन दिखाई देता था. वोटर अक्सर पहाड़ी (पहाड़) बनाम मधेश (मैदानी इलाकों) के आधार पर वोट करते थे.

यह शायद पहला चुनाव है जिसमें इन विभाजनों से ज्यादा मुद्दे महत्वपूर्ण दिखाई दिए.

यह भी पहली बार होगा जब बालेंद्र शाह जैसे व्यक्ति, जिनकी जड़ें मधेशी और मैथिली समाज से जुड़ी हैं—प्रधानमंत्री बनेंगे. नेपाल में पहले मैदान क्षेत्रों से कुछ उपप्रधानमंत्री रहे हैं, लेकिन शाह जैसे नेता कभी शीर्ष पद पर नहीं पहुंचे. इसलिए यह चुनाव कई मायनों में पहली बार वाला चुनाव बन गया है. इस चुनाव के नतीजों से कई बड़े पड़ाव सामने आए हैं.

बड़े पड़ाव

नेपाल की राजनीति पर नज़र रखने वालों के लिए बालेन एक गंभीर नेता थे, जो देश के सबसे बड़े पद की दौड़ में उतरे थे. जेन ज़ी आंदोलन और उसके एजेंडे के सहारे उन्होंने उस पार्टी को इतना बड़ा बहुमत दिलाया, जिसमें वे चुनाव से सिर्फ दो महीने पहले शामिल हुए थे. हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान अधिकतर पर्यवेक्षकों को लगता था कि पारंपरिक पार्टियां, जैसे नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी—फिर से गठबंधन बनाकर सरकार बनाएंगी, जैसा पहले होता रहा है.

लेकिन हुआ इसका बिल्कुल उल्टा.

आरएसपी के पास अपने दम पर लगभग दो-तिहाई बहुमत हो सकता है और पारंपरिक पार्टियों की सीटें इतनी कम रह गई हैं कि उन्हें संसद में एकजुट होकर खड़ा होना पड़ेगा. इसके अलावा चुनावी गणित से अलग, आरएसपी और बालेन शाह नेपाल की राजनीति में सिर्फ तीन साल पुराने थे और उनके पास पारंपरिक पार्टी संगठन भी नहीं था—फिर भी उन्होंने सभी अनुमान गलत साबित कर दिए.

चुनाव से पहले आरएसपी की तुलना बांग्लादेश की नेशनल सिटिज़न्स पार्टी से भी की जा रही थी. दोनों पार्टियों में युवा नेतृत्व था और दोनों पुराने राजनीतिक नेतृत्व से नाराज़ थे—बांग्लादेश में शेख हसीना और नेपाल में केपी शर्मा ओली से. कई लोगों को लगता था कि जैसे बांग्लादेश में नई पार्टी अपनी गलतियों और महत्वाकांक्षाओं के कारण असफल हुई, वैसे ही आरएसपी भी असफल हो सकती है, लेकिन आम धारणा के उलट बालेन ने न केवल देश की भावना को अपने साथ जोड़ा बल्कि बड़े नेताओं के खिलाफ मजबूत चुनौती भी पेश की.

उन्होंने केपी शर्मा ओली को झापा-05 सीट पर लगभग 50,000 वोटों से हरा दिया. यह दिखाता है कि जेन ज़ी आंदोलन सच में एक मजबूत लहर था, जिसे आरएसपी और बालेन ने मिलकर पकड़ लिया. यह मुद्दों पर आधारित राजनीति की अहमियत दिखाने वाला पहला बड़ा पड़ाव है.

दूसरा, बालेन की यह लहर गठबंधन सरकार और राजनीतिक अस्थिरता के लंबे दौर को खत्म करती दिखती है. नेपाल की राजनीतिक इतिहास में यह चुनाव लोकतंत्र के लिए एक बड़ा अवसर माना जाएगा. इससे अलग-अलग गठबंधन पार्टियों के बीच सत्ता की खींचतान खत्म होगी और मजबूरी में बनने वाले गठबंधन का दौर भी खत्म हो सकता है. ऐसी अस्थिरता के कारण कई बड़े फैसले अक्सर धीमे पड़ जाते थे—जैसे संविधान बनाना, राष्ट्रीय सुरक्षा नीति तैयार करना, विदेश नीति की दिशा तय करना, सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कानून पास करना या देश का आर्थिक विकास करना. अब पहली बार संसद में ऐसी सरकार होगी जिसके पास स्पष्ट बहुमत होगा और जो तेजी से बदलाव ला सकेगी.

तीसरा, इस चुनाव के नतीजों ने नेपाल में लोकतंत्र की “दूसरी वापसी” भी दिखाई है, खासकर बहुदलीय व्यवस्था में. जब नेपाल 2008 में पूरी तरह लोकतांत्रिक देश बना और राजशाही खत्म हुई, तब भी ज्यादातर पार्टियां उसी दौर की थीं जब राजा सत्ता में था. फर्क सिर्फ इतना हुआ कि पहले देश के फैसले राजा लेते थे, और बाद में वही सत्ता राजनीतिक पार्टियों के हाथ में चली गई, लेकिन 17 साल तक देश राजनीतिक अस्थिरता से जूझता रहा—कोई भी प्रधानमंत्री या गठबंधन पाँच साल तक टिक नहीं पाया.

अब यह अस्थिरता खत्म हो सकती है, जब तक कि बालेंद्र शाह और आरएसपी के शीर्ष नेता, जैसे पार्टी संयोजक रबी लमिछाने, आपस में मतभेद के कारण अलग होने का फैसला न करें.

चुनौतियां

इन उपलब्धियों के साथ नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी—लोगों से किए गए वादों को पूरा करना.

चार साल पुरानी पार्टी और काठमांडू के मेयर के रूप में सिर्फ चार साल का अनुभव रखने वाले नेता के लिए रोजगार, सुशासन, सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, विदेश में रहने वाले नेपाली नागरिकों की सुरक्षा—खासकर पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच और शिक्षा सुधार जैसे मुद्दों पर काम करना आसान नहीं होगा. अगर पारंपरिक पार्टियों के पास इन मुद्दों पर काम करने के लिए 17 साल थे, तो आरएसपी को मिले जनादेश के लिए बहुत तेज़ काम करना होगा.

जिस युवा वर्ग ने पार्टी को इतना बड़ा समर्थन दिया है, वही सड़कों पर सबसे मजबूत विपक्ष भी बन सकता है. संसद में विपक्ष कमजोर रहेगा, लेकिन युवाओं में धैर्य कम होगा. दूसरी तरफ नेपाल की राजनीति अब लोकलुभावन शासन शैली को भी देख सकती है. सैद्धांतिक रूप से लोकलुभावन नेता अक्सर नियमों को मोड़ते हैं, कानून की नई व्याख्या करते हैं, संसद में विपक्ष की अनदेखी करते हैं और अपने हर फैसले को सही ठहराने के लिए सीधे जनता से संपर्क करते हैं.

अगर बालेन के मेयर के तौर पर रिकॉर्ड को देखें, तो उन पर आरोप लगे कि वे कई मामलों में बहुत आक्रामक और टकराव वाले रहे—जैसे फुटपाथ खाली कराना या शहर में अवैध ठेलों-खोमचों की समस्या से निपटना, लेकिन अब नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे जल्दबाजी के बजाय धैर्य से काम लें.

अंत में, नेपाल के लोगों को बधाई दी जानी चाहिए कि उन्होंने अलग-अलग राजनीतिक व्यवस्थाओं के दौर से गुजरते हुए खुद को बदला है—1950 के दशक की पूर्ण राजशाही से लेकर 1960 के दशक की बिना पार्टी वाली पंचायत व्यवस्था तक, फिर 1990 के दशक की संवैधानिक राजशाही और अंत में 2008 का लोकतंत्र. जेन ज़ी आंदोलन और 2026 के चुनाव के नतीजों को नेपाल के लोकतांत्रिक विकास की दूसरी वापसी के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसने पुराने नेतृत्व को पीछे छोड़कर नई उम्मीदों और नई पीढ़ी पर भरोसा दिखाया है.

ऋषि गुप्ता ग्लोबल अफेयर्स पर कॉमेंटेटर हैं. व्यक्त किए गए विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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