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Monday, 9 March, 2026
होमविदेशपिछले हफ्ते हुई एक गुप्त यात्रा ने दिल्ली-ढाका रिश्तों में सुधार की नींव रखी

पिछले हफ्ते हुई एक गुप्त यात्रा ने दिल्ली-ढाका रिश्तों में सुधार की नींव रखी

तारीक रहमान के सत्ता संभालने के कुछ ही हफ्तों में ढाका के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने दिल्ली में R&AW प्रमुख और भारत के डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इंटेलिजेंस से बातचीत की.

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नई दिल्ली: ढाका में नई सरकार के सत्ता संभालने के कुछ ही हफ्तों के भीतर बांग्लादेश की सैन्य खुफिया एजेंसी के प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद कैसर राशिद चौधरी ने नई दिल्ली का दौरा किया और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (R&AW) के प्रमुख पराग जैन तथा अन्य अधिकारियों से मुलाकात की. इनमें भारत के उनके समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल आर.एस. रमण भी शामिल थे. यह दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है.

गुप्त रखी गई इस यात्रा के दौरान बांग्लादेश के डायरेक्टर जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (DGFI) मेजर जनरल चौधरी ने जैन और लेफ्टिनेंट जनरल रमण से मुलाकात की. अगस्त 2024 में बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद यह पहली ऐसी मुलाकात थी.

मामले से परिचित लोगों ने बताया कि मेजर जनरल चौधरी ने दोनों अधिकारियों से मुलाकात की और इस बात पर समझ बनी कि किसी भी देश की जमीन का इस्तेमाल ऐसे लोगों द्वारा नहीं होने दिया जाएगा जिनके हित दूसरे देश के खिलाफ हों. इसके अलावा दोनों देशों के बीच 18 महीने से बंद पड़े संवाद के रास्तों को फिर से खोलने पर भी सहमति बनी.

बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री तारीक रहमान ने 17 फरवरी को शपथ ली थी. इसके बाद ढाका से नई दिल्ली की यह पहली महत्वपूर्ण यात्रा मानी जा रही है. चौधरी को 23 फरवरी को DGFI बनाया गया था. यह नियुक्ति रहमान द्वारा बांग्लादेश की सेना के शीर्ष पदों में किए गए फेरबदल का हिस्सा थी.

शेख हसीना सरकार के हटने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच कई संचार चैनल बंद हो गए थे. उस दौरान दोनों देशों के बीच बातचीत ज्यादातर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) के कार्यालयों के जरिए ही होती थी, जब तक कि रहमान ने पद नहीं संभाल लिया.

बांग्लादेश के पूर्व एनएसए खलीलुर रहमान अब भी तारीक रहमान की कैबिनेट में विदेश मंत्री के रूप में बने हुए हैं. इसे नए प्रधानमंत्री के नेतृत्व में विदेश नीति में निरंतरता का संकेत माना जा रहा है. खलीलुर रहमान और भारत के एनएसए अजीत डोभाल पिछले पूरे साल संपर्क में रहे, जबकि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान नई दिल्ली और ढाका के राजनीतिक और आर्थिक रिश्ते कमजोर हो गए थे.

मेजर जनरल चौधरी की भारत यात्रा, जो आधिकारिक तौर पर “चिकित्सा कारणों” से बताई गई, ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब नई दिल्ली को यह चिंता है कि बांग्लादेश में हिंसा बढ़ने से पूर्वोत्तर राज्यों की शांति और स्थिरता पर असर पड़ सकता है.

पिछले कुछ महीनों में भारत ने यह संकेत दिया है कि वह तारीक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के साथ काम करने और रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए तैयार है.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 31 दिसंबर 2025 को ढाका में तारीक रहमान से मुलाकात की थी. यह मुलाकात करीब आधे घंटे चली थी. इस दौरान उन्होंने नई दिल्ली की ओर से रहमान की मां और बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के निधन पर संवेदना पत्र भी सौंपा था.

नई दिल्ली ने पिछले महीने रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और विदेश सचिव विक्रम मिस्री को भी भेजा था. इसे भी दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिश के रूप में देखा गया, जो यूनुस की अंतरिम सरकार के दौरान कमजोर हो गए थे.

हालांकि भारत और बांग्लादेश के बीच अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं, जिनमें ढाका की घरेलू स्थिति भी शामिल है. भारत में अभी भी शेख हसीना मौजूद हैं, जिन्हें जून से अगस्त 2024 के बीच छात्र आंदोलन को दबाने के लिए उनकी सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के मामले में बांग्लादेश की अदालत ने अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई है.

हालांकि, बीएनपी के वरिष्ठ नेता और स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने द हिंदू से कहा कि भारत और बांग्लादेश के रिश्ते शेख हसीना के भविष्य के कारण “बंधक” नहीं बनाए जाएंगे.

1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल संधि, जिसकी अवधि दिसंबर 2026 में खत्म होने वाली है, दोनों देशों के लिए एक अहम मुद्दा है. इसके अलावा पिछले एक साल में दोनों देशों द्वारा लगाए गए कई आर्थिक प्रतिबंध भी अब तक बने हुए हैं.

बांग्लादेश जल्द ही भारत से कूटनीतिक स्तर पर संपर्क कर दो लोगों—फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन, को वापस भेजने की मांग करेगा. इन दोनों पर दिसंबर 2025 में राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या का आरोप है. इन दोनों को रविवार को पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने गिरफ्तार किया था.

हादी की मौत के बाद पिछले साल के अंत में बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिनमें प्रदर्शनकारियों का गुस्सा भारत पर भी देखा गया था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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