पटना: बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने और गन्ना उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से गन्ना उद्योग विभाग की ओर से दो दिवसीय गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम सोमवार को पटना के ज्ञान भवन में शुरू हुआ.
कार्यक्रम का उद्घाटन उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा, उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने दीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम की अध्यक्षता गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने की.
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए जल्द ही इंसेंटिव पॉलिसी 2026 लाई जाएगी. उन्होंने कहा कि जो लोग रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाते हैं, उन्हें चिन्हित कर अगले पांच वर्षों में बिहार में ही रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार काम कर रही है.
उन्होंने कहा कि कभी बिहार गन्ना और चीनी उत्पादन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल था, लेकिन समय के साथ यह क्षेत्र पीछे चला गया. अब सरकार बंद पड़ी चीनी मिलों को चालू करने और नई मिलें लगाने की दिशा में काम कर रही है. वर्तमान में राज्य में 10 चीनी मिलें चालू हैं.
सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने चुनावी सभा के दौरान बिहार में 25 नई चीनी मिलें लगाने की घोषणा की थी, जिसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में जमीन पर उतारा जा रहा है. उन्होंने किसानों और वैज्ञानिकों से नई तकनीक के साथ पारंपरिक खेती के तरीकों को भी अपनाने की अपील की.
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आजादी के समय बिहार गन्ना उत्पादन के क्षेत्र में काफी आगे था, लेकिन कुछ नकारात्मक कारणों से यह क्षेत्र पिछड़ गया. उन्होंने कहा कि डबल इंजन की सरकार राज्य के विकास को गति देने में लगी हुई है और बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से चालू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि पहले राज्य में 16 चीनी मिलें थीं, जिनमें से कई बंद हो गई थीं, लेकिन अब 10 मिलें फिर से संचालित हो रही हैं. गन्ना किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनमें पांच एकड़ तक मुफ्त बीज और अनुदान पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराना शामिल है.
उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि बिहार का इतिहास गवाह है कि राज्य कभी चीनी उत्पादन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल था. उन्होंने कहा कि गन्ने की खेती के लिए बिहार की भूमि बेहद उपयुक्त है और राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन योजना और नई एथनॉल नीति लागू की गई है.
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने कहा कि किसानों के हित में गन्ने का मूल्य बढ़ाया गया है और गन्ना उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं. उन्होंने बताया कि राज्य में 66 हजार एकड़ जमीन को जलजमाव से मुक्त कराने के लिए भी काम किया जा रहा है.
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करना और 25 नई चीनी मिलें स्थापित करना है. उन्होंने कहा कि गन्ना उद्योग के विकास से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और किसानों की आय बढ़ेगी.
कार्यक्रम में गन्ना उद्योग विभाग के अपर सचिव के. सेंथिल कुमार ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि ईख आयुक्त अनिल कुमार झा ने धन्यवाद ज्ञापित किया. सेमिनार के पहले दिन लगभग 700 किसान और 100 वैज्ञानिक शामिल हुए. इसके अलावा देश के कई प्रमुख कृषि वैज्ञानिक, संस्थानों के प्रतिनिधि और चीनी मिलों के अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे.
