नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसिएशन (JNUTA) ने गुरुवार को एक पॉडकास्ट में की गई कथित टिप्पणियों को लेकर कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित को पद से हटाने की मांग की. एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि उनकी बातों में जातिगत संकेत थे और उन्होंने UGC के नियमों को खारिज किया.
JNUTA ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर इस मामले पर केंद्र सरकार और मंत्रालय का रुख स्पष्ट करने को कहा. साथ ही उन छात्रों की हिरासत पर भी सवाल उठाए, जिन्हें इन टिप्पणियों के खिलाफ विरोध मार्च के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था.
टीचर्स एसोसिएशन ने कुलपति की कथित राजनीतिक नजदीकियों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने अपनी नियुक्ति का कारण केंद्र सरकार से जुड़ाव को बताया था. JNUTA का कहना है कि छात्रों पर कार्रवाई तो हुई, लेकिन कुलपति के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया, जिससे सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े होते हैं.
एसोसिएशन ने कहा कि इस मामले में सरकार की चुप्पी से यह संदेश जा रहा है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को लेकर सरकार गंभीर नहीं है. JNUTA ने कुलपति के “कुप्रशासन” के कई उदाहरण गिनाते हुए उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग की.
एसोसिएशन ने यह भी बताया कि 2025 में भी तीन बार कुलपति को हटाने की मांग की जा चुकी है. इसके अलावा, आरक्षित पदों पर फैकल्टी नियुक्तियों को रोकने के लिए “None Found Suitable (NFS)” प्रावधान के कथित दुरुपयोग, पदोन्नति में भेदभाव और विश्वविद्यालय में महिलाओं तथा SC-ST छात्रों की घटती संख्या पर भी चिंता जताई गई.
JNUTA ने कहा कि JNU हमेशा से अकादमिक उत्कृष्टता और सामाजिक समानता के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन कुलपति की टिप्पणियों और फैसलों से विश्वविद्यालय की छवि प्रभावित हो रही है.
एसोसिएशन ने शिक्षा मंत्रालय से इस मामले में जल्द और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.
