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Thursday, 5 March, 2026
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कांग्रेस चाहती है कि भारत आंख मूंदकर ईरान का समर्थन करे: भाजपा

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नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि देश की विदेश नीति राष्ट्रहित और नागरिकों की सुरक्षा के आधार पर तय होनी चाहिए, न कि विपक्षी पार्टी की ‘‘पुरातन सोच’’ की मजबूरियों से।

अमित मालवीय और प्रदीप भंडारी समेत कई भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर बात की और कांग्रेस को ‘‘भारत विरोधी’’ बताते हुए आरोप लगाया कि मुख्य विपक्षी पार्टी बांटने वाली राजनीति करती है। सत्ताधारी पार्टी ने कहा कि विपक्ष को सिर्फ अपने वोट बैंक से प्यार है, देश और लोगों से नहीं।

मालवीय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यहां तक ​​कि चीन, जिसने सालों तक ईरान को कूटनीतिक तरीके से बचाया, छद्म आतंकी समूहों को उसकी ओर से मिलने वाले समर्थन को नजरअंदाज किया और उसका अधिकतर तेल खरीदा, वह भी अब तेहरान से दूरी बना रहा है।’’

भाजपा के आईटी विभाग के प्रमुख ने कहा, ‘‘फिर भी कांग्रेस चाहती है कि भारत आंख बंद करके ईरान का साथ दे, जबकि वह खाड़ी में अंधाधुंध गतिविधियां चलाता रहता है, जरूरी तेल आपूर्ति मार्गों को खतरा पहुंचाता है, और उस इलाके में तनाव बढ़ाता है जहां लाखों भारतीय रहते और काम करते हैं।’’

मालवीय ने कहा कि भारत की विदेश नीति ‘‘देश के हित और अपने नागरिकों की सुरक्षा से निर्देशित होनी चाहिए, न कि कांग्रेस की पुरानी पड़ चुकी सोच की मजबूरियों से।’’

श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी के एक ईरानी युद्धपोत को टॉरपीडो मारकर डुबोने के एक दिन बाद, कांग्रेस ने कहा कि यह चौंकाने वाला है कि मोदी सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। कांग्रेस ने दावा किया कि भारत सरकार पहले कभी इतनी ‘डरपोक और डरी हुई’ नहीं दिखी।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम एशिया का झगड़ा भारत की दहलीज तक पहुंच गया है लेकिन प्रधानमंत्री ने कुछ नहीं कहा।

विपक्ष के नेता ने कहा कि देश को नेतृत्व के लिए एक मजबूत हाथ की जरूरत थी, लेकिन उसके पास एक ‘‘समझौता करने वाला प्रधानमंत्री’’ है जिसने हमारी रणनीतिक स्वायत्तता का आत्मसमर्पण कर दिया है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता भंडारी ने अपने तीखे जवाब में कहा, ‘‘भारत विरोधी कांग्रेस चाहती है कि भाजपा एक ऐसे झगड़े पर टिप्पणी करे; जिसमें वह सीधे तौर पर शामिल नहीं है; जबकि उसका अपना ट्रैक रिकॉर्ड राष्ट्रीय हित की कीमत पर चुप्पी साधने का है!’’

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ‘‘निर्देश’’ दिया था कि किसी भी मंत्री को नक्सली आतंक के कारण बेगुनाह लोगों की मौत पर दुख न जताने दें।

उन्होंने कहा, ‘‘टुकड़े-टुकड़े कांग्रेस भारत और भारतीयों से नफरत करती है; वोट बैंक से प्यार करती है।’’

भाजपा के एक और राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी यही बात कही। पूनावाला ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कहने पर कैबिनेट सचिव के 2010 के पत्र में दंतेवाड़ा में 76 सीआरपीएफ जवानों के बेरहमी से हुए हत्याकांड के ठीक बाद सभी केंद्रीय मंत्रियों को नक्सल/माओवादी मुद्दे पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से रोक दिया था।”

भाजपा प्रवक्ता ने कहा, ‘‘वामपंथी उग्रवाद पर कांग्रेस का नरम रुख: अपने ही मंत्रियों को चुप कराओ, माओवादियों के साथ नरमी से पेश आओ और सुरक्षा बलों को कीमत चुकाने दो।”

उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस “तब भी कमजोर थी और अब भी।”

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के “सबसे बड़े आंतरिक सुरक्षा खतरे’’ के खिलाफ मजबूत इरादा और एकता दिखाने के बजाय, कांग्रेस ने “चुप्पी, डैमेज कंट्रोल और आलोचना को छिपाना” चुना।

भाषा वैभव पवनेश

पवनेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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